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रांची की डॉ भारती कश्यप ने अमेरिकन नेत्र सोसाइटी के कॉन्फ्रेंस में पेश किये 2 रिसर्च पेपर

Updated at : 08 May 2025 3:57 PM (IST)
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Dr Bharati Kashyap in American Eye Society Conference

अमेरिकन आई सोसाइटी कॉन्फ्रेंस में पेपर प्रस्तुत करतीं रांची की डॉ भारती कश्यप.

Dr Bharati Kashyap in American Eye Society Conference: डॉ भारती कश्यप ने बताया की लॉस एंजिलिस में आयोजित अमेरिकन सोसाइटी ऑफ कैटरेक्ट एंड रिफ्रैक्टिव सर्जरी के वार्षिक कॉन्फ्रेंस में उन्होंने 2 रिसर्च पेपर पेश किये. उन्होंने कहा, ‘हमारे शरीर में कुछ ऐसी बीमारियां होती हैं, जैसे सूडो एक्सफोलिएशन, जिसमें मोतियाबिंद ग्लूकोमा के साथ-साथ हाई सिलेंडर पावर भी होता है. ऐसी स्थिति में मरीज को मोतियाबिंद, ग्लूकोमा की सर्जरी के साथ-साथ टोरिक लेंस का प्रत्यारोपण भी सेम सीटिंग में करना जरूरी होता है.’

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Dr Bharati Kashyap in American Eye Society Conference: झारखंड की जानी-मानी नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ भारती कश्यप ने अमेरिकन नेत्र सोसाइटी के वार्षिक कॉन्फ्रेंस में 2 रिसर्च पेपर पेश किये. कॉन्फ्रेंस में शामिल होने वाली डॉ भारती कश्यप झारखंड की एकमात्र डॉक्टर हैं. कॉन्फ्रेंस का आयोजन 25 से 28 अप्रैल 2025 तक अमेरिका के कैलिफोर्निया के लॉस एंजिलिस में हआ था. अमेरिकन सोसाइटी ऑफ कैटरेक्ट एंड रेफ्राक्टिव सर्जरी (ASCRS) के वार्षिक अधिवेशन में राष्ट्रपति के हाथों नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित हो चुकीं झारखंड की प्रसिद्ध चिकित्सक और समाजसेवी डॉ भारती ने विश्व के कई देशों से आये नेत्र विशेषज्ञों के समक्ष नेत्र चिकित्सा के जटिल विषयों पर 2 साइंटिफिक रिसर्च पेपर पेश किये.

कैटरेक्ट एंड रिफ्रैक्टिव सर्जरी के कॉन्फ्रेंस में पढ़े 2 पेपर

डॉ भारती कश्यप ने बताया की लॉस एंजिलिस में आयोजित अमेरिकन सोसाइटी ऑफ कैटरेक्ट एंड रिफ्रैक्टिव सर्जरी के वार्षिक कॉन्फ्रेंस में उन्होंने 2 रिसर्च पेपर पेश किये. उन्होंने कहा, ‘हमारे शरीर में कुछ ऐसी बीमारियां होती हैं, जैसे सूडो एक्सफोलिएशन, जिसमें मोतियाबिंद ग्लूकोमा के साथ-साथ हाई सिलेंडर पावर भी होता है. ऐसी स्थिति में मरीज को मोतियाबिंद, ग्लूकोमा की सर्जरी के साथ-साथ टोरिक लेंस का प्रत्यारोपण भी सेम सीटिंग में करना जरूरी होता है.’

टोरिस लेंस के प्रत्यारोपण से खत्म हो जाता है सिलेंडर पावर

डॉ कश्यप ने कहा कि मरीज बार-बार सर्जरी कराने से बचना चाहते हैं और टोरिक लेंस के प्रत्यारोपण से ऑपरेशन के बाद सिलेंडर पावर खत्म हो जाता है. दूर की चीजों को देखने के लिए चश्मे पर निर्भरता खत्म हो जाती है. विजन की क्वालिटी भी बहुत अच्छी होती है. उन्होंने कहा, ‘रांची में कश्यप मेमोरियल आई हॉस्पिटल में हमलोगों ने इसके लिए एक फॉर्मूला विकसित किया और उसकी ही प्रस्तुति अमेरिका की नेत्र सोसाइटी के एनुअल कॉन्फ्रेंस में दी.’

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डॉ भारती कश्यप के दूसरे रिसर्च पेपर को मिली सराहना

डॉ भारती कश्यप के दूसरे रिसर्च पेपर को दुनिया भर के डॉक्टरों ने सराहा. इस पेपर में उन्होंने दुनिया को बताया कि भारत में 40 से 50 प्रतिशत लोगों को एक डायेप्टर तक का सिलेंडर पॉवर होता है. अगर मोतियाबिंद ऑपरेशन के समय इसे नहीं हटाया गया, तो ऑपरेशन के बाद दूर की दृष्टि के लिए सिलेंडर पावर लगता है. नजर की क्वालिटी भी बहुत अच्छी नहीं रह जाती.

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सिलेंडर पवर को हटाने के 3 तरीके बताये

उन्होंने विश्व के अलग-अलग हिस्से से आये डॉक्टरों को बताया कि इस सिलेंडर पावर को हटाने के 3 तरीके हैं. लेजर से कॉर्निया पर चीरा लगाना, इमेज गाइडेड सिस्टम के सहयोग से कॉर्निया पर चीरा लगाना या टोरिक लेंस का प्रत्यारोपण करना. 6 महीने बाद किस पद्धति से रिजल्ट ज्यादा अच्छा होता है, इसे देखने की बाद फैसला करकना चाहए कि कौन सी विधि अपनायी जाये. डॉ भारती कश्यप ने कहा, ‘मुझे खुशी है कि अमेरिकन नेत्र कॉन्फ्रेंस में झारखंड राज्य का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला.’

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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