निजीकरण के विरोध में बैंक यूनियनों ने दी आंदोलन की चेतावनी, गिनायी सरकारी क्षेत्र के बैंकों की उपलब्धियां

पब्लिक सेक्टर बैंक ऑफिसर्स यूनियन ने बैंकों के निजीकरण के विरोध में आंदोलन करने की चेतावनी दी है. बैंक ऑफ इंडिया अधिकारी महासंघ के सचिव सुनील कुमार ने बताया कि सरकार अगर अपना फैसला वापस नहीं लेती है तो इस आंदोलन को जन आंदोलन का रूप दिया जायेगा.
रांची : सरकारी क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण को लेकर बैंक ऑफिसर्स यूनियन में उबाल है. यूनियन बड़े पैमाने पर आंदोलन की तैयारी में है. अखिल भारतीय बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के सलाहकार और बैंक ऑफ इंडिया अधिकारी महासंघ के महासचिव सुनील कुमार ने रांची प्रवास के दौरान बैंकों के निजीकरण को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया. पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि निजीकरण से बैंकों और आम लोगों को काफी नुकसान होगा.
उन्होंने कहा कि सरकार बैंकों का निजीकरण कर चंद कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाना चाहती है. सरकारी क्षेत्र के बैंक की जितनी शाखाएं देशभर में हैं, निजी बैंक उसके आगे कहीं नहीं टिकती. हर तबके के लोगों से सरकारी क्षेत्र की बैंक सीधे तौर पर जुड़ी हैं. विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में जितना योगदान सरकारी क्षेत्र के बैंकों का है, उतना निजी क्षेत्र के बैंकों का नहीं है.
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सुनील कुमार ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूह और किसानों को ऋण देने के मामले में सरकारी क्षेत्र के बैंक सबसे आगे हैं. निजीकरण से आरक्षण नीति भी प्रभावित होगी और बेरोजगारी बढ़ेगी. नौकरियों पर इसका असर पड़ेगा. उन्होंने कहा कि हम निजीकरण का पूरजोर विरोध करेंगे और आम लोगों तक इसके नुकसान की जानकारी पहुंचायेंगे. हम अपने आंदोलन को जन आंदोलन के रूप में सरकार के सामने लायेंगे और सरकार को अपना फैसला बदलना पड़ेगा.
सुनील कुमार ने कहा कि हमारे देश की बुनियाद सार्वजनिक क्षेत्र है. जिन्हें सरकार निजी हाथों में सौंप कर बर्बाद करना चाहती है. सरकार की निजीकरण की नीति का बड़े शब्दों में विरोध करते हुए उन्होंने इसे राष्ट्र विरोधी कदम बताया. उन्होंने बताया कि कोरोना काल में जिस प्रकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने सरकार और आम लोगों की जिस प्रकार मदद की उसे सबने देखा.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऑफिसर्स एसोसिएशन के कई पदाधिकारी मौजूद थे. रांची ईकाई के महासचिव सुनील लकड़ा, अखिलेश कुमार, प्रकाश उरांव, अमित कुमार, विजय कुमार बाधवा, मनीष नारायण, वरुण कुमार, भरत लाल ठाकुर, हरीश कुमार, मोहम्मद अली हसन सहित कई अधिकारियों ने भी निजीकरण का विरोध किया और जन आंदोलन की चेतावनी दी.
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