छठी जेपीएससी: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सरकार हलफनामा दायर कर बताये कि रिक्ति है या नहीं
जस्टिस अजय रस्तोगी व जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने राज्य सरकार को यह लिखित जानकारी देने का निर्देश दिया कि संशोधित परिणाम जारी करने के बाद जो अभ्यर्थी जुड़े हैं, उनके लिए क्या तैयारी है. पीठ ने कहा कि सरकार 62 अभ्यर्थियों को नियुक्ति में रख सकती हैं या नहीं.
सुप्रीम कोर्ट ने छठी जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा प्रतियोगिता परीक्षा को लेकर दायर स्पेशल लीव पिटीशन (एसएलपी) पर बुधवार को सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को जवाब (हलफनामा) दायर करने का निर्देश दिया. जस्टिस अजय रस्तोगी व जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने राज्य सरकार को यह लिखित जानकारी देने का निर्देश दिया कि संशोधित परिणाम जारी करने के बाद जो अभ्यर्थी जुड़े हैं, उनके लिए क्या तैयारी है. पीठ ने कहा कि सरकार 62 अभ्यर्थियों को नियुक्ति में रख सकती हैं या नहीं.
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सरकार माैखिक नहीं, बल्कि लिखित में बताये कि विभागों में रिक्ति है या नहीं है, क्योंकि प्रार्थियों ने सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी में बताया है कि विभिन्न विभागों में कई सारे पद खाली हैं. राज्य सरकार को हलफनामा दायर करने के लिए दो सप्ताह का समय प्रदान किया. पीठ ने कहा कि मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को दोपहर दो बजे से होगी. उस दिन मामले की फाइनल सुनवाई होगी.
इससे पूर्व राज्य सरकार की अोर से खंडपीठ को बताया गया कि कार्मिक विभाग से जानकारी दी गयी है कि 62 अभ्यर्थियों को समयोजित नहीं किया जा सकता है. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी फैजान सरवार, वरुण कुमार व अन्य की अोर से एसएलपी दायर कर झारखंड हाइकोर्ट के आदेश को चुनाैती दी गयी है. हाइकोर्ट ने छठी जेपीएससी की मेरिट लिस्ट व अनुशंसा को रद्द कर अनुशंसित 326 अभ्यर्थियों की नियुक्ति को अमान्य घोषित कर दिया है.
खंडपीठ ने कई उदाहरण पेश किये
खंडपीठ ने माैखिक टिप्पणी करते हुए कई उदाहरण दिये. कहा कि सामान्य वर्ग के विद्यार्थी 10वीं व 12वीं की परीक्षा राज्य के संस्थान से उत्तीर्ण नहीं किये हों, तो उन्हें नियुक्ति से बाहर कैसे किया जा सकता है. रिजर्व कैटेगरी के विद्यार्थी जो 10वीं व 12वीं की परीक्षा राज्य के बाहर से पास किये हैं, उन्हें परीक्षा में शामिल करने से गैर आरक्षित वर्ग के विद्यार्थियों के साथ समानता के अधिकार का उल्लंघन क्यों नहीं माना जाये.
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