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Ranchi News : दूर करें स्तन कैंसर का डर

4 Nov, 2025 7:44 pm
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Ranchi News : दूर करें स्तन कैंसर का डर

स्तन कैंसर महिलाओं में होने वाले सबसे आम कैंसर में से एक है. साल में एक बार मैमोग्राम कराने की बात नहीं है, बल्कि अपने शरीर को समझने, छोटे-छोटे बदलावों को पहचानने और समय पर कार्रवाई करने की है, क्योंकि जल्दी पता लगने से जान बचती है.

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अंत नहीं, यह उपचार योग्य, जागरूक बनें, सशक्त बनें

31 अक्तूबर तक सदर अस्पताल में 1323 महिलाओं की स्तन कैंसर स्क्रीनिंग

28 पायी गयी ग्रसित, झारखंड में जागरूकता और समय पर जांच से बढ़ेगी महिलाओं की सुरक्षा

लता रानी @ रांची

स्तन कैंसर महिलाओं में होने वाले सबसे आम कैंसर में से एक है. साल में एक बार मैमोग्राम कराने की बात नहीं है, बल्कि अपने शरीर को समझने, छोटे-छोटे बदलावों को पहचानने और समय पर कार्रवाई करने की है, क्योंकि जल्दी पता लगने से जान बचती है. कई महिलाएं तब तक स्तन स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं देतीं जब तक उन्हें कुछ गलत महसूस न हो. हालांकि, स्तनों में होने वाले छोटे बदलाव ही शुरुआती और इलाज योग्य बीमारियां और देर से पता चलने वाले कैंसर के बीच का अंतर पैदा कर सकते हैं. कई महिलाएं चेतावनी के संकेतों को नजरअंदाज कर देती हैं, स्क्रीनिंग में देरी करती हैं, या मान लेती हैं कि सिर्फ गांठ ही चिंता का कारण है. भारत में स्तन कैंसर अब महिलाओं में सबसे सामान्य कैंसर बन चुका है. झारखंड में महिला स्वास्थ्य सुधार की दिशा में स्तन स्वास्थ्य पर खुलकर बातचीत करना, भ्रमों को दूर करना और कैंसर स्क्रीनिंग को सामान्य बनाना एक महत्वपूर्ण पहल है.

सदर अस्पताल में नि:शुल्क स्क्रीनिंग की सुविधा

राज्य के सदर अस्पताल में महिलाओं की नि:शुल्क स्क्रीनिंग की व्यवस्था है, जहां एनसीडी ओपीडी में नियमित जांच और उपचार की सुविधा है. झारखंड सरकार भी पीएचसी और सीएचसी स्तर पर स्तन कैंसर की स्क्रीनिंग और समय पर रेफरल सुनिश्चित करने के लिए विशेष कार्यक्रम चला रही है. आयुष्मान भारत और मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी योजना के तहत अब स्तन कैंसर का आधुनिक उपचार निःशुल्क उपलब्ध है, जिससे रोगियों और उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ में कमी आई है.

सदर अस्पताल में 1323 स्क्रीनिंग, 28 महिलाएं पायी गयीं ग्रसित

सदर अस्पताल में 31 अक्तूबर तक 1323 महिलाओं की स्तन कैंसर स्क्रीनिंग की गयी. 28 महिलाएं पॉजिटिव पायी गयीं. यह चिंता का विषय है कि महिलाएं जागरूकता के अभाव में इस बीमारी से जूझ रही हैं, परंतु राहत की बात यह है कि समय पर जांच से त्वरित इलाज संभव है और यह बीमारी पूर्ण रूप से उपचार योग्य है.

भारत में हर 22 महिलाओं में से एक प्रभावित

राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री के अनुसार हर 22 भारतीय महिलाओं में से एक महिला अपने जीवनकाल में स्तन कैंसर से प्रभावित होती हैं. दुखद तथ्य यह है कि हर 13 मिनट में एक महिला स्तन कैंसर से अपनी जान गंवाती हैं. इलाज उपलब्ध होने के बावजूद देर से निदान और जागरूकता की कमी सबसे बड़ी बाधाएं बनी हुई हैं.

