ePaper

Jharkhand Weather: पछुआ हवा से बढ़ेगी गर्मी, झारखंड के किसानों को मौसम वैज्ञानिक ने दी ये सलाह

Updated at : 14 Apr 2024 12:43 PM (IST)
विज्ञापन
Jharkhand Weather: पछुआ हवा से बढ़ेगी गर्मी, झारखंड के किसानों को मौसम वैज्ञानिक ने दी ये सलाह

PM Kisan Yojna

jharkhand weather: झारखंड में पछुआ हवा के प्रकोप से गर्मी बढ़ेगी. इसका असर सब्जियों पर भी देखा जाएगा. बीएयू के मौसम वैज्ञानिक ने किसानों को जरूरी सलाह दी है.

विज्ञापन

Jharkhand Weather: झारखंड में कल से यानी सोमवार (15 अप्रैल) से पछुआ हवा चलेगी. मौसम का रुख बदलेगा. पछुआ हवाओं की वजह से गर्मी बढ़ेगी. कृषि वैज्ञानिकों ने इस दौरान किसानों को कई तरह की सावधानी बरतने की सलाह दी है.

सोमवार से बढ़ने लगेगा झारखंड का अधिकतम तापमान

रांची स्थित बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) के मौसम वैज्ञानिक अनुराग सनड्या ने प्रभात खबर (prabhatkhabar.com) को बताया कि झारखंड के मौसम की बात करें, तो सोमवार से अधिकतम तापमान में वृद्धि होने लगेगी. आर्द्रता में कमी आएगी. बढ़ती गर्मी में किसानों, खासकर सब्जी उगाने वाले किसनों को कुछ विशेष सावधानी बरतना चाहिए. सब्जियों की बेहतर फसल के लिए उन्हें अभी से कुछ कदम उठाने की जरूरत है.

कद्दू की सब्जियों में लाल भृंग कीट का प्रकोप

मौसम वैज्ञानिक सनड्या ने कहा कि कद्दू वर्ग की सब्जियों में लाल भृंग कीट का प्रकोप देखा जा रहा है. सब्जियों को इस कीट से बचाने के लिए खेत में राख का छिड़काव शुरू कर दें. अगर राख की व्यवस्था नहीं है, तो नीम आधारित कीटनाशी का इस्तेमाल करें. प्रकोप ज्यादा दिख रहा हो, तो लैंब्डासाईहालोथ्रिन का इस्तेमाल करें.

लाल भृंग कीट के प्रकोप से सब्जियों को ऐसे बचाएं

उन्होंने बताया कि एक लीटर पानी में 1 मिलीलीटर के हिसाब से लैंब्डासाईहालोथ्रिन को मिलाएं और इस घोल को पौधों की जड़ों को भिंगो दें. इतना ही नहीं, सब्जियों के बीज जहां डाले थे, उन जगहों को पुआल से ढंक दें, ताकि पौधों को अत्यधिक गर्मी से बचाया जा सके. इससे नमी को भी संरक्षित किया जा सकता है.

जड़ सड़न का भी कद्दू की सब्जियों में देखा जा रहा है प्रकोप

कद्दू वर्ग की सब्जी की फसलों में जड़ सड़न का भी प्रकोप देखा जा रहा है. इससे बचाव के लिए भई नेटिवों (टेबुकोनजोल 50 फीसदी + ट्राइऑक्सिस्ट्रोबीन 25 फीसदी डब्ल्यू जी) प्रति 2 लीटर पानी में एक ग्राम मिलाकर छिड़काव करें.

टमाटर व बैंगन को फल छेदक कीट से बचाने के लिए करें ये उपाय

मौसम वैज्ञानिक के मुताबिक, टमाटर और बैंगन की फसलों में फल छेदक कीट लग गए हों, तो उससे बचाव के लिए किसानों को खेत में पक्षी बसेरा लगाना चाहिए. अगर फसल नष्ट हो गया है, तो उसे एकत्र करके जमीन में गाड़ दें. फल छेदक कीट की निगरानी के लिए दवा का भी छिड़काव करें. इसके लिए 2-3 प्रपंश प्रति एकड़ की दर से फिरोमोन प्रपंश लगाएं.

कीट की संख्या अधिक हो, तो करें इस दवा का छिड़काव

सनड्या ने बताया कि अगर कीट की संख्या अधिक हो गई है, तो पानी में प्रति लीटर 1 ग्राम बीटी मिलाकर खेतों में उसका छिड़काव करें. इसके बाद भी अगर फल छेदक का प्रकोप कम न हो, तो 15 दिन के बाद प्रति 4 लीटर पानी में 48 ईसी@1 मिली स्पिनोसैड कीटनाशी का छिड़काव करें.

बिना रसायन के फल छेदक से ऐसे करें सब्जियों का बचाव

अगर आप सब्जी की फसल में रासायनिक दवाओं का छिड़काव नहीं करना चाहते हैं, तो फल छेदक से बचाव के लिए फेरोमोन ट्रैप का इस्तेमाल कर सकते हैं. एक एकड़ में 4-5 फेरोमोन ट्रैप लगाने की मौसम वैज्ञानिकों ने सलाह दी है.

फल सड़न एवं पत्ती धब्बा रोग आक्रमण से ऐसे बचाएं फसलों को

मौसम वैज्ञानिकों ने कहा है कि अगर फसल में फल सड़न एवं पत्ती का धब्बा रोग का आक्रमण हो रहा हो, तो ग्रसित पत्तियों को तोड़ लें और फफूंदीनाशी दवा मैनकोजेब का छिड़काव करें. प्रति लीटर पानी में 2 ग्राम मैनकोजेब का छिड़काव कर सकते हैं.

Also Read : Jharkhand Weather: झारखंड में आज करवट बदलेगा मौसम, इन इलाकों में बारिश के आसार, जानें कल से कैसा रहेगा

Also Read : Jharkhand Weather: झारखंड के लोगों को गर्मी से मिली राहत, लेकिन इस दिन से फिर बढ़ेगा तापमान

विज्ञापन
Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola