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Iranian Rial: डॉलर के मुकाबले 13 लाख के नीचे पहुंची ईरानी रियाल, खाद्य महंगाई बढ़ने की आशंका

Updated at : 15 Dec 2025 9:36 PM (IST)
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Iranian Rial

ईरानी रियाल में बड़ी गिरावट

Iranian Rial: ईरानी रियाल डॉलर के मुकाबले 13 लाख के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई है, जिससे ईरान में खाद्य महंगाई बढ़ने की आशंका गहरा गई है. अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध, क्षेत्रीय तनाव और परमाणु वार्ता में अनिश्चितता के बीच रियाल की गिरावट तेज हुई है. कमजोर मुद्रा से आयात महंगा हो रहा है और आम जनता के घरेलू बजट पर भारी दबाव पड़ रहा है, जिससे आर्थिक संकट और गहराने के संकेत मिल रहे हैं.

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Iranian Rial: ईरान की मुद्रा रियाल में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. सोमवार को ईरानी रियाल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 13 लाख के पार पहुंचते हुए नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गई. यह गिरावट ऐसे समय में आई है, जब देश पहले से ही आर्थिक दबाव, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और क्षेत्रीय तनावों से जूझ रहा है. मुद्रा की इस कमजोरी ने आम लोगों की चिंताएं और बढ़ा दी हैं.

दो हफ्ते में और तेज हुई गिरावट

दिलचस्प बात यह है कि 12 लाख रियाल प्रति डॉलर का स्तर टूटे अभी दो हफ्ते भी पूरे नहीं हुए थे और उससे पहले ही रियाल में गिरावट और तेज हो गई. मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, तेहरान के खुले बाजार में डॉलर का भाव 13 लाख रियाल से ऊपर देखा गया. इससे साफ है कि 3 दिसंबर के बाद से रियाल की कमजोरी की रफ्तार और तेज हो गई है. उस दिन भी रियाल अपने तत्कालीन रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंची थी.

प्रतिबंध और तनाव ने बढ़ाया दबाव

विशेषज्ञों का मानना है कि रियाल की गिरावट के पीछे कई कारण काम कर रहे हैं. अमेरिका और पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंध, क्षेत्रीय भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी निवेश की कमी ने ईरान की अर्थव्यवस्था को कमजोर किया है. इसके चलते डॉलर की मांग बढ़ रही है और रियाल लगातार दबाव में आ रही है.

खाद्य महंगाई बढ़ने का खतरा

रियाल की कमजोरी का सबसे बड़ा असर महंगाई पर पड़ रहा है. मुद्रा के कमजोर होने से आयात महंगा हो जाता है, जिसका सीधा असर खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों पर पड़ता है. ईरान में पहले से ही खाने-पीने की चीजें आम लोगों की पहुंच से दूर होती जा रही हैं. अब रियाल में आई इस नई गिरावट से खाद्य महंगाई और तेज होने की आशंका जताई जा रही है, जिससे घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा.

पेट्रोल कीमतों से और बढ़ सकती है परेशानी

हाल के दिनों में पेट्रोल कीमतों में किए गए बदलाव भी महंगाई को और हवा दे सकते हैं. ईंधन महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ती है, जिसका असर अंततः हर वस्तु की कीमत पर पड़ता है. विश्लेषकों का कहना है कि रियाल की गिरावट और पेट्रोल मूल्य में बदलाव मिलकर महंगाई की नई लहर ला सकते हैं.

परमाणु वार्ता ठप, बाजार में अनिश्चितता

यह गिरावट ऐसे समय में हुई है, जब ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत फिर से शुरू होने की उम्मीदें कमजोर पड़ती नजर आ रही हैं. वाशिंगटन और तेहरान के बीच वार्ता ठप होने से निवेशकों का भरोसा डगमगा गया है. इसका असर सीधे मुद्रा बाजार पर दिख रहा है.

इजराइल-ईरान तनाव ने बढ़ाई चिंता

इसके अलावा, जून में ईरान और इजराइल के बीच 12 दिनों तक चले युद्ध के बाद हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं. दोबारा टकराव की आशंका को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. ईरान में कई लोग एक व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका जता रहे हैं, जिससे बाजार में डर और अस्थिरता बढ़ गई है.

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आम जनता पर सबसे ज्यादा असर

रियाल की गिरावट का सबसे बड़ा खामियाजा आम ईरानी नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है. बचत की कीमत घट रही है, रोजमर्रा का खर्च बढ़ रहा है और भविष्य को लेकर अनिश्चितता गहरा रही है. अगर हालात में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो ईरान को आने वाले समय में और गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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