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झारखंड में विकसित हो रही ज्यादा फल-फूल देने वाली महुआ की ब्रीड, रांची की नर्सरी में तैयार हो रहे पौधे

Updated at : 28 Nov 2022 9:06 PM (IST)
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झारखंड में विकसित हो रही ज्यादा फल-फूल देने वाली महुआ की ब्रीड, रांची की नर्सरी में तैयार हो रहे पौधे

Prabhat Khabar Exclusive: झारखंड के आदिवासी इसे खाते तो हैं ही, इसके फल और फूल को बेचकर उनकी अच्छी-खासी कमाई भी हो जाती है. भारत सरकार ने आदिवासियों की आय बढ़ाने के लिए कई योजनाओं पर काम शुरू किया है. ज्यादा फल-फूल देने वाले महुआ के पेड़ का विकास भी उसी का हिस्सा है.

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Prabhat Khabar Exclusive: झारखंड में ज्यादा फल-फूल देने वाले महुआ के पेड़ तैयार किये जा रहे हैं. केंद्र सरकार की संस्था वन उत्पादकता संस्थान (FPI) इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही है. भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद के मातहत काम करने वाली वन उत्पादकता संस्थान की राजधानी रांची में कटहल मोड़ के पास विशाल नर्सरी है, जिसमें अलग-अलग तरह के पौधों की अलग-अलग किस्में विकसित की जा रही हैं.

आदिवासियों की आय बढ़ाने की केंद्र की पहल

झारखंड के आदिवासी इसे खाते तो हैं ही, इसके फल और फूल को बेचकर उनकी अच्छी-खासी कमाई भी हो जाती है. भारत सरकार ने आदिवासियों की आय बढ़ाने के लिए कई योजनाओं पर काम शुरू किया है. ज्यादा फल-फूल देने वाले महुआ के पेड़ का विकास भी उसी का हिस्सा है. वन उत्पादकता संस्थान के बीडी पंडित ने बताया कि रांची स्थित संस्थान की नर्सरी में महुआ का कलम तैयार किया जता है.

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वन उत्पादकता संस्थान में तैयार होते हैं रूट-शूट

उन्होंने बताया कि कटिंग से इसका कलम तैयार होता है. उसमें बालू, गिट्टी और गोबर को मिक्स करके डाला जाता है, जो खाद के रूप में काम करता है. कुछ ही दिनों में रूट-शूट तैयार हो जाता है. इसके बाद उससे पौधा निकलने लगता है. श्री पंडित ने बताया कि इस प्रक्रिया से जो महुआ के पेड़ तैयार होंगे, उससे किसानों को ज्यादा फूल मिलेगा, ज्यादा फल मिलेगा. इससे किसानों को आर्थिक रूप से फायदा होगा.

आदिवासी समाज की आय का जरिया है महुआ

बता दें कि महुआ आदिवासी समाज के लिए आय का जरिया तो है ही, उनके पर्व-त्योहार से लेकर शादी-ब्याह तक में इसका इस्तेमाल होता है. इसकी चर्चा स्थानीय गीतों के साथ-साथ हिंदी, भोजपुरी, मैथिली और अन्य लोकगीतों में भी होती है. महुआ आदिवासियों के खान-पान से लेकर उनके रीति-रिवाजों तक में रचा-बसा है.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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