100-100 मीटर की दूरी पर चेक डैम बने, तो नदी में सालों भर पानी रहेगा : नीतीश प्रियदर्शी
रांची : शहर के गंदे नाले के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हरमू नदी का सौंदर्यीकरण कराया जा रहा है. इसके तहत नदी के किनारे-किनारे गैबियन लगाया जा रहा है. लैंड स्केपिंग कर ऐसी जगहाें पर घास लगायी जा रही है. नदी में गंदा पानी न गिरे, इसके लिए एसटीपी का निर्माण कराया जा रहा है. परंतु नदी में पानी कैसे रुके, इस दिशा में कोई काम नहीं हो रहा है. ऐसे में बारिश के दिनों में अगर इस नदी में पानी आता भी है, तो वह बह कर स्वर्णरेखा नदी में चला जायेगा. फिर यह नदी आम दिनों की तरह ही नजर आयेगी़
उदगम स्थल से हो सौंदर्यीकरण का कार्य : नदी सौंदर्यीकरण का कार्य कैसे और बेहतर तरीके से हो, इस पर पर्यावरणविद नीतीश प्रियदर्शी कहते हैं कि नदी का सौंदर्यीकरण केवल शहरी क्षेत्र में किया जा रहा है. इसके उदगम स्थल से सौंदर्यीकरण किया जाना था. वर्तमान में नदी का सौंदर्यीकरण तो किया जा रहा है. परंतु यहां पानी रुकेगा कैसे, इस पर कोई विचार नहीं किया गया है. इसके लिए सरकार यहां एक निर्धारित दूरी पर छोटे-छोटे चेक डैम बनाये. तभी इस नदी में सालों पर पानी रहेगा. हरमू नदी में कई छोटे-बड़े नाले भी गिरते हैं. इन नालों को भी अतिक्रमण मुक्त किया जाये. तभी यह नदी अपने असली स्वरूप में लोगों को देखने को मिलेगी.
बनायी जा रही सेकेंड फेज की डीपीआर : नदी में पानी कैसे सालों भर जमा रहे, इस पर जुडको के अभियंताओं का कहना है कि नदी सौंदर्यीकरण के सेकेंड फेज की डीपीआर बनायी जा रही है. इसमें नदी में छोटे-छोटे चेक डैम का निर्माण किये जाने का प्रावधान किया गया है. सरकार से डीपीआर काे स्वीकृति मिलते ही चेक डैम का निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया जायेगा.
नदी के सौंदर्यीकरण कार्य को लेकर डीपीआर बनायी गयी है. डीपीआर में नदी के किनारे फूल-पौधे, पार्क, शौचालय, झूला, लाइटिंग आदि लगाने पर जोर दिया गया है. परंतु नदी में पानी का ठहराव कैसे हो, इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है. विशेषज्ञों की मानें, तो सरकार के पास अभी भी वक्त है. नदी में अगर 100-100 मीटर की दूरी पर चेक डैम का निर्माण किया जाये, तो नदी में सालों भर पानी रहेगा. वहीं नदी की सुंदरता भी बढ़ेगी. साथ हरमू-किशोरगंज व मधुकम इलाके का जलस्तर भी बढ़ता़.
