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बजट सत्र से पहले बनेगी नियमावली, शामिल होंगे पारा शिक्षकों के सुझाव, हटाये गये 4000 पारा शिक्षक फिर रखे जायेंगे

Updated at : 06 Feb 2020 7:14 AM (IST)
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बजट सत्र से पहले बनेगी नियमावली, शामिल होंगे पारा शिक्षकों के सुझाव, हटाये गये 4000 पारा शिक्षक फिर रखे जायेंगे

रांची : पारा शिक्षकों की प्रस्तावित सेवा शर्त नियमावली को लेकर पारा शिक्षकों द्वारा दिये गये सुझाव और आपत्तियों को शामिल किया जायेगा. झारखंड शिक्षा परियोजना द्वारा पारा शिक्षकों के लिए तैयार नियमावली पर विचार करने को लेकर बुधवार को स्कूली शिक्षा व साक्षरता मंत्री जगरनाथ महतो ने उच्चस्तरीय कमेटी की बैठक की. बैठक के […]

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रांची : पारा शिक्षकों की प्रस्तावित सेवा शर्त नियमावली को लेकर पारा शिक्षकों द्वारा दिये गये सुझाव और आपत्तियों को शामिल किया जायेगा.
झारखंड शिक्षा परियोजना द्वारा पारा शिक्षकों के लिए तैयार नियमावली पर विचार करने को लेकर बुधवार को स्कूली शिक्षा व साक्षरता मंत्री जगरनाथ महतो ने उच्चस्तरीय कमेटी की बैठक की. बैठक के बाद शिक्षा मंत्री ने कहा कि पारा शिक्षकों की सेवा शर्त नियमावली बजट सत्र से पहले तैयार कर ली जायेगी. ऐसी नियमावली तैयार की जायेगी, जो पारा शिक्षकों के हित में हो. शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने कहा कि प्रस्तावित नियमावली पर आपत्ति मांगी गयी थी, इस पर 3700 से अधिक आपत्तियां दर्ज करायीगयी हैं.
पारा शिक्षकों के सुझाव शामिल किये जायेंगे. ऐसे पारा शिक्षक, जिन्हें इंटर में 50 फीसदी अंक प्राप्त है और शिक्षक प्रशिक्षण भी प्राप्त कर लिया है, उनका मानदेय भुगतान करने को कहा गया है. इसके बाद फिर नियमावली को लेकर कमेटी की बैठक होगी.
टेट सफल को प्राथमिक शिक्षक बनाने की मांग : बैठक में पारा शिक्षकों की ओर से शिक्षक पात्रता परीक्षा में सफल पारा शिक्षकों को सीधे प्राथमिक शिक्षक बनाने व शेष पारा शिक्षकों को कार्य अनुभव के आधार पर स्थायी करने की मांग की गयी. बैठक में विकास आयुक्त सुखदेव सिंह, वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव केके खंडेलवाल, स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग के प्रधान सचिव एपी सिंह, झारखंड शिक्षा परियोजना के निदेशक उमाशंकर सिंह व एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा की ओर से संजय दूबे, हृषिकेश पाठक, बिनोद बिहारी महतो, सिंटू सिंह, नरोत्तम सिंह मुंडा, मोहन मंडल समेत अन्य प्रतिनिधि शामिल थे.
नियमावली पर पारा शिक्षकों के मुख्य सुझाव
सीमित आकलन परीक्षा में असफल होने पर भी पारा शिक्षकों की संविदा समाप्त नहीं की जाये.
प्रशिक्षण के आठ वर्ष के बदले विद्यालय में नियुक्ति से आठ वर्ष की सेवा पूर्ण होने का प्रावधान किया जाये.
प्रशिक्षित पारा शिक्षक के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद दस वर्ष की अटूट सेवा के प्रावधान को समाप्त किया जाये.
सीमित आकलन परीक्षा दो की जगह एक चरण में ली जाये.
परीक्षा मात्र सौ अंक की हो और 30 अंक लानेवाले पारा शिक्षक को पास घोषित किया जाये, वर्तमान में पास मार्क्स 60 रखा गया है.
शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय कमेटी की बैठक
हटाये गये 4000 पारा शिक्षक फिर रखे जायेंगे
राज्य के वैसे अप्रशिक्षित पारा शिक्षक, जिन्हें सेवा मुक्त कर दिया गया है, उन्हें फिर से रखा जायेगा. इसकी प्रक्रिया शुरू की जायेगी. शिक्षा मंत्री ने बताया कि इसके लिए विभागीय अधिकारियों को फाइल तैयार करने के लिए कहा गया है. मंत्री इस मामले को लेकर जल्दी ही दिल्ली जायेंगे. केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री से मिलेंगे. ऐसे पारा शिक्षकों की समस्या का समाधान किया जायेगा. ज्ञात हो कि 31 मार्च 2019 तक प्रशिक्षण पूरा नहीं करनेवाले पारा शिक्षकों को सेवामुक्त कर दिया गया है.
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