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खतरे में मैक्लुस्कीगंज का वॉच टॉवर का अस्तित्व

Updated at : 07 Jun 2024 8:53 PM (IST)
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खतरे में मैक्लुस्कीगंज का वॉच टॉवर का अस्तित्व

संरक्षण व देखरेख के अभाव में वॉच टॉवर गिर भी सकता है. वन विभाग भी उदासीन है.

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रोहित कुमार, मैक्लुस्कीगंज : पर्यटन गांव मैक्लुस्कीगंज के हेसालौंग पहाड़ी पर बना वॉच टॉवर का अस्तित्व खतरे में है. संरक्षण व देखरेख के अभाव में वॉच टॉवर गिर भी सकता है. वन विभाग भी उदासीन है. पहाड़ी की तराई से मिट्टी व मोरम की कटाई जोरों पर है. धंधे से जुड़े लोग ऑर्डर के हिसाब से मिट्टी व मोरम की कटाई कर जरूरतमंदों को सप्लाई कर रहे हैं. इस काम को ऑर्गेनाइज्ड तरीके से किया जाता है. बहरहाल वॉच टॉवर तक पहुंचने का रास्ता भी अवरुद्ध किया जा रहा है. कभी वॉच टॉवर तक सुगम मार्ग हुआ करता था. पूरी पहाड़ी के ऊपर तक कार जाया करती थी. जानकार बताते हैं कि 80 के दशक में मैक्लुस्कीगंज के बीचोंबीच वन विभाग के तत्कालीन रेंजर एके दास ने कुछ स्थानीय ग्रामीणों की पहल पर हेसालौंग पहाड़ी पर वॉच टॉवर का निर्माण कराया था. जहां से विभाग के लोग मैक्लुस्कीगंज व आसपास के जंगलों व पशु-पक्षियों की निगरानी किया करते थे. वॉच टॉवर परिसर में स्थानीय ग्रामीण व एंग्लो समुदाय के लोग पिकनिक, क्रिसमस पार्टी आदि कार्यक्रम आयोजित करते थे. पहाड़ी की तराई में हेसालौंग, कोनका व लपरा गांव हैं. बाद में वर्ष 2014-15 के आसपास तत्कालीन रेंजर विश्वनाथ प्रसाद ने मोडिफिकेशन कर टॉवर को कंक्रीट का बनवाया. लेकिन वर्तमान समय में वॉच टॉवर का सुध लेनेवाला कोई नहीं है. सूर्योदय व सूर्यास्त का दिखता है अदभुद नजारा : वॉच टॉवर से मैक्लुस्कीगंज व आसपास के खलारी, नावाडीह, हेसालौंग, लपरा, मायापुर, जोभिया, चट्टी नदी, विकास नगर सहित अन्य गांव का दृश्य देखते ही बनता है. आज भी पर्यटकों को वॉच टॉवर से सूर्योदय व सूर्यास्त का अदभुद नजारा दिखता है. सिर्फ मिला विकास का आश्वासन : पिछले वर्ष पर्यटन सचिव सुखदेव सिंह ने वॉच टॉवर का निरीक्षण कर इसे विकसित करने का आश्वासन दिया थे. उन्होंने पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने योग्य प्वाइंट व जगहों का निरीक्षण कर योजनाओं का प्रारूप तैयार किया था. साथ पूर्व शिक्षा मंत्री बंधु तिर्की ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए क्षेत्र को सुविधा संपन्न बनाने में सहयोग करने की बात कही थी, लेकिन सिर्फ बातें ही रह गयी. अंतरराष्ट्रीय वॉलीबॉल कोच सह खेल प्रेमी शेखर बोस ने सचिव से टॉवर तक पर्यटकों के लिए पहुंच पथ, शेड, लाइट, प्याऊ आदि की व्यवस्था कर विकास करने की मांग की थी. जिस पर पर्यटन सचिव ने सहमति जतायी थी. वन विभाग हो या पर्यटन विभाग, राज्य सरकार से मैक्लुस्कीगंज व आसपास के प्रबुद्धजनों ने वॉच टॉवर को संरक्षित कर विकसित करने की मांग की है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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