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रांची में हिट एंड रन मामला : चुटिया थाने में एक जान की कीमत लगी डेढ़ लाख रुपये

Updated at : 03 Jan 2020 7:46 AM (IST)
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रांची में हिट एंड रन मामला : चुटिया थाने में एक जान की कीमत लगी डेढ़ लाख रुपये

चुटिया थाने में एक जान की कीमत डेढ़ लाख रुपये लगायी गयी. बात हो रही है 31 दिसंबर 2019 की रात पटेल चौक के समीप हुए ‘हिट एंड रन’ की घटना में मृत दो युवकों के परिजनों को मिले मुआवजे और घायल सात लोगों के इलाज के खर्च की. गुरुवार को कैटरिंग एसोसिएशन के सदस्यों […]

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चुटिया थाने में एक जान की कीमत डेढ़ लाख रुपये लगायी गयी. बात हो रही है 31 दिसंबर 2019 की रात पटेल चौक के समीप हुए ‘हिट एंड रन’ की घटना में मृत दो युवकों के परिजनों को मिले मुआवजे और घायल सात लोगों के इलाज के खर्च की.
गुरुवार को कैटरिंग एसोसिएशन के सदस्यों ने चुटिया थाने का घेराव किया. जब पुलिस पर दबाव बना, तो आरोपी युवक जतिन बेदी के पिता को थाने बुलाया गया. करीब पांच घंटे तक चली खींचतान के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों में समझौता कराया. दोनों मृतकों के परिजन को बतौर मुआवजा डेढ़-डेढ़ लाख रुपये और घायलों का इलाज मेडिका में कराने पर सहमति बनी.
रांची : चुटिया थाना क्षेत्र के पटेल चौक पर 31 दिसंबर की रात कार चला रहे युवक जतिन बेदी ने जिन नौ लोगों को रौंद दिया था, वे सभी कैटरिंग का काम करते थे. घटना के वक्त ये सभी लोग चुटिया स्थित घर लौट रहे थे.
आरोप है कि कार चला रहे जतिन ने शराब पी रखी थी. उस घटना में दो युवकों अजय भोक्ता और बादल करमाली की मौत हो गयी थी, जबकि सात लोग घायल हो गये थे. गुरुवार दोपहर 12 बजे कैटरिंग एसोसिएशन के सदस्यों ने चुटिया थाने का घेराव कर दिया और मृतकों व घायलों के लिए मुआवजे की मांग की. घेराव करनेवालों में दोनों मृतकों और घायलों के परिजन भी शामिल थे. मौके की नजाकत को देखते हुए चुटिया थाना में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गयी. हंगामे की सूचना पर लोअर बाजार थाना प्रभारी भी वहां पहुंच गये.
आक्रोश बढ़ता देख पुलिस ने जतिन बेदी के पिता अरमजीत बेदी को बुलाया. कुछ देर बाद वे अपने रिश्तेदार रामकृष्णा मिढा और अन्य लोगों के साथ चुटिया थाना पहुंचे. इसके बाद थाने के एक कमरे में दोनों पक्षों के बीच समझौता वार्ता शुरू हुई.
मुआवजे की रकम को लेकर होता रहा विवाद : कैटरिंग एसोसिएशन के लोग मृतक के परिजन को पांच-पांच लाख रुपये और घायलों का इलाज मेडिका में कराने का पूरा खर्च देने की मांग कर रहे थे. अमरजीत बेदी व उनके रिश्तेदार घायलों का इलाज अच्छे अस्पताल में कराने को तो तैयार थे, लेकिन दोनों मृतकों के परिजन को 50-50 हजार रुपये ही मुआवजा देना चाहते थे. इस वजह से दोनों पक्षों में दोपहर 2:30 बजे तक समझौता नहीं हो पाया.
सभी लोग कुछ देर के लिए कमरे से बाहर निकल आये. बाद में चुटिया थानेदार ने पहल करते हुए तत्काल एक लाख नकद और बकाया राशि बाद में दिलाने की बात कही. लेकिन दोनों पक्ष के बीच खींचतान होती रही. दोपहर 3:00 बजे दोबारा समझौता वार्ता शुरू हुई. इस बार जतिन बेदी के पिता व रिश्तेदारों ने मृतक के परिजन को तत्काल डेढ़-डेढ़ लाख रुपये मुआवजा देने और रिम्स में भर्ती घायलों का इलाज मेडिका में कराने की बात मान ली.
घेराव में शामिल कैटरिंग एसोसिएशन के युगल किशोर साव ने बताया कि मृतक बादल करमाली और अजय भोक्ता के परिजनों को डेढ़- डेढ़ लाख रुपये दे दिये गये हैं. रिम्स में भर्ती सोनू करमाली व रोशन कुमार महतो को मेडिका में भर्ती कराया गया है. अन्य घायलों में एक युवक गुलमोहर अस्पताल में और दूसरा मेडिका में भर्ती है. तीसरा घायल युवक रामगढ़ में इलाज करा रहा है. सभी के इलाज का खर्च का जतिन बेदी के रिश्तेदार वहन कर रहे हैं.
मृतकों और घायलों के परिजन ने चुटिया थाने का किया घेराव
31 दिसंबर की रात नौ लोगों को रौंद दिया था कार चालक ने
रुपये नहीं जमा होने पर देर से शुरू हुआ इलाज
मेडिका में रुपये नहीं जमा कराने की वजह से सोनू करमाली और रोशन कुमार महतो का इलाज शुरू नहीं हुआ था. देर शाम दोबारा कैटरिंग एसोसिएशन की ओर से रामकृष्णा मिढ़ा से मोबाइल पर संपर्क किया गया. उन्होंने जल्द से जल्द रुपये भेजने का आश्वासन दिया. कुछ समय बाद वे लोग रुपये लेकर पहुंचे, तो दोनों घायलों को मेडिका में भर्ती कराया गया और इलाज शुरू हुआ.
चालक की लापरवाही व उदासीनता से हुई घटना
हिट एंड रन मामले में हाइकोर्ट के वरीय अधिवक्ता एके कश्यप ने बताया कि यह दुर्घटना लापरवाही और उदासीनता से वाहन चलाने के कारण हुई है. दुर्घटना में दो लोगों की मौत हुई है, जिसके लिए पुलिस ने प्राथमिकी में धारा 304ए लगायी है. वहीं, कई लोग घायल हुए हैं, जिसके लिए पुलिस ने धारा 279 लगायी है. ऐसे में आरोपी को बेल मिल सकता है.
ट्रायल में साबित होने के बाद अदालत 304ए में अधिकतम दो साल की सजा या जुर्माना अथवा दोनों दे सकती है, जबकि धारा 279 के तहत छह माह की सजा या जुर्माना अथवा दोनों दे सकती है. पुलिस आरोपी के नशे में होने की जांच कराती और वह साबित हो जाता, तो ट्रायल में आरोप साबित करने को पुख्ता सबूत मिल जाते.
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