रांची के गेतलसूद डैम में फ्लोटिंग पावर प्लांट बनाने की दिशा में न ही काम शुरू हो सका न ही टेंडर हुआ जारी

Updated at : 11 Mar 2023 12:38 PM (IST)
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रांची के गेतलसूद डैम में फ्लोटिंग पावर प्लांट बनाने की दिशा में न ही काम शुरू हो सका न ही टेंडर हुआ जारी

राज्य सरकार की सौर ऊर्जा नीति के अनुसार अगले पांच वर्षों में झारखंड के तीन दर्जन से ज्यादा डैम और जलाशयों के ऊपर फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट लगाना है, इसके तहत दो हजार मेगावाट के बीच बिजली उत्पादन करने का लक्ष्य है.

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रांची के गेतलसूद डैम में बनने वाले 100 मेगावाट के फ्लोटिंग पावर प्लांट पर अब तक काम शुरू नहीं हो सका है. इसके लिए टेंडर तक जारी नहीं हो सका है. केवल प्रक्रिया चल रही है. दूसरी ओर राज्य सरकार ने तीन दर्जन से अधिक डैम और जलाशयों में फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट लगाने का फैसला किया है.

डैम और जलाशयों में सोलर प्लांट लगाना है :

राज्य सरकार की सौर ऊर्जा नीति के अनुसार अगले पांच वर्षों में झारखंड के तीन दर्जन से ज्यादा डैम और जलाशयों के ऊपर फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट लगाना है. जिससे लगभग एक से दो हजार मेगावाट के बीच बिजली उत्पादन करने का लक्ष्य है.

इधर, जेरेडा द्वारा राज्य का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट चांडिल डैम में बनाया जाना है. यहां 600 मेगावाट का प्लांट बनना है. तेनुघाट डैम में भी 400 मेगावाट का फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट बनना है. इन दोनों प्लांट का निर्माण पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत होगा. जेरेडा द्वारा जल्द ही इसकी प्रक्रिया शुरू की जायेगी. बोकारो और गुमला में ऊपरी शंख डैम में भी फ्लोटिंग पावर प्लांट लगाये जाने से संबंधित प्लान का ड्राफ्ट ऊर्जा विभाग ने राज्य सरकार के पास भेजा है.

31 जलाश चिह्नित किये गये हैं :

सौर ऊर्जा नीति के तहत सभी प्लांट पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मोड पर लगाये जायेंगे.. इसके लिए निवेशकों को आकर्षित करने के लिए राज्य की सौर ऊर्जा नीति में कई रियायतों की घोषणा की गयी है. गौरतलब है कि राज्य में वर्ष 2027 तक 5200 करोड़ रुपये निवेश प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.

सरकार ने सोलर पॉलिसी में 31 ऐसे जलाशयों को चिह्नित किया है, जहां फ्लोटिंग सोलर प्लांट की संभावनाएं हैं. इसके अलावा नहरों पर भी कैनाल टॉप सोलर प्लांट लगाने की योजना है. झारखंड में 365 दिन में से लगभग 300 दिन सूरज की रोशनी तेज रहती है और इस लिहाज से यहां सोलर प्लांट की व्यापक संभावनाएं हैं.

डीवीसी 2200 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन करेगा :

डीवीसी अपने कमांड एरिया में 2200 मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा प्लांट लगायेगा. ये कमांड एरिया के अलग-अलग इलाकों में लगाया जायेगा. इसका डीपीआर भी तैयार कर लिया गया है. डीवीसी के सूत्रों ने बताया कि दो हजार मेगावाट का प्लोटिंग सोलर प्लांट लगाया जायेगा. जिसमें मैथन, तिलैया और पंचेत डैम में 600-600 मेगावाट की क्षमता का फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट लगाया जायेगा. वहीं कोनार डैम में 200 मेगवाट क्षमता का प्लांट लगेगा. इन दो हजार मेगावाट के फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट का डीपीआर तैयार कर केंद्र सरकार भेज दिया गया है. वहीं 200 मेगावाट का सोलर प्लांट फील्ड में लगाया जायेगा. इसमें रूफ टॉप भी शामिल है.

क्या है मामला

झारखंड बिजली वितरण निगम द्वारा रांची के सिकिदरी स्थित गेतलसूद डैम में वर्ल्ड बैंक की मदद से 800 करोड़ की लागत से फ्लोटिंग पावर प्लांट लगाने का फैसला किया गया था. वर्ष 2020 में ही इसकी प्रक्रिया बढ़ी थी. इसके लिए झारखंड बिजली वितरण निगम और सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सेकी) के बीच करार भी हुआ.

यानी सेकी को ही प्लांट का निर्माण करना है. राज्य के जल संसाधन विभाग ने भी इसके लिए एनओसी दे दी है. पर आज तक टेंडर भी नहीं निकाला गया है. वितरण निगम के सूत्रों ने बताया कि अभी प्रक्रिया चल रही है. एक से दो माह में सेकी द्वारा टेंडर निकाला जायेगा.

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