जोन्हा में रामकथा के पांचवें दिन भगवान का जन्मोत्सव प्रसंग सुन भावुक हुए श्रोता, बांटी गईं मिठाइयां

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श्रीराम कथा का वाचन करते विंध्याचल से आए आचार्य धर्मराज शास्त्री (बाएं) और कथाश्रवण करते श्रोतागण. फोटो: प्रभात खबर

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Jonha Ram Katha: जोन्हा के श्रीराम मंदिर में रामकथा के पांचवें दिन राम जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया. कथा व्यास के भजन से श्रद्धालु भावुक हो गए. फूलों की वर्षा, गुलाल और मिठाइयों के वितरण से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया. बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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जोन्हा से जितेंद्र कुमार की रिपोर्ट

Jonha Ram Katha: झारखंड के रांची जिले के जोन्हा स्थित श्रीराम मंदिर परिसर में नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा का आयोजन किया गया है. कथा के पांचवें दिन जन्मोत्सव प्रसंग सुनकर उपस्थित श्रोतागण भाव-विभोर हो गए और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया. इस खुशी में श्रीराम कथा के दौरान मिठाइयां भी बांटी गईं.

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जन्मोत्सव प्रसंग पर गूंजा ‘जय श्रीराम’

कथा के दौरान विंध्याचल से पधारे कथा व्यास आचार्य धर्मराज शास्त्री ने जैसे ही ‘भए प्रगट कृपाला, दीन दयाला, कौशल्या हितकारी…’ का मधुर गान किया. उनके इस गान के दौरान पूरा पंडाल शंख, घंटे-घड़ियाल और ‘जय श्रीराम’ के जयघोष से गूंज उठा. भगवान श्रीराम के जन्म का प्रसंग सुनते ही श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं.

अयोध्या जैसा बना कथा स्थल

राम जन्मोत्सव के दौरान कथा स्थल का दृश्य त्रेतायुग की अयोध्या नगरी जैसा प्रतीत हो रहा था. भगवान की आकर्षक झांकी सजाई गई, जिसके दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे. महिलाओं ने सोहर और बधाई गीत गाए, जिससे माहौल और भी भक्तिमय हो गया.

फूलों की वर्षा और गुलाल से सजा माहौल

जन्मोत्सव के मौके पर श्रद्धालुओं ने फूलों की वर्षा की और गुलाल उड़ाकर खुशी का इजहार किया. भक्तगण झूमते नजर आए और पूरे परिसर में उत्सव जैसा माहौल बना रहा. इस दौरान श्रद्धालुओं के बीच मिठाइयां बांटी गईं और एक-दूसरे को बधाई दी गई.

आचार्य ने बताया राम जन्म का महत्व

आचार्य धर्मराज शास्त्री ने व्यासपीठ से राम जन्म का महत्व समझाते हुए कहा कि जब पृथ्वी पर अधर्म और अत्याचार बढ़ गया था, तब भगवान विष्णु ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के रूप में अवतार लिया. उन्होंने कहा कि भगवान राम का जीवन सत्य, धर्म और मर्यादा का प्रतीक है, जो समाज को सही मार्ग दिखाता है.

महाआरती और भंडारे का आयोजन

कथा विश्राम के बाद भगवान की भव्य महाआरती उतारी गई. इसके पश्चात भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया. आयोजन समिति द्वारा सभी श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी.

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बड़ी संख्या में जुटे श्रद्धालु

इस अवसर पर आयोजन समिति के अध्यक्ष बलराम साहू, राजेश साहू, संयोजक संतोष साहू, विनय महतो, मनोज साहू, मधुसूदन साहू, सीताराम साहू, प्रदीप साहू, अजय मंडल, उदय साहू, प्रकाश साहू, रंजीत साहू, परमेश्वर, रतन दूबे, दीनदयाल साहू, प्रतिमा देवी, विनोद मिश्रा, शकुंतला देवी और वसंत सुंडी समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे. पूरे आयोजन में भक्ति, आस्था और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला.

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