प्रारंभिक पहचान से बढ़ेगी जीत की संभावना

यदि स्तन कैंसर का पता शुरुआती अवस्था में लग जाये, तो इसका उपचार अत्यंत प्रभावी और अक्सर पूर्ण रूप से संभव होता है. महिलाओं को नियमित रूप से स्तन स्वयं परीक्षण (बीएसइ) करना चाहिए. साल में एक बार क्लिनिकल ब्रेस्ट परीक्षण करवाना चाहिए. 50 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को समय-समय पर मैमोग्राफी करानी चाहिए.

जांच की प्रमुख विधियां

स्वयं स्तन परीक्षण

20 वर्ष से अधिक आयु की हर महिला को महीने में एक बार स्वयं स्तन परीक्षण करना चाहिए. विशेष रूप से मासिक धर्म के एक सप्ताह बाद. इससे महिलाएं अपने स्तनों के सामान्य स्वरूप को पहचान सकती हैं और किसी भी बदलाव का पता जल्दी लगा सकती हैं.

क्लिनिकल स्तन परीक्षण

यह जांच प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा की जाती है. 20 से 40 वर्ष की महिलाओं के लिए हर तीन वर्ष में एक बार और 40 वर्ष के बाद हर साल करवाने की सलाह दी जाती है.

मैमोग्राफी : यह स्तन कैंसर जांच की सबसे विश्वसनीय विधि है. 40 से 74 वर्ष की महिलाओं को हर एक या दूसरे वर्ष में एक बार मैमोग्राफी कराने की सलाह दी जाती है.

अल्ट्रासाउंड और एमआरआई

युवा या घने स्तन ऊतकों वाली महिलाओं के लिए अल्ट्रासाउंड उपयोगी है, जबकि पारिवारिक इतिहास या आनुवंशिक जोखिम वाले मामलों में एमआरआई की सिफारिश की जाती है.

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स्तन कैंसर क्या है?

कभी-कभी, स्तन की सामान्य कोशिकाएं बदल जाती हैं और असामान्य (कैंसर वाली) हो जाती हैं. ये कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ती हैं और गांठ या ट्यूमर का रूप ले लेती हैं. ये कैंसर कोशिकाएं आसपास के ऊतकों पर हमला कर सकती हैं या शरीर के अन्य हिस्सों जैसे लिम्फ नोड्स, फेफड़े, हड्डियां, मस्तिष्क या लिवर तक फैल सकती हैं.

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स्तन कैंसर के शुरुआती लक्षण क्या हैं?

चेतावनी संकेतों को जानना बहुत जरूरी है. इसके आम लक्षणों में शामिल हैं.

– स्तन या बगल में गांठ का होना.

– स्तन के आकार या आकृति में बदलाव.

– त्वचा में बदलाव, जैसे डिंपलिंग (गड्ढे पड़ना), सिकुड़न, लालिमा या चकत्ते.

– निप्पल का अंदर की ओर मुड़ जाना, घाव होना या निप्पल से स्राव (कभी-कभी खून जैसा) आना.

यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि लगभग 80% स्तन गांठें कैंसर वाली नहीं होती हैं, लेकिन किसी भी नये बदलाव के लिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.

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शुरुआती पहचान क्यों महत्वपूर्ण है?

शुरुआती पहचान से जान बचाई जा सकती है. जब बीमारी का पता शुरुआती चरण में चलता है:

– ठीक होने की दर 90% से अधिक हो जाती है.

– कम आक्रामक इलाज की आवश्यकता होती है.

– इलाज का खर्च कम आता है.

– ठीक होने के बाद जीवन की गुणवत्ता काफी बेहतर होती है.

दुर्भाग्य से, भारत समेत कई देशों में, 60% से ज्यादा महिलाएं एडवांस्ड स्टेज की बीमारी के साथ डॉक्टर के पास पहुंचती हैं, जिससे उनके ठीक होने की संभावना कम हो जाती है.

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क्या स्तन कैंसर को रोका जा सकता है?

हालांकि महिला होना अपने आप में एक बड़ा जोखिम कारक है, लेकिन स्वस्थ जीवन शैली अपनाकर इसके खतरे को कम किया जा सकता है:

– संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से स्वस्थ वजन बनाये रखें.- शराब का सेवन और धूम्रपान से बचें.

