झारखंड : Gold Medalist सीता गरीबी के कारण नहीं ले रही रेसिंग साइकिल, जर्जर साइकिल लेकर पहुंची प्रतियोगिता में भाग लेने

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सीता का सपना अंतरराष्ट्रीय स्तर की साइकिलिस्ट बनने का है, लेकिन घर की बदहाल स्थिति उसके राह में बाधक बनी हुई है. सीता के माता-पिता दिहाड़ी मजदूर हैं.

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रांची : मेगा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में शनिवार से खेलो इंडिया वीमेंस साइकिलिंग लीग शुरू हुई. लीग में राज्य के विभिन्न जिलों की साइकिलिस्ट हिस्सा लेने पहुंचीं, लेकिन लोहरदगा की सीता कुमारी गरीबी के कारण साधारण साइकिल से लीग में शामिल होने पहुंची. स्टेट प्रतियोगिताओं में कई गोल्ड मेडल जीत चुकी सीता के पास रेसिंग साइकिल खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं. राष्ट्रीय स्तर की यह खिलाड़ी जब एक सामान्य और जर्जर साइकिल लेकर ट्रैक पर आयीं, तो उसे देख कर हर कोई हैरान था, लेकिन साइकिलिंग को लेकर इस खिलाड़ी का जुनून ऐसा था कि उसने इसी सामान्य साइकिल से ट्रैक के आठ चक्कर लगाये.

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सीता की बदहाल स्थिति बन रही बाधक

सीता का सपना अंतरराष्ट्रीय स्तर की साइकिलिस्ट बनने का है, लेकिन घर की बदहाल स्थिति उसके राह में बाधक बनी हुई है. सीता के माता-पिता दिहाड़ी मजदूर हैं. दोनों सुबह-शाम काम करते हैं, तो परिवार का पेट भरता है. किसी प्रकार एक-एक पाई जुगाड़ कर वह सीता का भरण पोषण कर रहे हैं. बेटी के लिए रेसिंग साइकिल खरीदना उनके वश की बात नहीं. वहीं, दूसरी ओर अब सामान्य साइकिल को इस वर्ष से साइकिलिंग के सभी इवेंट्स से हटा दिया गया है. इस कारण बिना रेसिंग साइकिल के वह प्रतियोगिता में भाग नहीं ले पायेगी.

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