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झारखंड विधानसभा चुनाव : दागी उम्मीदवारों को टिकट देने में सबसे आगे कौन?

Updated at : 06 Nov 2024 10:35 AM (IST)
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Jharkhand Chunav

Jharkhand Elections: झारखंड विधानसभा चुनाव के पहले चरण में सबसे ज्यादा दागी उम्मीदवार किस पार्टी ने उतारे हैं? कितने उम्मीदवारों पर क्रिमिनल केस दर्ज हैं?

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Jharkhand Elections|ADR Report|झारखंड में 2 चरणों में विधानसभा चुनाव कराए जा रहे हैं. पहले चरण में 43 सीटों के लिए 683 उम्मीदवार मैदान में हैं. इनमें से 682 के शपथ पत्र का विश्लेषण करने पर झारखंड इलेक्शन वॉच और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने पाया कि इनमें से 26 प्रतिशत यानी 174 उम्मीदवार दागी हैं. इनमें से 127 (19 प्रतिशत) उम्मीदवार ऐसे हैं, जिनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं.

जदयू के 100 फीसदी उम्मीदवारों पर दर्ज हैं गंभीर आपराधिक केस

आपराधिक मामलों का सामना कर रहे नेताओं को टिकट देने के मामले में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) सबसे आगे है. भाजपा और आजसू के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही पार्टी ने झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 में अपने 2 उम्मीदवार उतारे हैं. दोनों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं.

कांग्रेस के 17 में 11 उम्मीदवारों पर दर्ज हैं क्रिमिनल केस

जदयू के बाद नंबर आता है कांग्रेस पार्टी का. संख्या के लिहाज से कांग्रेस के दागी उम्मीदवार कम हैं, लेकिन प्रतिशत के हिसाब से देखेंगे, तो यह जदयू के बाद दूसरे नंबर की पार्टी है, जिसने सबसे अधिक दागदार प्रत्याशियों को टिकट दिया है. कांग्रेस ने पहले चरण में 17 उम्मीदवार उतारे हैं. इनमें से 11 यानी 65 प्रतिशत ने कहा है कि उनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं.

भाजपा ने 36 दागदार उम्मीदवारों को दिया है टिकट

दूसरे नंबर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) है. उसने 36 उम्मीदवारों को टिकट दिया है, जिसमें से 20 यानी 56 प्रतिशत की आपराधिक पृष्ठभूमि रही है. झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के कुल 23 प्रत्याशियों में 11 यानी 48 फीसदी पर आपराधिक मामले दर्ज हैं. बहुजन समाज पार्टी ने पहले चरण में 29 उम्मीदवार उतारे हैं, इनमें से (28 प्रतिशत) के दामन पर दाग हैं. राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा के साथ गठबंधन के तहत 5 उम्मीदवार उतारे हैं. इनमें से 3 (60 प्रतिशत) ने कहा है कि उनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं.

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झामुमो के 30 प्रतिशत प्रत्याशियों पर दर्ज हैं आपराधिक केस

अब बात करते हैं गंभीर आपराधिक केस का सामना कर रहे लोगों को टिकट देने वाली पार्टियों की. इस मामले में भी जदयू सबसे आगे है. उसके 100 फीसदी उम्मीदवारों पर गंभीर आपराधिक केस दर्ज हैं. दूसरे नंबर पर कांग्रेस पार्टी है. उसके 17 में से 8 (47 प्रतिशत) प्रत्याशियों पर गंभीर आपराधिक मामले चल रहे हैं. भाजपा के 36 में से 15 (42 प्रतिशत), झामुमो के 23 में से 7 (30 प्रतिशत), बसपा के 29 में से 6 (21 प्रतिशत), राजद के 5 में से 3 (60 प्रतिशत) प्रत्याशियों पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं.

इतने पर दर्ज हैं महिलाओं के खिलाफ अत्याचार के मुकदमे

झारखंड विधानसभा का चुनाव लड़ रहे 11 ऐसे उम्मीदवार हैं, जिन्होंने चुनाव आयोग को बताया है कि उनके खिलाफ महिलाओं पर अत्याचार से संबंधिक केस दर्ज हैं. 4 उम्मीदवारों पर तो हत्या से जुड़ी धाराएं लगी हैं. 40 ऐसे लोग चुनाव लड़ रहे हैं, जिन्होंने कहा है कि उनके खिलाफ हत्या के प्रयास से संबंधित मुकदमे चल रहे हैं.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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