Ranchi news : रातू के आनंदमयी नगर में अधिवक्ता के घर इडी का छापा

Updated at : 09 Oct 2024 12:29 AM (IST)
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घर का ताला तोड़ कमरे में घुसे अधिकारी, अधिवक्ता दंपती मिले गायब

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रातू. रातू थाना क्षेत्र के आनंदमयी नगर निवासी अधिवक्ता सुजीत कुमार सिंह के घर पर मंगलवार की शाम चार बजे इडी की टीम ने छापेमारी की. हालांकि जिस समय इडी की टीम जांच के लिए पहुंची थी, उस समय के घर के मुख्य गेट में ताला बंद था. घर पर कोई नहीं था. लगभग पांच बजे इडी के अधिकारियों ने जांच की सूचना रातू पुलिस को दी और गेट में लगे ताला को तोड़कर घर के अंदर प्रवेश किया. इडी की टीम देर रात तक सुजीत सिंह के घर में रखे दस्तावेज को खंगालने में जुटी थी. जानकारी के अनुसार सुजीत सिंह पर रांची जिला के कई सीओ और जमीन कारोबार से जुड़े लोगों से करोड़ों रुपये की वसूली करने का आरोप है. इडी को मैनेज करने के नाम पर करीब सात करोड़ रुपये की वसूली हुई है. आठ महीने से रातू में रह रहे हैं सुजीत : जानकारी के अनुसार सुजीत कुमार सिंह और उसकी पत्नी रिंकू सिंह पिछले आठ महीने से रातू के आनंदमयी नगर में रह रहे हैं. वर्ष 2023 में ही उन्होंने मोटी रकम देकर एक पुराने मकान को खरीदा था. बाद में उसे तोड़कर करोड़ों रुपये खर्च कर आलीशान मकान बनवाया. जिस आनंदमयी नगर में उन्हाेंने अपना मकान बनाया है, वह वहां के गिने-चुने घरों में से एक है. इसी वर्ष फरवरी माह में उन्होंने अपने घर में शिफ्ट किया है. स्थानीय लोगों के अनुसार गृह प्रवेश में रांची समेत बिहार के भी कई संभ्रांत और रसूखदार परिवार के लोग शामिल हुए थे. सुजीत और उसकी पत्नी रिंकू सिंह खुद को झारखंड हाइकोर्ट का अधिवक्ता बताकर यहां रह रहे थे. वो नियमित रूप से रोजाना अधिवक्ता के ड्रेस में हाइकोर्ट के लिए घर से निकला करते थे. उन्होंने पंडरा के पंचशीलनगर में एक कार्यालय भी खोल रखा है. जानकारी के अनुसार इडी को मैनेज करने के आरोप में सुजीत के खिलाफ पंडरा थाना में शिकायत दर्ज हुई है. वहीं, दूसरी ओर यह भी सूचना है कि अधिवक्ता की ओर से भी शिकायत दर्ज की गयी है. पंडरा पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है.

