रांची के अंतर्राष्ट्रीय शोध सम्मेलन में डॉ तपन कुमार शांडिल्य बोले- भारत प्राचीन सभ्यताओं का उद्गम स्थल

Updated at : 29 Mar 2025 11:41 AM (IST)
विज्ञापन
अंतर्राष्ट्रीय शोध सम्मेलन में शामिल अतिथिगण

अंतर्राष्ट्रीय शोध सम्मेलन में शामिल अतिथिगण

International Research Conference 2025: रांची के डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय शोध सम्मेलन 2025 का आयोजन किया गया. इस मौके पर कुलपति डॉ तपन कुमार शांडिल्य ने कहा कि भारत प्राचीन सभ्यताओं का उदगम स्थल रहा है.

विज्ञापन

रांची : अंतर्राष्ट्रीय शोध सम्मेलन और अवॉर्ड्स, 2025 का आयोजन 28 मार्च को डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची और ग्लोबल लीडर फाउंडेशन के संयुक्त तत्वाधान में किया गया. ये कार्यक्रम डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची में हुआ. सम्मेलन के मुख्य एचईसी के अतिथि पूर्व सीएमओ, डॉ आरके रॉय थे. जबकि विशिष्ट अतिथि इक्फाई विश्वविद्यालय मिजोरम के कुलपति डॉ विजय सिंह थे. कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची के कुलपति डॉ तपन कुमार शांडिल्य ने कहा कि भारत अतीत से ज्ञान की भूमि होने के साथ साथ प्राचीन सभ्यताओं का भी उद्गम स्थल रहा है.

1500 ईसा पूर्व के आसपास वेदों की रचना की गई : डॉ तपन कुमार शांडिल्य

डॉ तपन कुमार शांडिल्य ने कहा कि भारत जैसे महान देश की एक विशिष्ट उपलब्धि यह रही कि प्राचीन सभ्यताओं और दार्शनिक प्रणाली से लेकर आधुनिक काल तक अग्रणी वैज्ञानिक खोजों की यह एक जीवंत परंपरा का पोषक रही है. उन्होंने अपने आगे के संबोधन में भारतीय ज्ञान प्रणाली का विस्तार से उल्लेख करते हुए बताया वैदिक काल में लगभग 1500 ईसा पूर्व के आसपास वेदों की रचना की गई. इन वेदों में ऋग्वेद, अथर्व वेद, यजुर्वेद और सामवेद आज भी भारतीय सभ्यता और संस्कृति में देवों की स्तुति, चिकित्सा, जादू और संगीत की विरासत से हमें परिचित और ज्ञान प्रणाली को समझने का सशक्त माध्यम बनी हुई है.

Also Read: Heat Wave In Jharkhand: झारखंड में गोड्डा में हीट वेव का कहर, झुलसाने लगीं गर्म हवाएं, पारा पहुंचा 40.6 डिग्री

डॉ तपन कुमार शांडिल्य ने नालंदा और तक्षशिला विवि की भी चर्चा की

डॉ तपन कुमार शांडिल्य ने इस संदर्भ में बिहार के नालंदा और तक्षशिला विश्वविद्यालय की भी चर्चा की. उन्होंने इस सम्मेलन को अत्यंत सफल बताया. इस दौरान लगभग 100 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए और छह प्रतिभागियों को उत्कृष्टता पुरस्कार प्रदान किया गया. इस सम्मेलन में विभिन्न प्रतिभागियों के अतिरिक्त डॉ आईं एन साहू, राहुल देव आदि मौजूद रहे. यह जानकारी पीआरओ डॉ राजेश कुमार सिंह ने दी. इससे पहले कार्यक्रम का स्वागत भाषण ग्लोबल लीडर्स फाउंडेशन के रमेश त्रिपाठी ने दिया. जबकि डॉ विजय सिंह ने इस सम्मेलन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला.

Also Read: झारखंड के निजी स्कूलों की मान्यता के लिए तय जमीन की शर्त में हो सकता है बदलाव, रामदास सोरेन ने दिया निर्देश

विज्ञापन
Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola