सोजे वतन की प्रतियां जला दी गयी, लेकिन प्रेमचंद की चेतना नहीं जली
Author : Prabhat Khabar News Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 01 Aug 2020 4:06 AM
निर्मला कॉलेज के हिंदी विभाग व विश्व संस्कृत हिंदी परिषद नयी दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वेबिनार शुक्रवार से शुरू हुआ.
रांची : निर्मला कॉलेज के हिंदी विभाग व विश्व संस्कृत हिंदी परिषद नयी दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वेबिनार शुक्रवार से शुरू हुआ. वर्तमान परिपेक्ष में कथा सम्राट प्रेमचंद की प्रासंगिकता विषय पर दो विषय पर वेबिनार हुआ. पहले सत्र में प्राचार्या डॉ सिस्टर ज्योति ने कहा कि वेब की दुनिया के सहारे इतनी बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी कॉलेज से जुड़े हैं.
प्रेमचंद की पठित कहानियों को याद करती हूं, तो लगता है कि साहित्य समाज का आईना है. कार्यक्रम संयोजक अध्यक्ष हिंदी विभाग निर्मला कॉलेज की डॉ रेनू सिन्हा ने कहा कि पूरी सृष्टि जब कोरोना महामारी से भयभीत है, ऐसे में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में संगोष्ठी सकारात्मक ऊर्जा प्रदान कर रही है. रांची विवि के हिंदी विभाग डॉ जेपी पांडेय ने कहा कि प्रेमचंद ने ब्रिटिश शासन की नींद उड़ा दी.
सोजे वतन की प्रतियां जला दी गयी पर प्रेमचंद की चेतना नहीं जली. गोवा की पूर्व राज्यपाल व साहित्यकार डॉ मृदुला सिन्हा ने कहा कि प्रेमचंद झोपड़ी के राजा थे. दीन-दुखी, किसान, मजदूर आदि उनकी रचनाओं के विषय थे. प्रेमचंद साहित्य काल का आईना है. उसमें यथार्थ की पकड़ एवं सत्य शिव सुंदरम का समन्वित रूप है.
पूर्व प्रोफेसर व प्रेमचंद के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ डॉ कमल किशोर गोयनका ने कहा कि समाज के लिए उपयोगी होना ही साहित्य की सार्थकता है और इस कसौटी पर प्रेमचंद का साहित्य खरा उतरता है. डॉ शैलेश शुक्ला ने कहा कि प्रेमचंद की रचनाएं चीनी, रूसी, अंग्रेजी समेत विश्व की अनेक भाषाओं में अनुदित हुई है. दोनों सत्र में डॉ हरिमोहन, डॉ वेद रमन पांडेय, डॉ पुष्पिता अवस्थी, रांची विवि हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ हीरा नंदन प्रसाद ने किया.
Post by : Pritish Sahay
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