झारखंड सोना-सोबरन योजना में प्रशासनिक अड़चनें: धोती-साड़ी का टेंडर दूसरी बार अटका, 17 जुलाई तक बढ़ी डेट

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झारखंड में धोती साड़ी योजना का टेंडर अटका

झारखंड में धोती साड़ी योजना का टेंडर अटका

झारखंड की सोना-सोबरन धोती-साड़ी योजना के लिए वस्त्र आपूर्ति की ऑनलाइन निविदा प्रशासनिक अड़चनों के कारण दूसरी बार स्थगित कर दी गई है. निविदा की अंतिम तिथि अब 17 जुलाई तय की गई है.

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रांची से सतीश सिंह की रिपोर्ट

Dhoti Saree Scheme Tender, रांची : झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी सोना-सोबरन धोती-साड़ी योजना के तहत वस्त्रों की आपूर्ति के लिए जारी ऑनलाइन निविदा प्रशासनिक पेंच में फंस गयी है. खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग निविदा की तिथि दूसरी बार बढ़ा दी गयी है. विभाग ने जारी शुद्धि पत्र के अनुसार, जेम पोर्टल पर चल रही इस निविदा की अंतिम तिथि अब 17 जुलाई की शाम पांच बजे तक तय की गयी है. उसी दिन शाम 5.30 बजे से बिड खोलने की प्रक्रिया शुरू होगी. वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कुल 1.32 करोड़ पीस धोती, साड़ी और लुंगी की खरीद ई-रिवर्स ऑक्शन मोड से की जानी है. वस्त्रों की आपूर्ति को लेकर विभाग की ओर से जून माह में ही निविदा निकाली गयी थी. एक जुलाई को इसका बिड खोलना था, लेकिन प्रशासनिक अड़चन के कारण निविदा को तिथि को पहले 10 जुलाई और अब 17 जुलाई तक के लिए बढ़ा दी गयी है.

क्यों बढ़ानी पड़ी निविदा की तिथि

इस निविदा की समय-सीमा बढ़ाये जाने का मुख्य कारण प्रशासनिक स्तर पर एक महत्वपूर्ण पद का रिक्त होना है. दरअसल, झारखंड स्टेट फूड एंड सिविल सप्लाइज कॉरपोरेशन (जेएसएफसी) में स्थायी निदेशक का पद वर्तमान में खाली है. तत्कालीन निदेशक दिलीप तिर्की के तबादले के बाद से अब तक इस पद पर किसी भी स्थायी अधिकारी का पदस्थापन नहीं हो सका है. जेएसएफसी के निदेशक ही टेंडर कमेटी के पदेन अध्यक्ष होते हैं. अध्यक्ष की अनुपस्थिति के कारण तकनीकी और निर्णय संबंधी प्रक्रियाओं को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए निविदा की तिथि को सात दिनों के लिए आगे बढ़ाना पड़ा है.

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बैकलॉग खत्म करने की चुनौती

वर्तमान में जेसी विनीता केरकेट्टा को जेएसएफसी के निदेशक पद का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है, ताकि आवश्यक कार्य बाधित न हों. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देशानुसार, विभाग इस योजना के पिछले छह महीने के बैकलॉग को खत्म करने के लिए तेजी से प्रयास कर रहा है. हालांकि स्थायी निदेशक न होने से इस महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजना के क्रियान्वयन की रफ्तार पर सीधा असर पड़ा है, जिसे दुरुस्त करने के लिए ही अब समय-सीमा का विस्तार किया गया है.

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Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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