धनबाद डीटीओ के आवास पर 14 घंटे छापामारी

धनबाद/रांची. रांची के कांके में जमीन घोटाला तथा इडी के नाम पर कथित वसूली मामले में इडी की टीम ने मंगलवार को धनबाद के जिला परिवहन पदाधिकारी दिवाकर प्रसाद चंद्रिका प्रसाद द्विवेदी के यहां छापेमारी की. लगभग 14 घंटे तक टीम ने झारुडीह स्थित आवास पर सर्च ऑपरेशन चलाया. धनबाद में पहली बार किसी प्रशासनिक अधिकारी के यहां इडी की कार्रवाई हुई. मिली जानकारी के अनुसार इडी की टीम रांची नंबर की इनोवा से पहुंची. सुबह छह बजे पहले दो एवं बाद में एक इनोवा से इडी के अधिकारी देव बिहार स्थित जगदंबा अपार्टमेंट में नौवें तल्ले पर पहुंचे. टीम यहां डीटीओ के फ्लैट में गयी. इसके बाद बाहर सुरक्षा बल के जवान तैनात हो गये. पूरे ऑपरेशन के दौरान किसी को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गयी. सिर्फ इडी द्वारा जिन्हें बुलाया गया या फिर जिन्हें अंदर जाने की अनुमति मिली, वही गये. छापेमारी के दौरान अपराह्न 2.30 बजे के करीब एक निजी बैंक के तीन अधिकारी एवं कर्मी बुलाये गये. इसमें एक महिला कर्मी भी थी. शाम 7.40 बजे टीम तीन वाहनों से झारुडीह से निकल गयी. छापेमारी के दौरान देव विहार स्थित विभिन्न अपार्टमेंट में रहने वाले लोगों को परेशानी हुई. साथ ही छापेमारी को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही थी.

चार दिन के अंदर रद्द करना पड़ा था द्विवेदी के तबादले का आदेश

रांची. राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी दिवाकर प्रसाद चंद्रिका प्रसाद द्विवेदी की हमेशा हर सरकार में अच्छी पकड़ रही है. अपनी अच्छी पैठ के कारण वह लगातार अच्छे जगहों पर पदस्थापित रहे. वह चास के अंचलाधिकारी के पद पर थे. वहां से नगड़ी (रांची) के अंचलाधिकारी बने. यहां भी करीब तीन साल तक रहे. उनके प्रभाव व पहुंच का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि नगड़ी से तबादला होने के बाद मात्र चार दिनों के अंदर ही अधिसूचना रद्द कर दी गयी. करीब छह साल पहले उनका तबादला नगड़ी अंचलाधिकारी के पद से पलामू कर दिया गया था लेकिन, वह पलामू नहीं गये. इस बीच मामला सरकार तक गया और राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग ने उनका तबादला आदेश रद्द कर दिया. काफी समय तक नगड़ी में रहने के बाद उन्हें कांके का अंचलाधिकारी बनाया गया. यहां काफी समय तक रहने के बाद उनकी प्रोन्नति हुई, तो वह राज्य के महत्वपूर्ण धनबाद जिला के परिवहन पदाधिकारी बनाये गये. कांके में पदस्थापन के दौरान जमीन संबंधी कई विवादों में उनका नाम आया.

कांके में लगे प्रभात पर गंभीर आरोप, पर मिल गया नामकुम

प्रभात भूषण सिंह जब कांके में अंचलाधिकारी थे, तो उन पर गंभीर आरोप लगे. जमीन में हेराफेरी करने के साथ ही गैरमजरुआ जमीन की खरीद-बिक्री भी उनके कार्यकाल में हुई. यहां तक कि जमीन की प्रकृति में बदलाव की भी शिकायतें आयी. उन पर लगे आरोपों के बाद वह निलंबित कर दिये गये थे. निलंबन मुक्त होने के बाद गंभीर आरोप लगने के बाद भी उन्हें राजधानी के महत्वपूर्ण नामकुम अंचल का सीओ बना दिया गया.

डीसी के आग्रह के बाद भी नहीं हटे जय कुमार

राजधानी के तत्कालीन उपायुक्त राहुल सिन्हा ने कांके के वर्तमान अंचलाधिकारी जय कुमार राम को पद से हटाने का आग्रह सरकार से किया था. जय कुमार राम पर कांके में पदस्थापित रहते हुए जमीन दलालों को संरक्षण देने का आरोप लगा था. इडी ने उनके कार्यालय में छापेमारी भी की थी. कमलेश सिंह के फेवर में सर्वर में छेड़छाड़ करने का आरोप लगा था. इस मामले में वह बेल पर हैं. कांके में उनके पदस्थापन के दौरान के ही मामले की जांच चल रही है. इसके बाद भी वह कांके में ही पदस्थापित हैं.

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