जागृति बिहार की जमीन बेचने कोशिश

Updated at : 06 Nov 2025 6:51 PM (IST)
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जागृति बिहार की जमीन बेचने कोशिश

स्वंयसेवी संस्था जागृति विहार को उजाड़ने का एक बार फिर से प्रयास शुरू कर दिया गया है.

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डकरा/मैक्लुस्कीगंज. पिछले 50 वर्षों से मैक्लुस्कीगंज का गौरवशाली इतिहास के रूप में पूरी दुनियां में विख्यात स्वंयसेवी संस्था जागृति विहार को उजाड़ने का एक बार फिर से प्रयास शुरू कर दिया गया है. कुछ स्थानीय जमीन दलाल मैक्लुस्कीगंज के बाहर के लोगों को बुला कर यहां की जमीन दिखा रहे हैं और बेचने की बात कह रहे हैं. मैक्लुस्कीगंज में एंग्लो-इंडियन, आर्मी के बड़े अधिकारी और बंगला फिल्म स्टारों के बसने-उजड़ने के दौरान ही 1974 में लपरा पंचायत अंतर्गत जोभिया गांव में 25 एकड़ जमीन पर इसके संस्थापक प्रो एसएन उपाध्याय ने जागृति विहार की स्थापना की थी. प्रकृति प्रेम, ग्रामीणों को स्वरोजगार से जोड़ने का अभियान, बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक, समाजसेवी, शिक्षाविदों के लगातार यहां आने-जाने से जोभिया गांव को लोग जागृति विहार के नाम से ही जानने लगे. प्रो.एसएन उपाध्याय द्वारा दुनियां के कई देशों में व्याख्यान देने के बदले जो आय होती थी, उसे इस संस्था के माध्यम से समाजसेवा के लिए खर्च करते थे. 12 दिसंबर 2018 को उनका निधन हो गया. उनके निधन के बाद अचानक यहां कई तरह के बदलाव दिखाई देने लगे, अस्पताल, कई तरह के ट्रेनिंग सेंटर, नर्सरी, स्वरोजगार के साधन आदि बंद कर दिये गये. जब इसके भीतर पेड़ों की कटाई होने लगी तो ग्रामीणों ने इसकी सूचना प्रभात खबर प्रतिनिधि को दी. 5-7 मई को जब इससे संबंधित खबर प्रभात खबर में छपी तब अचानक सबकुछ बंद हो गया. गेट के बाहर दीवार पर लिखवा दिया गया कि जमीन बिक्री की नहीं है. संस्था से जुड़े हुए लोग भी सामने आये और इसे बचाने की प्रतिबद्धता जतायी. लोगों को लगा कि अब यह संस्था बच जायेगी और फिर से रौनक बढ़ेगा, लेकिन सात महीने की खामोशी के बाद एक बार फिर बहुत सधे हुए अंदाज में जमीन बेचने का प्रयास शुरू किया गया है.

जमीन के एवज में लोन लेने की चर्चा

जागृति विहार की जमीन के एवज में संस्था से ही जुड़े कुछ लोग बैंक से तीन करोड़ रुपए लोन लिया है. लोन की राशि किसी व्यक्ति के व्यक्तिगत अकाउंट में भुगतान हुआ है. इस मामले को लेकर संस्था के भीतर काफी विवाद होने की भी चर्चा सुनी जा रही है.

हमलोग संस्था को चलाना चाहते हैं

जागृति बिहार के सचिव राजेश प्रशांत ने कहा कि शुरुआत में कुछ जमीन बेच कर जर्जर बिल्डिंग की मरम्मत कराने का निर्णय लिया गया था, लेकिन प्रभात खबर में छपी खबर के बाद हमलोगों ने संस्था को चलाने का निर्णय लिया है, वहीं शुरुआत से ही संस्था से जुड़े रहे सुशील तिवारी ने कहा कि हमलोग किसी भी स्थिति में जमीन बिकने नहीं देंगे, जरूरत पड़ी तो इसके लिए कुछ भी किया जायेगा.

खरीदारों को जमीन दिखाने के लिए ला रहे हैं जमीन दलाल

संस्था के लोगों ने पहले भी जमीन बेचने का किया था प्रयास

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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