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पिछले सात साल में 150 नक्सलियों ने किया सरेंडर, एक को भी सजा नहीं दिला सकी पुलिस

Updated at : 17 May 2017 7:57 AM (IST)
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पिछले सात साल में 150 नक्सलियों ने किया सरेंडर, एक को भी सजा नहीं दिला सकी पुलिस

!!सुरजीत सिंह!! रांची : पिछले सात साल में झारखंड पुलिस के समक्ष 150 नक्सलियों-उग्रवादियों ने सरेंडर किया. अब तक एक भी नक्सली या उग्रवादी को पुलिस किसी भी मामले में सजा नहीं दिला सकी. पुलिस मुख्यालय द्वारा समय-समय पर जारी किये गये आंकड़े के मुताबिक 152 में से 68 नक्सलियों ने पिछले डेढ़ साल में […]

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!!सुरजीत सिंह!!

रांची : पिछले सात साल में झारखंड पुलिस के समक्ष 150 नक्सलियों-उग्रवादियों ने सरेंडर किया. अब तक एक भी नक्सली या उग्रवादी को पुलिस किसी भी मामले में सजा नहीं दिला सकी. पुलिस मुख्यालय द्वारा समय-समय पर जारी किये गये आंकड़े के मुताबिक 152 में से 68 नक्सलियों ने पिछले डेढ़ साल में सरेंडर किया. वर्ष 2016 में 38 और वर्ष 2017 में 30 नक्सलियों-उग्रवादियों ने सरेंडर किया.

सरेंडर करनेवाले नक्सलियों-उग्रवादियों के खिलाफ दर्ज मामलो में सजा दिलाने की कोशिश नहीं की गयी, जिस कारण कई नक्सली-उग्रवादी सभी मामलों में बरी होनेवाले हैं. नक्सल सरेंडर पॉलिसी में साफ लिखा हुआ है कि सरेंडर करनेवाले के खिलाफ दर्ज मामलों को विधि के तहत निष्पादित किया जायेगा. सरेंडर करनेवाले नक्सलियों के मामले के निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाये, लेकिन अब तक किसी भी जिला में एक भी फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन नहीं किया गया है.

वर्ष 2015 में पुलिस ने नक्सली चश्मा विकास को सरेंडर कराया था. पुलिस के अधिकारियों ने चश्मा विकास के ऊपर दर्ज मामले को वापस करने का अनुरोध पत्र लातेहार कोर्ट में दिया था. कोर्ट ने इस अनुरोध को यह कह कर ठुकरा दिया था कि यह असंवैधानिक है.

जिन बड़े नक्सलियों ने सरेंडर किया

वर्ष 2015 : लालदेव सिंह, अनिल सिंह, घुरा नाग, विमल गुड़िया, शंकर पासवान, सब जोनल कमांडर महेश यादव उर्फ बनारसी उर्फ रघुवंश, नरेंद्र यादव उर्फ नारे, सब जोनल कमांडर गजेंद्र साव उर्फ गज्जु साव, एरिया कमांडर कुलदीप मेहता.

वर्ष 2016 : छोटा विकास उर्फ चश्मा, 15 लाख का इनामी बड़ा विकास.

वर्ष 2017 : 25 लाख का इनामी कान्हू मुंडा, 15 लाख का इनामी नकुल यादव, पांच लाख का इनामी मदन यादव, पांच लाख का इनामी डिंबा पाहन, 15 लाख का इनामी कुंदन पाहन.

नक्सली जयप्रकाश अदालत से रिहा

एजेसी रंजना अस्थाना की अदालत ने कुंदन पाहन दस्ता के नक्सली जयप्रकाश दुबे को साक्ष्य के अभाव में रिहा कर दिया. जयप्रकाश दुबे पर बुंडू निवासी संतोषी देवी का अपहरण अौर दुष्कर्म का आरोप था. संतोषी देवी की जमीन पर कुछ लोगों की नजर थी. जयप्रकाश ने संतोषी की जमीन बचाने की बात कही. फिर एक दिन उसका अपहरण कर जंगल में ले गया अौर उसके साथ दुष्कर्म किया. इसके बाद उसने संतोषी को दस्ता में शामिल भी कर लिया. इस मामले में बुंडू थाना में 2002 में मामला दर्ज किया गया था. पुलिस ने 2011 में चार्जशीट दाखिल की थी. इसमें जयप्रकाश के अलावा नक्सली कुंदन पाहन, अशोक कुमार, आरती कुमारी, मोती सिंह, सुशील सिंह मुंडा, एस मुंडा को आरोपी बनाया गया था.

सरेंडर पॉलिसी का नियम

सरेंडर करनेवाले उग्रवादी के विरुद्ध लंबित जघन्य मामलों को विधि के अनुसार निष्पादित किया जायेगा. हल्के मामलों को प्ली बारगेनिंग के तहत निष्पादन किया जा सकता है.

सरेंडर करनेवाले नक्सली को सरकार नि:शुल्क अधिवक्ता उपलब्ध करायेगी.

आवश्यक शर्तें पूरा करने पर किसी मामले में अनुमोदक बनाया जा सकता है.

लंबित मुकदमा को निपटाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित किया जायेगा.

हर वर्ष इस पॉलिसी की समीक्षा की जायेेगी.

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