रांची में दो दिवसीय राज्यस्तरीय अधिवेशन, IAS चंद्रशेखर ने कहा, BAMCEF पर टिका है देश का भविष्य

Updated at : 04 Sep 2022 2:03 PM (IST)
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रांची में दो दिवसीय राज्यस्तरीय अधिवेशन, IAS चंद्रशेखर ने कहा, BAMCEF पर टिका है देश का भविष्य

रांची स्थित कार्निवाल बैंक्वेट हाॅल में BAMCEF का दो दिवसीय 21वां झारखंड राज्यस्तरीय अधिवेशन शुरू हुआ. इस दौरान आइएएस चंद्रशेखर प्रसाद ने कहा कि वर्तमान समय देश के विकराल स्थिति को यदि कोई संगठन संभाल सकता है, तो वह बामसेफ है.

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Ranchi news: दी ऑल इंडिया बैकवर्ड एंड माइनॉरिटी कम्युनिटीज इंप्लाइज फेडरेशन (BAMCEF) का दो दिवसीय 21वां झारखंड राज्यस्तरीय अधिवेशन शनिवार को रांची स्थित कार्निवाल बैंक्वेट हाॅल में शुरू हुआ. अधिवेशन में झारखंड के सभी जिलों से करीब 900 प्रतिनिधि शामिल हुए. वही, आइएएस चंद्रशेखर प्रसाद ने कहा कि वर्तमान समय देश के विकराल स्थिति को यदि कोई संगठन संभाल सकता है, तो वह बामसेफ है.

देश का भविष्य बामसेफ पर टिका

उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि आइएएस चंद्रशेखर प्रसाद (विशेष सचिव खाद्य आपूर्ति विभाग) ने कहा कि वर्तमान समय देश के विकराल स्थिति को यदि कोई संगठन संभाल सकता है, तो वह है बामसेफ. देश का भविष्य बामसेफ पर टिका हुआ है. इसके लिए एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक को एकजुट रहने की जरूरत है. ज्ञान की खोज को और तेज करने की जरूरत है. डॉ. पिंटू कुमार (मगध विवि) ने निजीकरण और ठेकेदारी सिस्टम से उत्पन्न हो रहे दुष्प्रभाव से प्रतिनिधियों को अवगत कराया और मूल निवासी समाज को इससे कितना खतरा है और इसका क्या समाधान हो सकता है, इसके विषय में विस्तार से जानकारी दी.

बामसेफ के व्यवस्था परिवर्तन की पहल

उद्घाटन सत्र और प्रबोधन सत्र की अध्यक्षता कर रहे आरएल ध्रुव ने बामसेफ के व्यवस्था परिवर्तन की पहल और इसके लिए मूलनिवासी समाज का योगदान के बारे में प्रेरित किया. उन्होंने कहा कि बाबा साहेब आंबेडकर और बिरसा मुंडा जैसे महापुरुषों के सपनों को पूरा करने का जिम्मेदारी बामसेफ पर है और इसके लिए हमें दोगुने मेहनत और सहयोग की आवश्यकता है. राजेश गुप्ता ने कहा कि जाति आधारित जनगणना न कराना अपने आप को उच्च समझने वाले षड्यंत्रकारी लोगों की चाल है. संचालन कमलेश्वर मांझी, हियायतुल्ला अंसारी, झमन महतो और जय कुमार सिंह ने किया.

पद्मश्री मधु मंसूरी ने बांधा समां

पद्मश्री मधु मंसूरी हंसमुख ने झारखंड आंदोलन के समय रचे गये अपने क्रांतिकारी गीतों को सुना कर लोगों को रोमांचित किया. वहीं मुकुंद नायक ने कुंजवन नृत्य मंडली के गीत और नृत्य से समा बांधा. सिमडेगा से आये कलाकार लाल धन नायक ने झूमर वीर रस के गीत व नृत्य पेश किये.

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