झारखंड के कई इलाकों में सूदखोर फैला रहे जाल, प्रताड़तना से तंग आकर कई लोग दे रहे जान, जानें क्या कहता है कानून

झारखंड के कोयलांचल व हजारीबाग में सूदखोर फैला रहे जाल, एक बार ब्याज के दलदल में फंसे, तो उबरना असंभव, जेवर, जमीन और सैलरी सबकुछ दे देने पर भी मूलधन चुकता नहीं होता, सूदखोरों के उत्पीड़न से हताशा में कई लोग कर रहे आत्महत्या. चक्रवृद्धि ब्याज लेना कानून मना है
Jharkhand News, Usurious in jharkhand रांची : सूदखोरों का मकड़जाल कोयलांचल और हजारीबाग के कई इलाकों में फैल रहा है. इनके जाल में एक बार जो फंसता है, वह जिंदगी भर नहीं निकल पाता है. जेवर और जमीन बेचकर ब्याज का कई गुना चुका देने के बाद भी इनका मूलधन कभी खत्म नहीं होता. चक्रवृद्धि ब्याज दर की रफ्तार के आगे जीवन थम जाती है. सूदखोर पैसा लेने का रसीद तक नहीं देते हैं.
इनके खाता-बही में सिर्फ ब्याज की राशि जमा होने का हिसाब दर्ज होता है. इन इलाकों में सूदखोरों का सिंडिकेट बना हुआ है. अगर किसी का ब्याज अत्यधिक हो जाता है, तो उसी गिरोह का दूसरा सदस्य पीड़ित के पास जाकर मदद करने के नाम पर कर्ज देता है. फिर भुक्तभोगी उसके चंगुल में फंस जाता है. इस प्रकार पीड़ित व्यक्ति कभी इस जाल से बाहर नहीं निकल पाता. सूदखोरों की प्रताड़ना से तंग आकर कई पीड़ित या तो शहर छोड़ देते हैं या फिर आत्महत्या तक कर लेते हैं.
सूदखोरों के उत्पीड़न से तंग आकर हताशा में कई लोग आत्महत्या कर चुके हैं. कई लोगों का मानसिक संतुलन बिगड़ गया. सूदखोर आम लोगों को मजबूरी में पैसा देकर फंसाते हैं. दस रुपये सैकड़ा प्रति माह की दर से कर्ज देते हैं. पैसा भी नौकरीपेशा वाले लोगों या व्यवसाय से जुड़े लोगों को देते हैं. इसके एवज में उनसे साइन किया हुआ चेकबुक और एटीएम कार्ड रख लेते हैं. ब्याज नहीं चुकानेवाले लोगों का पगार तक निकाल लेते हैं. पैसा वसूलने के लिए सूदखोर गुंडे रखते हैं. पीड़ित और उसके परिवार को धमकी देते हैं.
हजारीबाग हाउसिंग बोर्ड में नौकरी करनेवाले एक कर्मी ने कुछ वर्ष पहले आत्महत्या कर ली थी. उन्होंने बेटे की पढ़ाई के लिए कर्ज लिया था. कई लाख देने के बाद भी उनका कर्ज खत्म नहीं हुआ था. उन्होंने मुहल्ले के सूदखोरों की प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर ली थी. बेबस परिवार दबंग सूदखोरों के आतंक के कारण उनके खिलाफ आवाज नहीं उठा सका.
हजारीबाग के एक सरकारी कर्मी ने अपनी पत्नी के हार्ट के इलाज के लिए डीपूगढ़ा के सूदखोर से दो लाख रुपये कर्ज दस रुपये सैकड़ा पर लिया था. इसके एवज में शहर की पैतृक जमीन बेचकर दस लाख रुपये दे चुका है. फिर भी सूदखोर के अनुसार साढ़े तीन लाख बकाया है. उसी मुहल्ले के एक और सूदखोर से दूसरे सूदखोर को ब्याज देने के लिए डेढ़ लाख रुपये सूद पर लिया था. इसके एवज में तीन लाख 60 हजार रुपये चुका दिया.
फिर भी दो लाख रुपये बकाया बताया जा रहा है. इन सूदखोरों की प्रताड़ना से तंग आकर उसने दूसरे सूदखोर से तत्काल एक लाख रुपये कर्ज लिया था. गांव की 13 कट्ठा जमीन बेचकर आठ लाख चुकाये. फिर भी सूदखोर 3 लाख 75 हजार बकाया बता रहा है. सूदखोरों का कर्ज चुकाने में वह कई साल से सारा वेतन दे चुका है. पत्नी का जेवर तक बेच चुका है.
धनबाद के धनसार में सूदखोरों के आतंक से सत्येंद्र चौहान ने पांच मार्च 2021 को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. आत्महत्या करने से कुछ दिन पहले ही उसने बैंक से दस लाख रुपये लोन लेकर सूदखोरों को दिये थे. उसकी पत्नी ममता ने गोधर रवानी बस्ती के सूदखोर हरि रवानी, अयोध्या सिंह चौहान और जगदीश रवानी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी थी.
ब्याज पर पैसा लेकर नहीं लौटाने वाला व्यक्ति यदि आत्महत्या कर लेता है और सूद पर पैसा देनेवाले पर उकसाने का आरोप लगता है, तो वैसी स्थिति में गैर इरादतन हत्या (धारा-306) का मामला बनता है. यह गैर जमानतीय मामला है. इसमें अधिकतम 10 साल की सजा का प्रावधान है. वहीं, सूद पर पैसा देनेवालों को मनी लैंडर्स एक्ट के तहत लाइसेंस लेना अनिवार्य है.
अमृतांश वत्स, अधिवक्ता झारखंड हाइकोर्ट
Posted By : Sameer Oraon
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By Prabhat Khabar News Desk
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