Ranchi News : वित्तीय सहायता और संसाधनों के आवंटन में झारखंड के साथ न्याय किया जाये: झामुमो

Published by : PRADEEP JAISWAL Updated At : 30 May 2025 10:46 PM

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झामुमो ने 16वें वित्त आयोग के समक्ष राज्य की विशेष परिस्थितियों को उजागर करते हुए वित्तीय सहायता और संसाधनों के आवंटन में न्याय की मांग की है.

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रांची (विशेष संवाददाता). झामुमो ने 16वें वित्त आयोग के समक्ष राज्य की विशेष परिस्थितियों को उजागर करते हुए वित्तीय सहायता और संसाधनों के आवंटन में न्याय की मांग की है. झामुमो महासचिव सह प्रवक्ता विनोद कुमार पांडेय और नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार ने आयोग से आग्रह किया कि झारखंड के सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन, पर्यावरणीय चुनौतियों और केंद्र-राज्य संबंधों में संतुलन को ध्यान में रखते हुए विशेष सहायता प्रदान की जाये. पार्टी ने सूखा प्रभावित जिलों के लिए आपदा राहत सहायता और क्रेडिट-डिपॉजिट (सीडी) अनुपात में सुधार के लिए विशेष पहल की भी अपील की. झामुमो ने केंद्रीय सहायता में लगातार हो रही गिरावट पर चिंता व्यक्त करते हुए राज्य को न्यायसंगत हिस्सेदारी मिलने और उसकी वित्तीय स्थिति मजबूत करने की मांग भी रखी. अनुसूचित क्षेत्रों को मिले विशेष संरक्षण : झारखंड के कई क्षेत्र अनुसूचित पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आते हैं. झामुमो का कहना है कि जैसे छठी अनुसूची वाले क्षेत्रों को विशेष अधिकार और सहायता मिलती है, वैसे ही पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों को भी विशेष वित्तीय सहायता दी जानी चाहिए. इससे आदिवासी, दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक, महिला, युवा, किसान और स्थानीय उद्यमी सशक्त होंगे और राष्ट्र निर्माण में भागीदारी बढ़ेगी. यह भी कहा कि झारखंड भौगोलिक विषमताओं, नक्सल प्रभावित इलाकों और दुर्गम क्षेत्रों के कारण विकास में पिछड़ रहा है. पार्टी ने वर्तमान कर व्यवस्था में असमानता का मुद्दा उठाया, जिसमें बड़े राज्यों को अधिक लाभ मिलता है, जबकि झारखंड जैसे संसाधन-आधारित राज्यों को अपेक्षित हिस्सेदारी नहीं मिल पाती. झामुमो ने करों के बंटवारे में पिछड़े राज्यों की हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग की. डीएमएफटी में राज्य की हिस्सेदारी बढ़े : पार्टी ने यह भी बताया कि खनिज संपदा से भरपूर होने के बावजूद खनन का बड़ा आर्थिक लाभ केंद्र को मिलता है, जबकि पर्यावरण और सामाजिक नुकसान राज्य को उठाना पड़ता है. झामुमो ने डिस्ट्रिक मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) में राज्य की हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग की ताकि खनन प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्वास और विकास पर खर्च किया जा सके. इसके अतिरिक्त, केंद्र सरकार के उपक्रमों पर झारखंड का करीब एक लाख 40 हजार करोड़ रुपये का बकाया होने पर भी पार्टी ने वित्त आयोग से वसूली में मदद की अपील की.

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