Ranchi News : 10 जून तक एफिडेविट दाखिल करें, अन्यथा सचिवों को अवमानना का नोटिस जारी करेंगे

मामला महाधिवक्ता कार्यालय से हटाये गये कर्मियों की सेवा नियमितीकरण करने का
वरीय संवाददाता, रांची. झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने महाधिवक्ता कार्यालय (एजी ऑफिस) से हटाये गये कर्मियों की सेवा नियमितीकरण करने के मामले में दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई की. इस दाैरान अदालत ने प्रार्थी व राज्य सरकार का पक्ष सुना. सुनवाई के दाैरान कार्मिक विभाग के सचिव व विधि सचिव सशरीर उपस्थित हुए. उनकी ओर से बताया गया कि जल्द ही एकल पीठ के आदेश का अनुपालन कर लिया जायेगा. इस पर अदालत ने 10 जून तक प्रतिवादियों को अनुपालन हलफनामा दाखिल करने के लिए समय प्रदान किया. जस्टिस शंकर ने कहा कि हलफनामा दायर नहीं किया गया, तो कार्मिक, प्रशासनिक सुधार व राजभाषा विभाग के सचिव व विधि विभाग के प्रधान सचिव को झारखंड हाइकोर्ट नियम 2001 के नियम 393 के तहत प्रपत्र-एक में अवमानना का नोटिस जारी करेंगे. प्रार्थियों की सेवा नियमितीकरण के आदेश का पालन नहीं हुआ, तो अगली सुनवाई के दाैरान भी कार्मिक विभाग के सचिव व विधि के प्रधान सचिव को फिर सशरीर हाजिर होना होगा. मामले की अगली सुनवाई के लिए अदालत ने 13 जून की तिथि निर्धारित की. इससे पूर्व प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता साैरभ अरुण ने अदालत को बताया कि एकल पीठ के आदेश का अनुपालन नहीं किया गया है. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी सुनील कुमार व अन्य की ओर से अवमानना याचिका दायर कर एकल पीठ के आदेश का अनुपालन कराने की मांग की गयी है. एकल पीठ ने प्रार्थियों की सेवा नियमितीकरण करने का आदेश दिया है. प्रार्थी महाधिवक्ता कार्यालय में वर्ष 2004 में क्लर्क के पद पर नियुक्त हुए थे. बाद में उन्हें यह कहते हुए हटा दिया गया कि तत्कालीन महाधिवक्ता को नियुक्ति का अधिकार नहीं था.
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