झारखंड : नहीं हो सकता गांडेय विधानसभा क्षेत्र का उपचुनाव, राज्यपाल के सामने भाजपा ने रखा पक्ष

Updated at : 10 Jan 2024 4:09 AM (IST)
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झारखंड : नहीं हो सकता गांडेय विधानसभा क्षेत्र का उपचुनाव, राज्यपाल के सामने भाजपा ने रखा पक्ष

मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सत्तापक्ष के एक विधायक जो गांडेय विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, उनको मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दबाव देकर सीट इस्तीफा कराया.

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रांची : प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में प्रदेश भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को राजभवन जाकर राज्यपाल से मुलाकात की. साथ ही पिछले दिनों गांडेय विधानसभा उपचुनाव कराये जाने की स्थिति में उत्पन्न होने वाले संवैधानिक संकट से संबंधित भेजे गये पत्र की चर्चा की. नेताओं ने कहा कि गांडेय विधानसभा क्षेत्र का उप चुनाव नहीं हो सकता है. मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए श्री मरांडी ने कहा कि सत्तापक्ष के एक विधायक जो गांडेय विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, उनको मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दबाव देकर सीट इस्तीफा कराया. उन्होंने कहा कि सरफराज अहमद पूरी तरह स्वस्थ हैं, वे देश से बाहर भी नहीं जा रहे, ऐसे में उनका इस्तीफा अकारण नहीं हुआ, बल्कि मुख्यमंत्री अपनी जेल यात्रा के पूर्व लालू प्रसाद की तर्ज पर अपनी पत्नी कल्पना सोरेन को मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं.

उन्होंने कहा कि झारखंड में गांडेय के विधायक द्वारा दिये गये इस्तीफे के तहत उपचुनाव नहीं कराया जा सकता है. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 151 ए के तहत अगर सामान्य चुनाव में एक साल के कम का समय शेष हो, तो उपचुनाव नहीं कराये जा सकते हैं. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपने निर्णय (प्रमोद लक्ष्मण गुढ़ाधे बनाम भारत निर्वाचन आयोग) में यह स्पष्ट किया गया था कि अगर सामान्य चुनाव एक साल के अंदर होना हो, तो उपचुनाव नहीं कराये जा सकते हैं. आठ जनवरी 2023 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश जिसमें एक साल की अवधि से कम समय रहने पर भी उपचुनाव कराने का आदेश दिया गया था, उस पर रोक लगा दी गयी है.

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झारखंड में विधानसभा चुनाव दिसंबर 2024 में होने को हैं. सितंबर-अक्टूबर से प्रक्रिया शुरू हो जाती है. अतः सेक्शन 151ए, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 एवं सुप्रीम कोर्ट के आलोक में उपचुनाव नहीं कराये जा सकते हैं. उन्होंने कहा कि जिस दिन विधानसभा क्षेत्र के नियुक्त रिटर्निग ऑफिसर चुनाव आयोग को विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित कर यह सार्वजनिक बता देता है कि किस दल से और कितने निर्दलीय विधायक निर्वाचित हुए हैं, वही तिथि विधायक के निर्वाचन की मानी जाती है. सरकार का गठन विधानसभा सत्र कुछ दिन बाद हुआ, इससे उसका कुछ लेना-देना नहीं. उन्होंने कहा कि राज्य के सत्ताधारी गठबंधन राज्य की जनता और चुनाव आयोग दिग्भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं. श्री मरांडी ने कहा कि उन्होंने राज्यपाल से उनके द्वारा भेजे गये पत्र को चुनाव आयोग को प्रेषित करने का अनुरोध भी किया है. प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश महामंत्री डॉ प्रदीप वर्मा व बालमुकुंद सहाय शामिल थे.

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