रांची : सुनहरे भविष्य का सपना लिये नेत्रहीन विद्यार्थियों ने लिखे सवालों के जवाब
Updated at : 12 Feb 2020 9:27 AM (IST)
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हौसले को सलाम. राजधानी में मैट्रिक-इंटर की परीक्षा शुरू रांची : दिल में कुछ करने की तमन्ना हो तो दिव्यांगता राह में बाधा नहीं बन सकती. भविष्य में कुछ बनने की चाहत लिये संत मिखाइल नेत्रहीन विद्यालय के दसवीं के विद्यार्थी मंगलवार को मैट्रिक की परीक्षा देने पहुंचे थे. पहले दिन मैट्रिक में गृह विज्ञान […]
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हौसले को सलाम. राजधानी में मैट्रिक-इंटर की परीक्षा शुरू
रांची : दिल में कुछ करने की तमन्ना हो तो दिव्यांगता राह में बाधा नहीं बन सकती. भविष्य में कुछ बनने की चाहत लिये संत मिखाइल नेत्रहीन विद्यालय के दसवीं के विद्यार्थी मंगलवार को मैट्रिक की परीक्षा देने पहुंचे थे. पहले दिन मैट्रिक में गृह विज्ञान व वाणिज्य की परीक्षा थी. इस दौरान बेथेसदा बालिका उवि में नेत्रहीन विद्यार्थियों का सेंटर पड़ा था.
पहले दिन विद्यालय के आठ छात्र-छात्राओं ने संत मारग्रेट स्कूल में परीक्षा दी. ब्रेललिपि में पढ़ाई कर यहां तक पहुंचे इन स्टूडेंट्स के उत्साह ने उन सामान्य छात्र-छात्राओं को हौसला दिया, जो मैट्रिक व इंटर की परीक्षा को लेकर तनाव में रहते हैं. जिला शिक्षा विभाग की ओर से इन बच्चों के लिए विशेष व्यवस्था की गयी है.
इन स्टूडेंट्स के उत्साह ने उन सामान्य छात्र-छात्राओं को साहस दिया, जो मैट्रिक व इंटर की परीक्षा को लेकर तनाव में रहते हैं
पेपर करने में मजा आ रहा है. प्रश्नपत्र में एक भी सवाल कठिन नहीं. अच्छे नंबर आने की उम्मीद है.
पूनम
परीक्षा में शत प्रतिशत सवाल हल कर टॉप स्थान हासिल करने का प्रयास है. कोई भी सवाल छूटा नहीं.
गीता महतो
परीक्षा शुरू होने से पहले थोड़ा डर लग रहा था, हालांकि सहयोगी से प्रश्न पत्र सुनकर मेरा डर दूर हो गया.
मोहम्मद दानिश
एक भी सवाल ऐसा नहीं आया जो छूटा हो. पेपर ठीक था, इस बार मैट्रिक परीक्षा में बढ़िया अंक लाना है.
सुभाष कुमार
मैट्रिक व इंटर की कॉपी अलग बांधें
मैट्रिक व इंटर की परीक्षा में कॉपी का बंडल बनाने को लेकर जैक ने दिशा-निर्देश जारी किया है. जैक द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि कई परीक्षा केंद्रों पर मैट्रिक व इंटर की कॉपी को बंडल में बांध दिया जाता है. इससे मूल्यांकन व समय पर रिजल्ट प्रकाशन में परेशानी होती है. मैट्रिक की कॉपी को सफेद कपड़ा, इंटर का लाल कपड़ा व मैट्रिक व इंटर की क्षेत्रीय भाषा की कॉपी पीले रंग के कपड़े में बांध कर बंडल बनाने को कहा गया है. सभी बंडलों पर परीक्षा केंद्र का नाम, केंद्र कोड, विषय व जिला का नाम लिखने को कहा गया है.
झारखंड अधिविद्य परिषद के नियमानुसार छात्र-छात्राओं की मदद के लिए बेथेसदा की छात्राओं को बतौर सहयोगी प्रतिनियुक्त किया गया था. दिव्यांग बच्चों को पहले प्रश्न-पत्र पढ़कर सुनाया गया. इसके बाद उन्होंने जो उत्तर दिया उसे सहयोगी ने उत्तर पुस्तिका में लिखा.
राजेंद्र महतो, केंद्राधीक्षक, बेथेसदा बालिका उच्च विद्यालय, रांची
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