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रांची : आरोपी कंसल्टेंट धीरज कुमार ने किया खुलासा, शौचालय घोटाले के पैसों से कार व जमीन खरीदी

Updated at : 03 Feb 2020 7:21 AM (IST)
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रांची : आरोपी कंसल्टेंट धीरज कुमार ने किया खुलासा, शौचालय घोटाले के पैसों से कार व जमीन खरीदी

शकील अख्तर रांची : शौचालय निर्माण के कंसल्टेंट ने एक साल में एक करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति अर्जित की. घोटाले की रकम से उसने कार और जमीन खरीदी. चाचा के नाम पर फ्लाई ऐश बनाने की फैक्ट्री लगायी. साथ ही घोटाले की रकम में से राज्य प्रशासनिक सेवा के एक अधिकारी को 30 […]

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शकील अख्तर

रांची : शौचालय निर्माण के कंसल्टेंट ने एक साल में एक करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति अर्जित की. घोटाले की रकम से उसने कार और जमीन खरीदी. चाचा के नाम पर फ्लाई ऐश बनाने की फैक्ट्री लगायी. साथ ही घोटाले की रकम में से राज्य प्रशासनिक सेवा के एक अधिकारी को 30 लाख रुपये दिये. स्वच्छ भारत मिशन गुमला के कंसल्टेंट धीरज कुमार राय ने जांच पड़ताल के दौरान यह बात स्वीकारी है.

घोटाले के इस अभियुक्त ने घोटाले की रकम से अर्जित संपत्ति की विस्तृत जानकारी दी है. उसने पूछताछ के दौरान यह स्वीकार किया है कि मई 2018 में उसने स्वच्छ भारत मिशन में कंसल्टेंट के रूप में कांट्रैक्ट पर काम करना शुरू किया.

उसे मासिक 32 हजार रुपये मानदेय के रूप में मिलता था. वह शौचालय निर्माण से जुड़े अन्य लोगों के साथ घोटाले में शामिल हो गया. उसने घोटाले की रकम से फोरी ग्राम पंचायत के पसंगा गांव में मुखिया की जमीन लीज पर ली. इस जमीन पर 20 लाख रुपये की लागत से ईंट भट्ठा शुरू किया. नवंबर 2018 में ही उसने गुमला जिले के दुनदुरिया निवासी वीरेंद्र कुमार की जमीन लीज पर ली. इस जमीन पर 47 लाख रुपये की लागत से ऐशब्रिक्स बनाने की फैक्ट्री लगायी. इस फैक्ट्री के लिए पूर्व फौजी चाचा कामता राय के नाम पर लीज पर जमीन ली और उस पर फैक्ट्री लगायी. वहीं पांच लाख रुपये में नया ट्रैक्टर और तीन लाख रुपये में पुराना ट्रैक्टर खरीदा.

इसके बाद सात लाख रुपये में कार खरीदी. 13 लाख रुपये फिक्स डिपोजिट किया. रांची जिले के नामकुम अंचल में 2.20 लाख रुपये डिसमिल की दर से 16.5 डिसमिल जमीन खरीदी. अब तक 22 लाख रुपये का भुगतान कर दिया. अपने खाते से 10 लाख रुपये निकाल कर अपने चचेरे भाई रवि कुमार को दिया. इसको अलावा घोटाले की रकम में से राज्य प्रशासनिक सेवा के एक अधिकारी को 30 लाख रुपये देने की बाद स्वीकार की.

घोटाले में शामिल इस कंसल्टेंट द्वारा राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी को पैसा दिये जाने की मामले की जांच की जा रही है. क्योंकि संबंधित अधिकारी के गुमला में कार्यरत रहने के दौरान शौचालय निर्माण के 104 करोड़ रुपये का हिसाब-किताब नहीं है.

एेसे दिया घोटाले को अंजाम

स्वच्छ भारत मिशन में कंसल्टेंट के रूप में काम करने के दौरान निशांत कुमार पांडेय ने उसे शौचालय निर्माण करने के बदले उसका पैसा आपस में बांट लेने की जानकारी दी. साथ ही इसमें शामिल होने को कहा.

इसके बाद पांडेय के साथ वह मुखिया के पति से मिला. उसने कहा कि वह ग्राम स्वच्छता समिति के पास पैसा भेजे. उस पैसे में से जितने पैसों से शौचालय नहीं बनेगा, उसमें से अपना हिस्सा लेकर बाकी पैसा लौटा देगा. मुखिया पति से बात होने के बाद उनसे समिति के खाते में 160 शौचालय का पैसा भेजा. इसमें से 60 शौचालय बना और 100 शौचालय नहीं बना. 100 शौचालयों के 12 लाख रुपये में से मुखिया से पांच लाख रुपये रख लिये. बाकी पैसा लौटा दिया.

मुखिया द्वारा लौटाये गये पैसों में से उसने चार लाख रुपये खुद लिये. बाकी पैसों में से निशांत पांडेय, जया सेन गुप्ता व अन्य को बांटा. यह प्रक्रिया पूरे जिले के सभी प्रखंडों में चलती रही. बाद में योजना से जुड़े लोगों ने फर्जी हस्ताक्षर कर पैसा निकालना और आपस में बांटना शुरू किया. कई लोग अपने मां-बाप, भाई और दूसरे रिश्तेदारों के खातों में मुखिया से पैसा वापस लेने लगे.

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