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डेडलाइन समाप्त, 74.65 लाख राशन कार्डधारियों का नहीं हुआ ई-केवाइसी

Updated at : 19 Jul 2025 10:40 PM (IST)
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डेडलाइन समाप्त, 74.65 लाख राशन कार्डधारियों का नहीं हुआ ई-केवाइसी

केंद्र सरकार की ओर से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत पीएचएच व अंत्योदय राशनकार्ड धारियों का ई-केवाइसी कराने की डेडलाइन समाप्त हो गयी है.

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रांची. केंद्र सरकार की ओर से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत पीएचएच व अंत्योदय राशनकार्ड धारियों का ई-केवाइसी कराने की डेडलाइन समाप्त हो गयी है. राज्य सरकारों को शत प्रतिशत ई-केवाइसी कराने के लिए 30 जून तक मौका दिया गया था. साथ ही चेतावनी दी गयी थी कि अगर इस अवधि में ई-केवाइसी की प्रक्रिया पूरी नहीं होती है, तो सब्सिडी रोकने की कार्रवाई की जायेगी. लेकिन झारखंड में अब भी 74.65 लाख राशन कार्डधारियों का ई-केवाइसी नहीं हो पाया है. इसमें से 8.24 लाख राशन कार्ड में एक भी सदस्य का ई-केवाइसी नहीं हो पाया है. ऐसे में केंद्र सरकार झारखंड की सब्सिडी रोकने का फैसला ले सकती है. विभागीय अधिकारियों के अनुसार अभी तक केंद्र सरकार की ओर से ई-केवाइसी की तिथि बढ़ाने को लेकर खाद्य आपूर्ति विभाग के पास ना ही कोई नया आदेश आया है और न ही सब्सिडी रोकने को लेकर कोई पत्र मिला है. ऐसे में झारखंड में ई-केवाइसी कराने की प्रक्रिया फिलहाल जारी रखी गयी है. ई-केवाइसी नहीं कराने वाले राशनकार्ड धारियों का नाम हटाने को लेकर अब भी संशय बरकरार है. इधर भोजन का अधिकार अभियान ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर ई-केवाइसी कराने से वंचित लोगों का नाम नहीं हटाने की मांग की है. साथ ही कई तर्क भी दिये गये हैं. झारखंड में एनएफएसए व ग्रीन कार्डधारी सदस्यों की संख्या 2,87,54,416 है. इसमें से राज्य के लगभग 26 प्रतिशत राशन कार्डधारियों का ई-केवाइसी नहीं हो पाया है. पश्चिमी सिंहभूम में सबसे अधिक 36.5 प्रतिशत राशन कार्डधारी ई-केवाइसी कराने से वंचित रह गये हैं. सरकार ने फर्जी राशन कार्डधारियों को पोर्टल से हटाने को लेकर ई-केवाइसी की प्रक्रिया शुरू की थी. इस संबंध में खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल अयोग्य लोगों का नाम हटाने को लेकर कार्रवाई की जा रही है. इसके तहत सत्यापन के बाद मृत लाभुकों का नाम हटाया जा रहा है. अब तक लगभग 90 हजार मृत लाभुकों का नाम हटाया जा चुका है. केंद्र सरकार की ओर से दो लाख 54 हजार 897 मृत लाभुकों की सूची सौंपकर सत्यापन के बाद इनका नाम पोर्टल से हटाने का निर्देश दिया गया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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