– यदि संभव हो तो स्तनपान करायें, यह प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान करता है.

– नियमित स्क्रीनिंग करायें.

– जिन महिलाओं के परिवार में स्तन या अंडाशय के कैंसर का इतिहास रहा है, उनके लिए आनुवंशिक परीक्षण और परामर्श पर विचार करें.

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स्तन कैंसर अंत नहीं, यह उपचार योग्य

कई महिलाएं सामाजिक झिझक, जानकारी की कमी और भ्रांतियों के कारण समय पर डॉक्टर से संपर्क नहीं करतीं. अब भी कई लोग मानते हैं कि कैंसर का मतलब मृत्यु या बायोप्सी कराने से कैंसर फैल जाता है जो कि पूरी तरह गलत धारणा है. रांची सहित झारखंड के कैंसर देखभाल केंद्र सक्रिय रूप से इस अंतर को पाटने का प्रयास कर रहे हैं. स्क्रीनिंग कैंप, क्लिनिकल जांच और शिक्षा कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं को प्रारंभिक पहचान के महत्व के प्रति जागरूक किया जा रहा है. स्तन कैंसर अंत नहीं है, यह उपचार योग्य है और यदि समय पर पहचाना जाये तो पूर्ण रूप से ठीक हो सकता है.

डॉ अमितेश आनंद, सीनियर कंसल्टेंट, आरसीएचआरसी टाटा ट्रस्ट, रांची

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विशेषज्ञों की राय

भारतीय महिलाओं में स्तन कैंसर सबसे आम कैंसर है. प्रत्येक वर्ष लगभग दो लाख नये मामले सामने आते हैं. स्तन के आकार या आकृति में बदलाव, गांठ, त्वचा पर डिंपल या निप्पल से डिस्चार्ज ये सभी लक्षणों को नजरअंदाज न करें. शुरुआती चरण में पहचान होने पर स्तन को बचाते हुए इलाज संभव है. जानकारी के अभाव में मरीज अक्सर देर से आते हैं, जिससे इलाज कठिन हो जाता है. स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार और नियमित जांच से खतरा कम किया जा सकता है.

डॉ रजनीगंधा टुडू, कंसल्टेंट मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, रांची कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर

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नियमित स्क्रीनिंग से ऐसे ट्यूमर का पता लगाया जा सकता है जो महसूस नहीं किये जा सकते, लेकिन इमेजिंग से दिखाई देते हैं. अध्ययनों से सिद्ध है कि नियमित जांच से स्तन कैंसर से होने वाली मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आती है.

डॉ गुंजेश कुमार सिंह, हेड ऑफ डिपार्टमेंट, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, पारस हॉस्पिटल, रांची

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स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान

राज्य में चल रहे स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान के तहत अब तक 3.85 लाख ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग टेस्ट और 1.77 लाख सर्वाइकल कैंसर जांचें की गयी हैं. पंचायत स्तर पर लगाये जा रहे जांच शिविरों में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया. इस अभियान को जन आंदोलन का रूप दिया जा रहा है, ताकि महिलाओं को उनके घर के पास ही स्वास्थ्य जांच की सुविधा मिल सके.

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कैंसर को हराने वाली बहादुर महिलाए

मुझे वर्ष 2020 में पता चला कि मैं कैंसर के दूसरे चरण में हूं. समय पर इलाज कराया और आज पूरी तरह स्वस्थ हूं.

डरें नहीं, जागरूक बनें. मेरी तरह आप भी इस जंग को जीत सकते हैं.

रुकसाना खातून, कडरू निवासी

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वर्ष 2023 में मुझे ब्रेस्ट कैंसर का पता चला. अब भी इलाज चल रहा है, लेकिन मैं ठीक हूं. पहले मैं जागरूक नहीं थी, पर अब जानती हूं कि यह बीमारी छिपाने की नहीं, सामना करने की है. कैंसर से डरें नहीं, यह इलाज योग्य है.

अमिता, अरगोड़ा निवासी

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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MUNNA KUMAR SINGH is a contributor at Prabhat Khabar.

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