Aman Sahu Encounter: मोबाइल दुकान चलाने वाला अमन साहू कैसे बन गया झारखंड का सबसे बड़ा गैंगस्टर

अमन साहू.
Aman Sahu Encounter: झारखंड के आतंक गैंगस्टर अमन साहू को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया. अमन साहू कैसे एक मोबाइल दुकानदार से झारखंड का खूंखार गैंगस्टर बन गया, यहां पढ़ें.
Aman Sahu Encounter: झारखंड पुलिस को मंगलवार को बड़ी सफलता मिली. पलामू जिले में आतंकवाद रोधी दस्ता (एटीएस) ने झारखंड के सबसे बड़े गैंगस्टर अमन साहू को मुठभेड़ में मार गिराया. अमन साहू छोटी उम्र में अपराधियों के गिरोह के संपर्क में आ गया था. एक बार जेल जाने के बाद उसने अपना गिरोह तैयार करने की ठानी और ऐसा गिरोह तैयार कर लिया कि वह झारखंड का सबसे बड़ा गैंगस्टर बन गया. इंटरनेशनल गैंगस्टर लॉरेंस विश्नोई का भी खास बन गया. आईए, आपको बताते हैं कि अमन साहू कैसे अपराध की दुनिया में आया और कैसे इतना बड़ा गैंगस्टर बन गया.
पतरातू में अमन साहू चलाता था मोबाइल की दुकान
झारखंड की राजधानी रांची के बुढ़मू थाना क्षेत्र के मतवे गांव के रहने वाले अमन साहू के दादा हरिदास साहू मतवे में खेती-बाड़ी करते थे, लेकिन उसके पिता निरंजन साहू यहां से पतरातू चले गये. वहां एक दुकान खोल ली. इंटर की पढ़ाई करने के बाद अमन साहू ने पतरातू में ही वर्ष 2008 में मोबाइल की दुकान खोली. इसी दौरान वह सुशील श्रीवास्तव और भोला पांडेय गिरोह के संपर्क में आ गया. पैसे कमाने की लालच में वह आपराधिक गिरोह में सक्रिय हो गया.
बर्नपुर सीमेंट फैक्ट्री में फायरिंग करने के बाद गया जेल
बर्नपुर सीमेंट फैक्ट्री में फायरिंग करने के आरोप में पहली बार अमन साहू को पुलिस ने गिरफ्तार किया. उसे 10 माह तक जेल में रहना पड़ा. जेल से निकलने के बाद अमन साहू को इस बात का अहसास हुआ कि वह सुशील श्रीवास्तव और भोला पांडेय से बड़ा गिरोह चला सकता है. इसके बाद उसने इन दोनों का साथ छोड़कर अपना गैंग तैयार कर लिया.
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व्यापारियों और ठेकेदारों से करता था वसूली
उसने व्यापारियों और ठेकेदारों से वसूली शुरू कर दी. देखते ही देखते अमन साहू गिरोह का विस्तार होता चला गया. शुरू में उसने हजारीबाग और रामगढ़ जिले में अपराध को अंजाम देना शुरू किया. बाद में उसने रांची, पलामू, लातेहार तक अपने पैर पसार लिये. वह झारखंड तक ही सीमित नहीं रहा. लॉरेंस विश्नोई गैंग के लिए भी काम करने लगा.
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पलामू के चैनपुर थाना क्षेत्र में पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया
ठेकेदारों और व्यापारियों से वसूली करने वाले गैंगस्टर अमन साहू पुलिस के लिए भी बड़ी चुनौती बन गया. पुलिस ने जब उसे गिरफ्तार किया, तो उसने जेल से ही आपराधिक घटनाओं को अंजाम देना शुरू किया. आखिरकार मंगलवार 11 मार्च 2025 को पलामू के चैनपुर थाना क्षेत्र में वह पुलिस की हिरासत से भागने की कोशिश के दौरान पुलिस की गोलियों का शिकार हो गया. अमन साहू पर सिर्फ हजारीबाग और रामगढ़ जिले में 70 मुकदमे दर्ज थे. पूरे झारखंड में उस पर 130 से ज्यादा केस थे.
रायपुर से रिमांड लेकर आ रही थी झारखंड एटीएस की टीम
पलामू की एसपी रीष्मा रमेशन ने कहा है कि अमन साहू को झारखंड एटीएस की टीम रायपुर से रिमांड पर रांची ले जा रही थी. इसी दौरान चैनपुर थाना क्षेत्र में अमन ने पुलिस वाले की इंसास राइफल छीनकर भागने लगा. पुलिस ने उसे रोका, तो उसने फायरिंग कर दी. इसमें एक पुलिसकर्मी घायल हो गया. एटीएस के जवानों ने भी जवाबी कार्रवाई की. मुठभेड़ में अमन की मौत हो गयी.
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By Mithilesh Jha
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