झारखंड के 112 प्रखंड में गंभीर सूखे की स्थिति, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने की हाई लेवल मीटिंग

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्पष्ट तौर पर कहा कि सुखाड़ से निपटने के लिए सभी संबंधित विभाग विस्तृत कार्य योजना तैयार करें. कृषि, पशुपालन, सिंचाई, ग्रामीण विकास, मनरेगा और पेयजल समेत अन्य क्षेत्र में योजना बनाकर किसानों एवं मजदूरों को उसका लाभ देना सुनिश्चित करें.
High Level Meeting on Drought in Jharkhand: हेमंत सोरेन की सरकार किसानों-मजदूरों को रोजगार देने की योजना पर काम कर रही है. शुक्रवार को हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में झारखंड सचिवालय में हाई लेवल मीटिंग हुई. इसमें मुख्यमंत्री ने सूखे की स्थिति का आकलन किया और अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिये. मुख्यमंत्री ने सभी जिलों और प्रखंडों में बारिश और धान समेत अन्य फसलों की बुवाई के हालात की विस्तृत जानकारी अधिकारियों से ली.
झारखंड के मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि किसानों, पशुपालकों, मजदूरों को सूखे से राहत देने के लिए अति शीघ्र विस्तृत योजना तैयार करें. मुख्यमंत्री ने कहा कि सूखे की स्थिति से निपटने के लिए सरकार सभी जरूरी कदम उठा रही है. उन्होंने कहा कि सूखे से निपटने के लिए सभी संबंधित विभाग कार्य योजना बनाएं.
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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्पष्ट तौर पर कहा कि सुखाड़ से निपटने के लिए सभी संबंधित विभाग विस्तृत कार्य योजना तैयार करें. कृषि, पशुपालन, सिंचाई, ग्रामीण विकास, मनरेगा और पेयजल समेत अन्य क्षेत्र में योजना बनाकर किसानों एवं मजदूरों को उसका लाभ देना सुनिश्चित करें.
मुख्यमंत्री ने सूखे की स्थिति को देखते हुए मिट्टी से जुड़े कच्चे कार्य शुरू करने के निर्देश अधिकारियों को दिये हैं. उन्होंने ग्रामीण इलाकों में कच्ची सड़क का निर्माण, तालाब एवं डोभा निर्माण, खेतों में मेढ़ निर्माण आदि शुरू करने को कहा, ताकि किसानों और मजदूरों को इनसे जोड़कर राहत दी जा सके.
हाई लेवल मीटिंग में हेमंत सोरेन ने अधिकारियों से कहा कि संताल एवं पलामू प्रमंडल के कई इलाकों में कम बारिश की वजह से कृषि कार्य के साथ पेयजल एवं पशुओं के लिए भी जल संकट की स्थिति पैदा हो गयी है. ऐसे में वरीय अधिकारी इन इलाकों का दौरा करके वहां की जमीनी हकीकत की जानकारी लें और उससे निपटने के लिए रिपोर्ट बनाकर सरकार को दें, ताकि जल्द से जल्द प्रभावी कदम उठाया जा सके.
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मुख्यमंत्री ने कहा कि सूखे की वजह से राज्य से किसानों और मजदूरों का पलायन नहीं हो, इस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि किसानों, मजदूरों और अन्य प्रभावित लोगों को किस तरह रोजगार से जोड़ सकते हैं, उन्हें मजदूरी देने की क्या व्यवस्था हो सकती है, सूखे से निपटने के लिए और क्या-क्या विकल्प अपनाये जा सकते हैं और इससे संबंधित किन योजनाओं को लागू किया जा सकता है, इसकी पूरी रिपोर्ट तैयार करें. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से यह भी कहा कि वे सूखा प्रभावित राज्यों द्वारा सुखाड़ से निपटने के लिए क्या-क्या तैयारियां की जा रही हैं, इसकी पूरी जानकारी लें.
मुख्यमंत्री को अधिकारियों ने बताया कि 15 अगस्त तक राज्य में जो बारिश की स्थिति है, उसके मुताबिक 131 प्रखंड मध्यम और 112 प्रखंड गंभीर सूखे की स्थिति में हैं. वहीं, पूरे प्रदेश में अब तक मात्र 37.19 प्रतिशत फसलों की बुआई हो पायी है. इसमें धान की रोपनी 30 प्रतिशत, मक्का की 63.81, दलहन की 44.95, तिलहन की 40.67 प्रतिशत और मोटे अनाज की 28.87 प्रतिशत रोपनी हो सकी है.
उच्चस्तरीय बैठक में स्वास्थ्य एवं आपदा प्रबंधन मंत्री बन्ना गुप्ता, कृषि मंत्री बादल पत्रलेख, मुख्य सचिव सुखदेव सिंह, अपर मुख्य सचिव अरुण कुमार सिंह, प्रधान सचिव हिमानी पांडेय, मुख्यमंत्री के सचिव विनय कुमार चौबे, सचिव मनीष रंजन, सचिव अबु बकर सिद्दीकी, सचिव केएन झा, सचिव अमिताभ कौशल, सचिव प्रशांत कुमार और कृषि निदेशक निशा उरांव मौजूद थीं.
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