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रिम्स निदेशक को हटाये जाने के आदेश पर हाईकोर्ट ने लगायी रोक, सरकार से मांगा जवाब

Updated at : 28 Apr 2025 12:32 PM (IST)
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Jharkhand High Court

Jharkhand High Court

Jharkhand High Court News: झारखंड सरकार को हाईकोर्ट में झटका लगा है. रिम्स के निदेशक डॉ राजकुमार को उनके पद से हटाये जाने के सरकार के आदेश पर झारखंड हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है. कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब भी मांगा है. 17 अप्रैल को स्वास्थ्य मंत्रालय ने डॉ राजकुमार को रिम्स निदेशक के पद से हटाने का आदेश जारी किया था. इस आदेश के खिलाफ डॉ राजकुमार ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी.

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Jharkhand High Court News| रांची, राणा प्रताप: राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स) के निदेशक डॉ राजकुमार को उनके पद से हटाये जाने के मामले में सरकार को झारखंड हाईकोर्ट के झटका लगा है. कोर्ट ने स्वास्थ्य मंत्रालय के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें डॉ राजकुमार को उनके पद से हटा दिया गया था. डॉ राजकुमार ने झारखंड सरकार के इस आदेश को चुनौती देते हुए झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी. सोमवार 28 अप्रैल को हाईकोर्ट में उनकी याचिका पर सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपक रोशन ने स्वास्थ्य मंत्रालय के आदेश पर रोक लगा दी. साथ ही सरकार को नोटिस भी जारी कर दिया.

17 अप्रैल के झारखंड सरकार के आदेश पर लगी रोक

जस्टिस दीपक रोशन ने केस की अगली तारीख 6 मई मुकर्रर कर दी. इससे पहले जस्टिस दीपक रोशन ने डॉ राजकुमार को रिम्स के निदेशक पद से हटाये जाने संबंधी 17 अप्रैल 2025 के स्वास्थ्य विभाग के आदेश पर रोक लगा दी. इसके बाद झारखंड सरकार को नोटिस जारी किया और अपना जवाब दाखिल करने के लिए कहा. केस की अगली सुनवाई 6 मई 2025 को होगी.

रिम्स निदेशक ने हाईकोर्ट में दी ये दलील

रिम्स के पूर्व निदेशक ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर सरकार के आदेश को नेचुरल जस्टिस और रिम्स नियमावली-2002 का सीधा उल्लंघन बताया. उन्होंने कहा कि रिम्स निदेशक पद पर उनकी नियुक्ति 3 वर्षों के लिए की गयी थी. उन पर झूठे आरोप लगाये गये और बिना उनका पक्ष सुने उन्हें निदेशक के पद से हटाने का आदेश जारी कर दिया गया. यह गलत है.

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रिम्स निदेशक मामले में बाबूलाल ने सरकार पर बोला हमला

डॉ राजकुमार को हटाये जाने के आदेश पर हाईकोर्ट की रोक को झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार के मुंह पर करारा तमाचा करार दिया है. मरांडी ने अपने सोशल मीडिया साइट ‘एक्स’ के हैंडल पर लिखा, ‘शासी परिषद की बैठक में स्वास्थ्य मंत्री और विभागीय अधिकारियों के दबाव में करोड़ों रुपए के अवैध भुगतान से इंकार करने पर रिम्स निदेशक डॉ राजकुमार को हटाने के हेमंत सरकार के फैसले पर माननीय उच्च न्यायालय ने रोक लगाकर हेमंत सरकार के मुंह पर करारा तमाचा मारा है.’

‘ईमानदार अधिकारी डॉ राजकुमार की तरह लड़ाई लड़ें’

भारतीय जनता पार्टी के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने आगे लिखा है कि हाईकोर्ट के इस फैसले से हेमंत सरकार द्वारा रिम्स जैसी प्रतिष्ठित स्वास्थ्य संस्था को अपने लूट का चारागाह बनाने की साजिश भी बेनकाब हुई है. उन्होंने लिखा, ‘राज्य के सभी ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों से मेरा निवेदन है कि आकंठ भ्रष्टाचार में डूबी सरकार के पापों में सहभागी बनने से बेहतर है डॉ राजकुमार की तरह लड़ाई लड़ें और झारखंड को लुटने से बचाएं.’

अधिकारियों पर गलत काम का दबाव डालने वाले मंत्री को मंत्रिमंडल से बाहर करें – मरांडी

इतना ही नहीं, मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अनुरोध किया है कि अनुचित भुगतान करने का दबाव नहीं मानने के चलते रिम्स निदेशक को हटाने के इस मामले की सीबीआई से जांच करवाने का आदेश दें और अधिकारियों पर गलत काम कराने का दबाव डालने वाले मंत्री को मंत्रिमंडल से बाहर करें. अगर अभी ऐसा नहीं किया, तो आने वाले दिनों में ऐसे घोटाले फिर से आपके गले का फांस बनेंगे.’

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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