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चारा घोटाला जैसा है पेयजल स्वच्छता घोटाला, अलग-अलग कोषागारों से निकाले पैसे, बोले बाबूलाल मरांडी

Updated at : 08 Apr 2025 5:46 PM (IST)
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Drinking Water and Sanitation Scam jharkhand babulal marandi bjp

बाबूलाल मरांडी.

Drinking Water and Sanitation Scam: झारखंड में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग में गबन की आशंका के बीच बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार पर हमला बोल दिया है. भाजपा नेता ने इसकी तुलना चारा घोटाला से कर दी है. बाबूलाल मरांडी ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है, ताकि दोषियों को सजा मिल सके.

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Babulal Marandi on Drinking Water and Sanitation Scam| भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने पेयजल स्वच्छता घोटाला को संयुक्त बिहार के चारा घोटाला जैसा करार दिया है. कहा है कि चारा घोटाला की तरह ही अलग-अलग जिला कोषागारों से अवैध कागजात के आधार पर निकासी की गयी है. सरकार पर निशाना साधते हुए नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि हेमंत सोरेन के पहले कार्यकाल के दौरान पेयजल एवं स्वच्छता विभाग में वर्ष 2019 से 2024 के बीच 160 करोड़ रुपए के काम में भारी वित्तीय अनियमितता हुई.

बाबूलाल मरांडी ने की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि ऑडिट रिपोर्ट से यह स्पष्ट है कि पेयजल एवं स्वच्छता विभाग में भी चारा घोटाले की तरह विभिन्न कोषागारों से अवैध रूप से निकासी की गयी. भाजपा नेता ने कहा कि झारखंड सरकार इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराये, ताकि दोषियों को सजा मिल सके. साथ ही जनता के पैसों की लूट को रोका जा सके.

वित्त विभाग की अंतर विभागीय जांच कमेटी ने जतायी गबन की आशंका

वित्त विभाग की ओर से बनी अंतर विभागीय जांच कमेटी ने पेयजल एवं स्वच्छता विभाग में पिछले 5 साल में बड़े पैमाने पर अनियमितता की बात कही है. कमेटी ने इसमें गबन की आशंका जतायी है. 7 सदस्यीय कमेटी ने कहा है कि जांच के दौरान घोटाले में इंजीनियर से लेकर कोषागार के अधिकारियों तक की मिलीभगत की बात सामने आयी है. कमेटी ने कहा है कि कार्यपालक अभियंता स्वर्णरेखा शीर्ष प्रमंडल, रांची कार्यालय के जरिये वर्ष 2019-20 से वर्ष 2023-24 के दौरान करीब 160 करोड़ रुपए का काम हुआ. इसमें गबन की आशंका है.

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कोषागारों की भी विशेष ऑडिट कराने की सिफारिश

कमेटी ने पेयजल विभाग के कई कार्यालयों और कोषागारों की भी विशेष ऑडिट कराने की सिफारिश की है. कमेटी ने कहा है कि पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता पेयजल व स्वच्छता प्रमंडल गोंदा, कार्यपालक अभियंता पेयजल व स्वच्छता प्रमंडल रांची पूर्व, कार्यपालक अभियंता पेयजल व स्वच्छता प्रमंडल नागरिक अंचल रांची और अधीक्षण अभियंता पेयजल व स्वच्छता अंचल रांची के कार्यों की भी ऑडिट करायी जानी चाहिए.

कोषागार के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से हुआ गबन

अंतर विभागीय जांच कमेटी ने कहा है कि जांच के दौरान उसने बताया कि कोषागार के अधिकारियों और कर्मचारियों की भी गबन में मिलीभगत थी. राज्य के 5 बड़े कोषागारों (रांची, धनबाद, जमशेदपुर, हजारीबाग और पलामू) यानी जिला कोषागार को जांच के दायरे में शामिल करते हुए विशेष ऑडिट कराने की अनुशंसा की है. यह भी कहा है कि कोषागार संहिता में कम्प्यूटर ऑपरेटर्स की कोई भूमिका नहीं है, इसलिए उन्हें वित्तीय कार्य (कुबेर ट्रेजरी ऐप्लिकेशन सिस्टम में लॉग-इन) से दूर रखा जाये.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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