दवा कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए आयुष्मान भारत के मरीजों से भी बाहर से मंगाते हैं महंगी दवा

Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 20 Feb 2020 7:38 AM

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राजीव पांडेय रिम्स प्रबंधन से दवाओं की मांग नहीं करते हैं डॉक्टर डॉक्टर व दवा कंपनियों के प्रतिनिधि रिम्स के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती मध्यम श्रेणी के मरीजों के साथ-साथ आयुष्मान भारत योजना के लाभुकों (आर्थिक रूप से कमजोर) को भी नहीं छोड़ते हैं. गरीब मरीजों को भी महंगी दवाएं लिखी जाती हैं, जिसके लिए […]

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राजीव पांडेय
रिम्स प्रबंधन से दवाओं की मांग नहीं करते हैं डॉक्टर
डॉक्टर व दवा कंपनियों के प्रतिनिधि रिम्स के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती मध्यम श्रेणी के मरीजों के साथ-साथ आयुष्मान भारत योजना के लाभुकों (आर्थिक रूप से कमजोर) को भी नहीं छोड़ते हैं. गरीब मरीजों को भी महंगी दवाएं लिखी जाती हैं, जिसके लिए मरीज को अपने सामान गिरवी रखकर पैसे का इंतजाम करना पड़ता है. प्रभात खबर के पास आयुष्मान के लाभुक व गरीब मरीजों की पूरी जानकारी है, लेकिन उन्हें इलाज में कोई दिक्कत न हो, इसलिए हम उनका नाम नहीं छाप रहे हैं.
रांची : रिम्स में भर्ती आयुष्मान भारत योजना के मरीजों को अस्पताल द्वारा दवा उपलब्ध कराना है. अस्पताल में दवा उपलब्ध नहीं होने पर इंडेंट (बाहर से खरीद कर) कर मरीजों को दवा उपलब्ध कराना है, ताकि गरीब मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े, लेकिन ट्राॅमा सेंटर के सीसीयू के डॉक्टर रिम्स प्रबंधन को महंगी दवा के लिए जानबूझ कर मांग पत्र (कुछ मरीज को छोड़ कर) नहीं भेजते हैं. इसका नतीजा यह होता है कि गरीब मरीज दवा कंपनियों के चंगुल में फंस कर महंगी दवाएं खरीदने को मजबूर होते हैं.
ट्रॉमा सेंटर के सीसीयू में भर्ती आयुष्मान भारत योजना के एक मरीज को शुरू में तो डॉक्टरों ने बाहर से दवा मांगा कर उपलब्ध करायी, लेकिन बाद में डॉक्टरों ने दवा मंगानी बंद कर दी. अब परिजनों को खुद दवा खरीदनी पड़ रही है, जबकि परिजनों की आर्थिक स्थित अच्छी नहीं है.
वहीं आइसीयू में ही एक विलुप्त होती जनजाति का एक मरीज भर्ती है, लेकिन उसे भी दवाएं उपलब्ध नहीं करायी जा रही हैं. परिजनों को बाहर से महंगी दवा खरीदनी पड़ रही है. वहीं आइसीयू में निमाेनिया का एक गंभीर मरीज भर्ती है. इसके परिजनों को भी बाहर से दवा खरीदनी पड़ रही है.
डॉक्टर वैसी दवा लिखते हैं, जो सिर्फ एमआर या एक ही दुकान में मिलती है : दवा कंपनियों को अप्रत्यक्ष रूप में लाभ पहुंचाने के लिए डॉक्टर क्रिटिकल केयर में भर्ती मरीजों को वैसी दवा लिखते हैं, जो सिर्फ उक्त दवा कंपनी के प्रतिनिधि या फिर एक ही दवा दुकान में ही मिलती है. परिजन डॉक्टर की पर्ची लेकर शहर की दवा दुकानों में घूमते रहते हैं, लेकिन वह दवा कहीं नहीं मिलती है. एक खास दवा दुकान में मिलती है.
