Hemant Soren Gift: झारखंड के किसानों के 2 लाख तक के ऋण होंगे माफ, शुरू होंगी 3 नई योजनाएं

Updated at : 08 Aug 2024 5:50 PM (IST)
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झारखंड के किसानों के लिए शुरू होंगी 3 योजनाएं.

Hemant Soren Gift: झारखंड सरकार ने किसानों के हित में बड़ा फैसला किया है. उनके 2 लाख रुपए तक के कृषि ऋण माफ होंगे. 3 नई योजनाएं भी शुरू होंगी.

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Hemant Soren Gift: झारखंड की कृषि मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा है कि प्रदेश की सरकार किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए कई स्तर पर काम कर रही है. इसमें किसानों की कर्जमाफी भी शामिल है.

कृषि विभाग के 3 प्रस्तावों को हेमंत सोरेन कैबिनेट की मिली मंजूरी

दीपिका पांडेय सिंह ने गुरुवार (8 अगस्त) को कहा कि 7 अगस्त को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक हुई. बैठक में कृषि विभाग के 3 प्रस्तावों को पारित किया गया. इसमें राज्य के किसानों को राहत देने के लिए ऋण माफी योजना की राशि को 50 हजार रुपए से बढ़ाकर 2 लाख रुपए करना शामिल है.

फसल सुरक्षा योजना के लिए 30 करोड़ रुपए का प्रावधान

उन्होंने कहा कि फसला सुरक्षा योजना में 30 करोड़ और बिरसा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए 50 लाख रुपए का बजट में प्रावधान किया गया है. उन्होंने कहा कि इस पर 750 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव है.

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झारखंड कृषि ऋण माफी योजना

झारखंड कृषि ऋण माफी योजना राज्य सरकार की एक अत्यंत महत्वाकांक्षी योजना है, जो किसानों के कल्याण से जुड़ी है. वित्तीय वर्ष 2020-21 से वित्तीय वर्ष 2023-24 तक इसका संचालन किया गया है. अब तक राज्य के कुल 4,73,567 कृषकों के कुल 1900.35 करोड़ रुपए का कर्ज माफ किया गया है.

पहले 50 हजार रुपए तक होती थी कर्जमाफी

कृषि मंत्री ने कहा है कि इस योजना का लाभ राज्य के उन रैयतों, गैर रैयतों को दिया जाता है, जिन्होंने अल्प अवधि के लिए राज्य के किसी भी बैंक से ऋण लिया हो. उन्होंने बताया कि 31 मार्च 2020 तक किसानों के 50 हजार रुपए तक के ही कर्ज माफ होते थे. अब इस राशि को बढ़ाकर 2,00,000 रुपए कर दिया गया है.

किसान लंबे समय से कर रहे थे 2 लाख तक कर्जमाफी की मांग

उन्होंने कहा कि कृषकों की ओर से इस राशि को बढ़ाकर 2,00,000 रुपए करने की मांग लंबे समय से हो रही थी. कृषि मंत्रालय ने इस मांग का संज्ञान लेते हुए कृषि ऋण माफी की राशि को बढ़ाने का प्रस्ताव मंत्रिमंडल में रखा, जिसे कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दे दी गई.

बिरसा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना

बिरसा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को वित्तीय वर्ष 2024-25 से फिर से झारखंड में लागू किया जाएगा. इस योजना का लाभ राज्य के उन किसानों को मिलेगा, जिनकी फसल आकस्मिक परिस्थिति में बर्बाद हो जाती है. उन्हें सहायता राशि दी जाएगी. इस योजना के लिए 50 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है. अनुपूरक बजट में 250 करोड़ रुपए के अतिरिक्त उपबंध का प्रावधान प्रस्तावित है.

फसल सुरक्षा कार्यक्रम योजना

झारखंड सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए फसल उत्पादन एवं गुणवत्तायुक्त उत्पादकता को बढ़ावा देने के लिए फसल सुरक्षा कार्यक्रम योजना के कार्यान्वयन के लिए 30 करोड़ रुपए की राशि को मंजूरी दी है. योजना का उद्देश्य राज्य में कार्यरत पौधा संरक्षण केंद्र को मानव बल, पौधा संरक्षण रसायनों तथा उपकरणों आदि से सुसज्जित करते हुए मजबूत करने एवं फसलों में कीटों एवं बीमारियों के बारे में कृषक समुदाय को जागरूक करना है.

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Mithilesh Jha

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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