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कभी कॉफी हाउस में होती थी साहित्यिक चर्चाएं, आज वाट्सएप और फेसबुक है प्लेटफार्म

Updated at : 14 Apr 2017 1:06 PM (IST)
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कभी कॉफी हाउस में होती थी साहित्यिक चर्चाएं, आज वाट्सएप और फेसबुक है प्लेटफार्म

साहित्यिक चर्चाएं कभी कॉफी हाउस में हुआ करती थीं. अब कॉफी हाउस का दौर खत्म हो चुका है. चाय व कॉफी के साथ होने वाली चर्चाओं ने फेसबुक और वॉट्सएप का दामन थाम लिया है. नवोदित कवियों, शायरों और लेखकों को इन माध्यमों के जरिये पहचान हासिल हो रही है. कविताओं को पढ़ा और सराहा […]

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साहित्यिक चर्चाएं कभी कॉफी हाउस में हुआ करती थीं. अब कॉफी हाउस का दौर खत्म हो चुका है. चाय व कॉफी के साथ होने वाली चर्चाओं ने फेसबुक और वॉट्सएप का दामन थाम लिया है. नवोदित कवियों, शायरों और लेखकों को इन माध्यमों के जरिये पहचान हासिल हो रही है. कविताओं को पढ़ा और सराहा जा रहा है. समान अभिरुचि के लोग जुड़ रहे हैं. रांची शहर में कई ऐसे वॉट्सएप ग्रुप का संचालन किया जा रहा है, जहां साहित्यिक चर्चाएं होती हैं.

सिटी में ‘महफिल-ए-सुखन’ जैसे वॉट्सएप ग्रुप चल रहे हैं. ‘महफिल-ए-सुखन’ का संचालन जानी-मानी कवयित्री वीणा श्रीवस्तव करती हैं. इस ग्रुप में साहित्य प्रेमी जुड़े हुए हैं. वे अपनी नयी रचनाओं को यहां भेजते हैं. साहित्यिक चर्चाएं करते हैं. नयी कहानी, किताबों का जिक्र होता है. कोई युवा रचनाकार अगर कविताएं भेजता हो तो उन्हें अनुभवी लेखकों का मार्गदर्शन भी प्राप्त होता है. वक्त के साथ उनकी रचनाएं परिष्कृत होकर निखरती हैं.

कई साहित्यिक ग्रुप की सदस्य और कवयित्री रेणु मिश्रा मानती हैं कि फेसबुक ने लोगों को पहचान दी है.वाट्सएप ग्रुप की भूमिका पर राय रखते हुए उन्होंने बताया कि ऐसे ग्रुप नये लोगों के लिए एक किस्म का ट्यूटोरियल क्लास भी है, जहां अनुभवी लोगों से काफी कुछ सीखा जाता है. अखबारों मे स्पेस को लेकर सीमा है, लेकिन वाट्सएप में आप खुद को कभी भी अभिव्यक्त कर सकते हैं. अगर यहां कोई रचना किसी के दिल को छूती है तो लोग तुरंत शेयर करते हैं.

फेसबुक और वाट्सएप एक श्रोता वर्ग भी तैयार करता है जो आपको अलग तरह का आत्मविश्वास देने की ताकत रखता है. लोकतांत्रिक माध्यम होने की वजह से यहां खेमेबंदी की गुंजाईश भी कम हो जाती है. इस माध्यम की सबसे बड़ी खासियत है – आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की रचनात्मकता को बाहर लाने में अहम भूमिका निभाना. वैसे लोग जिनके पास किताबें छपवाने के साधन नहीं हैं, उनकी रचना भी आम लोगों तक आसानी से पहुंच सकती है.

फेसबुक और व्हाट्स एप आम लोगों के जीवन का हिस्सा बन चुका है. इस माध्यम के व्यापक पहुंच ने समाज में कई सकरात्मक बदलाव लाये हैं. अगर आपको भी इस तरह के नये प्रयोग की जानकारी हो तो हमारे साथ साझा कर सकते हैं.आप 7250797364 में मैसेज भेजकर सोशल मीडिया के द्वारा होने वाले सकरात्मक बदलाव के बारे में सूचित करें,हम उनको अपने खबरों का हिस्सा बनायेंगे.

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