डर के आगे जीत है, जनसंपर्क से बनती है पहचान: प्रह्लाद कक्कड़

Author Praveen
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डर के आगे जीत है, जनसंपर्क से बनती है पहचान: प्रह्लाद कक्कड़

हमें कभी हार नहीं माननी चाहिए, डर के आगे ही जीत है.

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रांची. हमें कभी हार नहीं माननी चाहिए, डर के आगे ही जीत है. किसी भी संस्था या कंपनी की पहचान केवल उसके काम से नहीं, बल्कि उसके जनसंपर्क से बनती है. पीआर वह सेतु है जो जनता और संगठन के बीच विश्वास का पुल तैयार करता है. उक्त बातें फिल्म निर्माता, पत्रकार और विज्ञापन गुरु प्रह्लाद कक्कड़ ने कही. वे बुधवार को सीसीएल की ओर से गंगोत्री कन्वेंशन सेंटर में आयोजित दो दिवसीय नेशनल पीआर कॉनक्लेव 2025 को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी में अपार शक्ति है. उनके विचार, सुझाव और दृष्टि किसी भी संगठन को नयी दिशा दे सकते हैं. किसी भी कंपनी के लिए यह जरूरी है कि वह युवाओं की बात सुने, समझे और उन्हें निर्णय प्रक्रिया में शामिल करे. जो संगठन युवाओं को नजरअंदाज करते हैं, वे भविष्य की संभावनाएं खो देते हैं. इसके पूर्व उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि सीआइएल के निदेशक (एचआर) विनय रंजन ने कहा कि यह कॉन्क्लेव कोल इंडिया के लिए गर्व की बात है. उन्होंने नकारात्मक खबरों का मुकाबला सकारात्मक खबरों से करने की रणनीति पर काम करने का सुझाव दिया. इस्टर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड के सीएमडी सतीश झा ने कहा कि पीआर और विज्ञापन दो अलग चीजें हैं. सिर्फ रिश्ता बनाना ही नहीं, बल्कि विश्वास स्थापित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है. ईमानदारी, रणनीति और सहानुभूति के साथ कंपनी का अच्छा प्रभाव बनाया जा सकता है. आज पीआर केवल इमेज मैनेजमेंट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रिश्ता बनाने और उद्देश्यपूर्ण संवाद का सशक्त माध्यम बन चुका है. सीसीएल के सीएमडी निलेंदु कुमार सिंह ने कहा कि हमारी सफलता साझेदारी और संवाद पर आधारित है. खासकर एआइ की दुनिया में सूचनाओं का आदान–प्रदान और भी महत्वपूर्ण हो गया है. जब हम बोलें और सामने वाला आसानी से समझ जाये, यही सशक्त और प्रभावी संचार है. इस अवसर पर इंडियन हेबिटेट सेंटर के निदेशक केजी सुरेश ने तेज और जिम्मेदार प्रतिक्रिया को आधुनिक पीआर की जरूरत बताया. उन्होंने कहा कि रचनात्मक और भावपूर्ण कहानियां स्वयं ही प्रभावी संचार में सक्षम होती हैं. वहीं आइआइएमसी की विभागाध्यक्ष (एमबीएस) प्रो डॉ सुरभि दहिया ने कहा कि टारगेट ऑडियंस को समझना और इंडस्ट्री सोर्सेज का बेहतर उपयोग पीआर प्रोफेशनल की कुंजी है. केंद्रीय विश्वविद्यालय, झारखंड के मास कम्युनिकेशन विभागाध्यक्ष देव व्रत सिंह ने छात्रों के लिए जनसंपर्क और संचार क्षेत्र में अवसरों की विशेषता पर जोर दिया. सीसी व पीआर विभाग के विभागाध्यक्ष आलोक कुमार गुप्ता ने कहा कि सीसीएल द्वारा आयोजित यह कॉन्क्लेव न केवल विचारों का संगम बना, बल्कि जनसंपर्क के क्षेत्र में नयी दृष्टि और दिशा प्रदान करने वाला मील का पत्थर साबित होगा. कार्यक्रम में पद्मश्री वरिष्ठ पत्रकार बलबीर दत्त, सीसीएल के निदेशक (वित्त) पवन मिश्रा, निदेशक (तकनीकी) शंकर नागाचारी, हर्षनाथ मिश्रा, पंकज कुमार, केजी सुरेश, डॉ. सुरभि दहिया आदि ने अपनी बातें रखीं. इस अवसर पर रांची के विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के शिक्षक व विद्यार्थी मौजूद थे.

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