निदेशक ने क्रिटिकल केयर यूनिट का लिया जायजा : रिम्स की क्रिटिकल केयर यूनिट से संबंधित खबर छपने के बाद मंगलवार को रिम्स निदेशक डॉ दिनेश कुमार सिंह बुधवार की शाम औचक निरीक्षण करने पहुंचे. अपने स्तर से मामले की जानकारी एकत्र की. मरीज के परिजनों से गुप्त तरीके से बातचीत भी की. करीब 15 मिनट रहने के बाद वह वहां से चले गये.
रिम्स में उपलब्ध होने के बाद भी मरीजों से बाहर की दवा मंगा रहे हैं डॉक्टर
रांची : रिम्स के ट्रॉमा सेंटर में मरीजों को बिना बिल के एमआर द्वारा दवा उपलब्ध कराने की खबर प्रभात खबर में प्रकाशित होने के बाद राज्य औषधि निदेशालय हरकत में आया. बुधवार को मामले की जांच करने ड्रग इस्पेक्टर राजकुमार झा ट्रॉमा सेंटर पहुंचे. उन्होंने मरीजों से पूछताछ की.
जांच में पाया गया कि मरीजों को जो ब्रांडेड दवाएं लिखी जा रही हैं, वह रिम्स में उपलब्ध है. रिम्स में दवा उपलब्ध होने के बाद भी डॉक्टर उस दवा का उपयोग नहीं करते हैं. दवा कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए मरीज के परिजनों से बाहर से दवा मंगाते हैं. जांच में यह भी पाया गया कि एक एंटीबायोटिक की जगह कई एंटीबायोटिक दवा का उपयोग किया जाता है. उपयोग नहीं होने वाली महंगी दवा भी डॉक्टर मरीज के परिजनों से दवा मंगाते हैं.
दवाओं के रासायनिक नाम की जगह डॉक्टर ब्रांड का नाम लिख देते हैं. जांच में पाया गया कि रिम्स में मेरोपेनम दवा उपलब्ध है. इसके बावजूद डॉक्टरों ने उससे मिलती-जुलती दवा परिजनों से मंगायी है. हालांकि राज्य औषधि निदेशालय के अधिकारियों का कहना है कि खबर प्रकाशित होने के बाद जांच कराना रूटीन प्रक्रिया है.
मारपीट मामले की दोबारा जांच करने रिम्स पहुंची टीम
रांची : रिम्स के न्यूरो सर्जरी विभाग में भर्ती एक मरीज की मौत के बाद गार्ड, नर्स व जूनियर डॉक्टरों द्वारा परिजनों से मारपीट किये जाने के मामले की जांच स्वास्थ्य विभाग की टीम कर रही है. बुधवार को स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव चंद्रकिशोर उरांव की अध्यक्षता में दोबारा टीम रिम्स पहुंची.
टीम ने न्यूरो विभाग के सीनियर व जूनियर डॉक्टरों से बंद कमरे में बातचीत की. डॉक्टरों के अलावा सुरक्षा कर्मी का भी पक्ष लिया गया. करीब दो घंटे तक पूछताछ के बाद टीम ने 2:30 बजे रिम्स अधीक्षक डाॅ विवेक कश्यप से मुलाकात की. इसके बाद टीम चली गयी. टीम में विशेष सचिव के अलावा स्वास्थ्य निदेशक प्रमुख डॉ जोगेंद्र सांगा व स्वास्थ्य सेवा के तकनीकी सचिव डॉ राकेश दयाल शामिल थे. टीम ने मीडिया को इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी. उनका कहना था कि वह अपनी रिपोर्ट कोर्ट के सामने रखेंगे.
आयुष्मान भारत योजना के मरीजों से बाहर की दवा मंगानी ही नहीं है. अस्पताल में दवा उपलब्ध नहीं होने पर डॉक्टर हमें इसकी सूचना दें, हम मरीज को दवा उपलब्ध करायेंगे. अगर ऐसा हो रहा है, तो इसका पता लगाया जायेगा. जांच कर कार्रवाई की जायेगी.
डॉ दिनेश कुमार सिंह, निदेशक, रिम्स
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