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आदिवासियों के मसीहा जयपाल सिंह मुंडा 1940 से कर रहे थे अलग झारखंड राज्य की मांग

Updated at : 03 Jan 2025 6:00 AM (IST)
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jaipal singh munda

मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा.

Jaipal Singh Munda Messiah of Tribals: आदिवासियों के मसीहा जयपाल सिंह मुंडा ने अलग झारखंड राज्य की मांग 1940 में ही उठा दी थी. उनके जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें यहां पढ़ें.

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Jaipal Singh Munda Messiah of Tribals: झारखंड की माटी में जन्मे जयपाल सिंह मुंडा वह शख्सीयत थे, जिन्होंने सबसे पहले अलग झारखंड राज्य की मांग की थी. मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा ने वर्ष 1940 में झारखंड को अलग राज्य बनाने की मांग की थी. छोटानागपुर में 3 जनवरी 1903 को जन्मे जयपाल सिंह मुंडा ने 1940 में कांग्रेस के रामगढ़ अधिवेशन में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के सामने अपनी मांग रखी थी. जयपाल सिंह मुंडा झारखंड ही नहीं, देश के सबसे बड़े आदिवासी नेताओं में एक थे. खूंटी जिले के टकरा गांव में उनका जन्म हुआ. बचपन में उनको प्रमोद पाहन के नाम से जाना जाता था. उनका वास्तविक नाम ईश्वर जयपाल सिंह था. कलांतर में यही प्रमोद पाहन या ईश्वर जयपाल सिंह मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा बने.

शिक्षा से लेकर खेल और राजनीति में साबित की प्रतिभा

खूंटी के छोटे से गांव में जन्म लेने वाले जयपाल सिंह मुंडा के नाम कई कीर्तिमान हैं. देश के अति पिछड़े इलाके में भले उनका जन्म हुआ, लेकिन उनकी प्रतिभा का लोहा पूरी दुनिया ने माना. बात खेल की हो, राजनीति की हो या लेखन की, हर क्षेत्र में उन्होंने खुद को साबित किया. 1928 एम्सटर्डम ओलिंपिक में भारत की हॉकी टीम के कप्तान के रूप में उन्होंने देश को गोल्ड मेडल दिलाया.

जयपाल सिंह मुंडा ने पास की थी आईसीएस की परीक्षा

शिक्षा के क्षेत्र में भी जयपाल सिंह मुंडा ने अपनी प्रतिभा से सबको चकित कर दिया. अंग्रेजों के जमाने में होने वाली सबसे कठिन परीक्षा ‘इंडियन सिविल सर्विस’ (आईसीएस) पास की. आदिवासियों के कल्याण के लिए उन्होंने आईसीएस की ट्रेनिंग पूरी नहीं की. ट्रेनिंग छोड़कर उन्होंने राजनीति में कदम रखने का फैसला किया और जब तक जीवित रहे, आदिवासी हित की बात करते रहे, उनके अधिकारों के लिए लड़ते रहे.

आदिवासियों को हक दिलाने के लिए किया आदिवासी महासभा का गठन

आदिवासियों को उनका हक दिलाने के लिए जयपाल सिंह मुंडा ने वर्ष 1938 में आदिवासी महासभा का गठन किया. वर्ष 1950 में झारखंड पार्टी का गठन किया. वह भारत की संविधान सभा के सदस्य बने. संविधान सभा में जयपाल सिंह मुंडा ने यादगार भाषण दिया था. उन्होंने आदिवासियों के हितों की रक्षा के मुद्दे को पुरजोर तरीके से संविधानसभा में रखा था.

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जयपाल सिंह मुंडा कौन थे?

जयपाल सिंह मुंडा झारखंड की माटी में जन्मे देश के बड़े आदिवासी नेता थे. वह फुटबॉल और हॉकी के बेहतरीन खिलाड़ी थे. आईसीएस की परीक्षा पास की, लेकिन आदिवासियों के हित में काम करने के लिए राजनीति में आए. संविधान सभा में आदिवासियों के मुद्दों को प्रमुखता से रखा.

रामगढ़ में कांग्रेस अधिवेशन कब हुआ था?

वर्ष 1940 में रामगढ़ में कांग्रेस का अधिवेशन हुआ था. उस वक्त रामगढ़ अलग जिला नहीं था. वर्तमान में झारखंड की राजधानी रांची से सटा रामगढ़ अब अलग जिला बन चुका है. इसी अधिवेशन में मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के सामने अलग झारखंड राज्य के गठन का प्रस्ताव रखा था.

जयपाल सिंह मुंडा का जन्म कहां हुआ था?

जयपाल सिंह मुंडा का जन्म खूंटी जिले के टकरा गांव में हुआ था. छोटे से गांव से निकलकर उन्होंने देश-दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया. उनकी नेतृत्व क्षमता की आज भी लोग चर्चा करते हैं.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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