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जिला स्तर पर लंबित योजनाओं की मुख्य सचिव ने की समीक्षा, उपायुक्तों को दिये ये निर्देश

Updated at : 20 Feb 2025 7:00 PM (IST)
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Jharkhand News Chief Secretary Alka Tiwary Review Meeting

समीक्षा बैठक करतीं झारखंड की मुख्य सचिव अलका तिवारी. साथ में हैं अन्य पदाधिकारी. फोटो : प्रभात खबर

Jharkhand News: झारखंड में जिला स्तर पर लंबित योजनाओं की मुख्य सचिव अलका तिवारी ने गुरुवार को समीक्षा की. उन्होंने उपायुक्तों को क्या-क्या निर्देश दिये, यहां पढ़ें.

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Jharkhand News: झारखंड की मुख्य सचिव अलका तिवारी ने जिला स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही समस्याओं का समाधान समन्वय बनाकर करने का निर्देश दिया है. उन्होंने राज्य के उपायुक्तों को कहा कि वे कैलेंडर बनाकर कार्यों का निपटारा करें. कैलेंडर के अनुसार, विभिन्न मसलों पर बैठकें करें. उसकी रिपोर्ट समय पर विभागों को दें. इससे योजना क्रियान्वयन में गति भी आयेगी और विभागों को योजना को लागू करने में सहूलियत भी आयेगी. उन्होंने कहा कि योजनाएं बाधित होती हैं, तो उस पर होने वाले खर्च का लाभ राज्य को नहीं मिल पाता. इसलिए योजनाओं का भौतिक निरीक्षण करते हुए समस्या के समाधान पर फोकस करें. वह गुरुवार को विभागों की उन योजनाओं की समीक्षा कर रहीं थीं, जो जिला स्तर पर बाधित हो रहीं हैं अथवा लेटलतीफी का शिकार हो रहीं हैं.

योजनाओं को पूर्ण करने में आ रही रुकावटों को जल्द से जल्द दूर करें

मुख्य सचिव की समीक्षा बैठक में पता चला कि अधिकांश योजनाएं 70 से 80 प्रतिशत तक पूरी हो चुकी हैं. बाकी बचे काम में रुकावटें आ रहीं हैं. मुख्य सचिव ने नगर विकास विभाग की रांची शहरी सीवरेज स्कीम, वाटर सप्लाई स्कीम और पम्पिंग स्टेशन के क्रियान्वयन में जमीन को लेकर आ रही समस्या का समयबद्ध तरीके से समाधान करने का निर्देश दिया. रांची के उपायुक्त ने कहा कि अधिकांश मामले में समस्या का समाधान हो चुका है.

इस वजह से अधूरी रह जातीं हैं योजनाएं

रामगढ़, धनबाद, कोडरमा, साहिबगंज, सरायकेला-खारसावां, पश्चिमी सिंहभूम, पलामू और बोकारो में शहरी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और वाटर सप्लाई योजनाओं को धरातल पर उतारने में जमीन की समस्या सामने आयी. उपायुक्तों को विशेष पहल कर जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया. पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की ओर से बताया गया कि नल से जल योजना से प्रत्येक घर को जोड़ने और शौचालय बनाकर गांवों को ओडीएफ (खुले में शौच से मुक्त) घोषित करने की स्थिति लगभग अंतिम चरण में है, लेकिन गांवों में 4-5 घरों के इस योजना से आच्छादित नहीं होने से योजना अधूरी रह जातीं हैं. मुख्य सचिव ने उपायुक्तों को अतिरिक्त रुचि लेकर इस काम को यथाशीघ्र संपन्न कराने को कहा.

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संबंधित विभाग से समन्वय बनायें उपायुक्त, समस्याओं को करें दूर

उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने बताया कि विभिन्न जिलों में डिग्री कॉलेज, पॉलिटेक्निक कॉलेज और राजकीय अभियंत्रण कॉलेज निर्माण में जमीन की समस्या आड़े आ रही है. मुख्य सचिव ने उपायुक्तों से कहा कि संबंधित विभाग के साथ समन्वय बनाकर जमीन उपलब्ध करायें. उन्होंने स्कूली शिक्षा विभाग की ओर से क्वालिटी एजुकेशन के लिए संपर्क फाउंडेशन की सहायता से चयनित स्कूलों में उपलब्ध कराये गये संसाधन के समुचित उपयोग पर बल देते हुए कहा कि यह राज्य के हित में होगा.

कृषि विभाग से जुड़ी योजनाओं को समय पर पूरा करें

कृषि विभाग से जुड़ी पीएम किसान योजना, बिरसा ग्राम सह समेकित पाठशाला, बिरसा-पीएम फसल बीमा योजना, मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना, आईसीडीपी एवं डीसीडीसी की समीक्षा के दौरान ऐसा देखने को मिला कि फसल बीमा योजना के लिए वास्तविक जमीन से अधिक जमीन पर बीमा का आवेदन दिया गया है. मुख्य सचिव ने कहा कि ऐसे आवेदनों की जांच करें और अनधिकृत दावे को खारिज करें. उन्होंने मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत लाभुकों को पशु देने के साथ उसका बीमा भी सुनिश्चित करने को कहा. साथ ही कृषि से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की कार्य प्रगति की समीक्षा के लिए जिलास्तरीय मॉनिटरिंग कमेटी और डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव डेवलपमेंट कमेटी की नियमित बैठक करने का निर्देश उपायुक्तों को दिया.

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इन वजहों से लंबित हैं योजनाएं

जल संसाधन विभाग की राज्य में चल रही विभिन्न परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान पाया गया कि अधिग्रहित भूमि पर अतिक्रमण, फॉरेस्ट क्लियरेंस, स्थानीय विवाद, भूमि अधिग्रहण, मुआवजा इत्यादि को लेकर योजनाएं प्रभावित हो रहीं हैं. मुख्य सचिव ने सभी संबंधित उपायुक्तों को निर्देश दिया कि योजनाओं के सुचारु संचालन के लिए प्रशासनिक स्तर से बाधा को दूर कराएं. इसके अतिरिक्त राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग और ऊर्जा विभाग की जिलों से जुड़ी समस्याओं की भी समीक्षा की गयी और उपायुक्तों को जरूरी निर्देश दिये गये.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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