स्टैंडिंग कमेटी की अनुशंसा से सहमत नहीं TAC, झारखंड में निकाय चुनाव से पहले लिये ये फैसले

Updated at : 23 Nov 2022 8:20 PM (IST)
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स्टैंडिंग कमेटी की अनुशंसा से सहमत नहीं TAC, झारखंड में निकाय चुनाव से पहले लिये ये फैसले

Jharkhand News: चर्चा करने के बाद सरकार ने उस प्रावधान को बरकरार रखने की अनुशंसा भारत सरकार को भेजने का फैसला किया. साथ ही कहा कि जनजातीय हितों की रक्षा के प्रतिकूल कोई निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए.

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नगर पालिका (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) विधेयक, 2021 (The Municipalities (Extension to the Scheduled Areas) Bill, 2021) की प्रवर समिति (Standing Committee) ने ‘नगर निकाय की समिति, जिसमें जनजातीय समुदायों का प्रतिनिधित्व हो, की अनुशंसा नगर निकाय को बाध्यकारी होगी (Recommedations of this Committee shall be ordinarily be binding on the Municipality)’ को विलोपित करने की अनुशंसा की थी. इस पर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली झारखंड जनजातीय परामर्शदातृ परिषद (टीएसी) की बैठक में बुधवार को विस्तार से चर्चा की गयी.

टीएसी की बैठक में लिये गये 9 निर्णय

चर्चा करने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता वाली टीएसी ने उस प्रावधान को बरकरार रखने की अनुशंसा भारत सरकार को भेजने का फैसला किया. साथ ही कहा कि जनजातीय हितों की रक्षा के प्रतिकूल कोई निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए. टीएसी की बैठक में सरकार ने आज 9 निर्णय लिये. इसके अन्य निर्णय इस प्रकार हैं:

  1. पर्यावरण और जनजातीय संस्कृति का संरक्षण करते हुए राज्य में परिवेशीय अनुकूलन पर आधारित पर्यटन अर्थात् Eco-Tourism को बढ़ावा दिया जायेगा.

  2. लघु वन उत्पाद की खरीद-बिक्री के लिए सिदो-कान्हू कृषि एवं वनोपज राज्य सहकारी संघ लिमिटेड कार्यरत है. इसी के अंतर्गत व्यापक रूप से लघु वन उत्पाद की खरीद-बिक्री कर वन क्षेत्र में रहने वाले लोगों की अधिक से अधिक आय वृद्धि हो, इसके लिए पहल किये जाने का निर्णय लिया गया.

  3. वनाधिकार अधिनियम-2006 के अंतर्गत अधिक से अधिक सामुदायिक पट्टा दिये जाने और उसमें अधिक से अधिक वन भूमि का उपयोग वन विभाग के नियमों एवं पर्यावरण के अनुकूल किये जाने पर जोर दिया गया.

  4. जनजातीय भाषा में कक्षा 1 से 5 तक के लिए अध्ययन और जनजातीय भाषाओं के अधिक से अधिक उपयोग पर डॉ रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान के माध्यम से अध्ययन कराते हुए एक नीति बनायी जायेगी. जनजातीय भाषाओं में अधिक से अधिक पाठ्य पुस्तकों का अनुवाद कराते हुए उसका वितरण कराये जाने का निर्णय लिया गया.

  5. जनजातीय भाषाओं के शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया को तेज किया जाये. आवश्यकता के अनुसार पद का सृजन भी किया जाये.

  6. होड़ोपैथी आदिवासी ज्ञान परंपरा का गौरवपूर्ण हिस्सा रहा है. इसको देखते हुए इसके वैज्ञानिक विश्लेषण, अध्ययन, अनुसंधान, प्रकाशन के साथ सीएसआईआर की तरह वैज्ञानिक प्रयोगशाला बनाते हुए इसे आयुष में सम्मिलित किये जाने पर जोर दिया गया.

  7. झारखण्ड पंचायत उपबंध अनुसूचित क्षेत्रों का विस्तार नियामावली, 2022 के प्रारूप पर संबंधित विभागों एवं पक्षों से सम्यक विचारोपरांत निर्णय लिया जाये.

  8. जनजातीय समुदाय के युवाओं को पांच वर्ष से अधिक भुगतान अवधि के साथ ऋण देने के लिए अन्य राज्यों के प्रावधानों का अध्ययन कराते हुए बैकों के साथ राज्यस्तरीय बैठक कर नीति बनायी जाये.

टीएसी की बैठक में ये लोग रहे मौजूद

अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के मंत्री-सह-टीएसी के उपाध्यक्ष चम्पाई सोरेन, विधायक-सह-टीएसी सदस्य प्रो स्टीफन मरांडी, दीपक बिरुआ, दशरथ गगराई, विकास कुमार मुंडा, नमन बिक्सल कोनगाड़ी, राजेश कच्छप, सोनाराम सिंकू, शिल्पी नेहा तिर्की, मनोनीत सदस्य विश्वनाथ सिंह सरदार, जमल मुंडा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजीव अरुण एक्का, प्रधान सचिव अजय कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव विनय कुमार चौबे, सचिव के श्रीनिवासन, सचिव केके सोन, सचिव हिमानी पांडे व अन्य अधिकारी उपस्थित थे.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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