झामुमो ने कहा- जिलों में थर्ड और फोर्थ ग्रेड में स्थानीय को मिले 100 प्रतिशत आरक्षण, लागू हो सरना धर्म कोड

महाधिवेशन में हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन. बीच में हैं हेमंत की मां और रूपी सोरेन.
JMM News: झारखंड मुक्ति मोर्चा ने राजधानी रांची में आयोजित 2 दिवसीय केंद्रीय महाधिवेशन के पहले दिन 16 राजनीतिक प्रस्ताव पारित किये. इसमें जिला स्तर पर थर्ड और फोर्थ ग्रेड की सरकारी नौकरी में स्थानीय लोगों को 100 फीसदी आरक्षण देने की मांग की गयी. सरना धर्मकोड समेत कई अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी पारित हुए हैं. झामुमो के राजनीतिक प्रस्ताव में क्या-क्या है, जानने के लिए पढ़ें ये रिपोर्ट.
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JMM News: झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने 13वें केंद्रीय महाधिवेशन के पहले दिन 16 सूत्री राजनीतिक प्रस्ताव पारित किये गये. पार्टी के वरिष्ठ विधायक स्टीफन मरांडी की ओर से पेश राजनीतिक प्रस्ताव में पार्टी ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ हल्ला बोला है. इसमें रोजगार और जमीन वापसी के मुद्दे पर राज्य सरकार से मांग भी रखी है. राजनीतिक प्रस्ताव में कहा गया है कि पार्टी राज्य में किसी भी तरह के परिसीमन का विरोध करेगी. पार्टी ने वर्तमान परिसीमन को संवैधानिक तौर पर गलत करार दिया है. जिलों में थर्ड और फोर्थ ग्रेड की नौकरी में स्थानीय लोगों को 100 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग की गयी है.
परिसीमन का झामुमो ने किया विरोध
झामुमो की ओर से कहा गया है कि देश में भाषायी अल्पसंख्यक एसटी एससी के प्रतिनिधित्व पर हमला कर उसके अधिकारों में कटौती की जा रही है. परिसीमन संविधान के अनुच्छेद 80-81 के विरुद्ध है, जिसमें साफ तौर पर लोकसभा और राज्यसभा की संख्या निश्चित की गयी है. अपने राजनीतिक प्रस्ताव में झामुमो ने खतियान आधारित पहचान को स्थानीय पहचान प्रदान करते हुए जिला संवर्ग में तृतीय और चतुर्थ वर्ग की नियुक्तियों को 100 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग रखी है.
सरकारी नौकरी में स्थानीय लोगों को 75 प्रतिशत आरक्षण की मांग
आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत सभी विभागों में जिला स्तर पर तृतीय और चतुर्थ वर्ग की नौकरियों में भी स्थायी निवासियों को 100 प्रतिशत नियुक्ति और राज्य के संपूर्ण नियोजन में स्थानीय निवासियों के लिए 75 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने की बात कही गयी है.
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आदिवासियों-मूलवासियों को मिले स्थायी पट्टा
झामुमो ने झारखंड में आदिवासियों और मूलवासियों को स्थायी पट्टा देने का प्रस्ताव पारित करने की मांग रखी है. सीएनटी और एसपीटी एक्ट में जोड़-तोड़ से रोकने के लिए कारगर कानून लाने की मांग की गयी है. इसके साथ भू-वापसी आयोग का गठन करने की मांग की गयी है. आदिवासी-मूलवासी को जमीन पर स्थायी स्वामित्व मिले. पार्टी ने जंगल में निवास कर रही जनजातियों को उनके आवासीय और कृषि के लिए स्थायी राजस्व पट्टा और वनोपज पर अधिकार सुनिश्चित करने की मांग की है.
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सरना धर्म कोड और आरक्षण की सीमा बढ़ाने पर जोर
आदिवासियों के लिए अलग सरना धर्म कोड और राज्य की नौकरियों में एसटी-एससी और पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण की सीमा बढ़ाने की प्रतिबद्धता पार्टी ने दोहरायी है. केंद्र सरकार से जनगणना कोड में सरना धर्म कोड को शामिल करते हुए जातीय जनगणना कराने की मांग राजनीतिक प्रस्ताव के माध्यम से की गयी है. वहीं, राज्य को नौवीं अनुसूची में शामिल कर एसटी को 28 प्रतिशत, एससी को 14 प्रतिशत और पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के मुद्दे पर पार्टी अटल है. अपने राजनीति प्रस्ताव में झामुमो ने कहा है कि इसके लिए केंद्र सरकार राज्य को संवैधानिक कवच प्रदान करे.
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By Mithilesh Jha
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