झारखंड सरकार के काम से असंतुष्ट मतदाता गठबंधन की ओर गये

By Prabhat Khabar Digital Desk
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राज्य सरकार से न केवल अधिक असंतोष ही था, बल्कि इसका नतीजा सत्तारूढ़ विरोधी भावना अथवा इस सरकार को सत्ताच्युत करने की इच्छा के रूप में भी सामने आया.
जब मतदाताओं से इस मतदान-पश्चात सर्वेक्षण में यह पूछा गया कि वे रघुवर सरकार की सत्ता-वापसी चाहते हैं अथवा नहीं, तो मतदाताओं के आधे हिस्से (50 प्रतिशत) ने ना में उत्तर दिया, जबकि केवल एक-तिहाई (34 प्रतिशत) ने सरकार के वापस आने की इच्छा दिखाई. 16 प्रतिशत से अधिक ने कोई इच्छा प्रकट न की.
इससे भी ज्यादा अहम यह था कि सरकार को सत्ताच्युत करने की यह बलवती इच्छा विपक्षी पार्टियों में उतनी बुरी तरह विभाजित नहीं हुई, जैसी भविष्यवाणी कुछ लोगों ने की थी. जहां 9 प्रतिशत सरकार-विरोधी मतदाताओं ने आजसू के पक्ष में, 7 प्रतिशत ने जेवीएम के लिए और 20 प्रतिशत ने अन्य दलों को मत दिया, वहीं 57 प्रतिशत के बहुमत में (या लगभग प्रत्येक 5 में 3) मतदाताओं ने महागठबंधन के पक्ष में अपना मत दर्ज किया. यदि सत्तारूढ़-विरोधी यह भावना महागठबंधन के पक्ष में एकजुट नहीं होती, तो परिणाम बहुत भिन्न भी हो सकता था.
पांच में से तीन मतदाताओं ने महागठबंधन के पक्ष में मत दिया
महागठबंधन भाजपा आजसू को जेवीएम अन्य को
को मत दिया को मत दिया मत दिया को मत दिया मत दिया
भाजपानीत राज्य सरकार को
एक और मौका नहीं (50 प्रतिशत) 57 7 9 7 20
भाजपानीत राज्य सरकार को
एक और मौका (34 प्रतिशत) 7 81 5 1 5
कोई उत्तर नहीं (16 प्रतिशत) 24 14 11 11 40
सभी आंकड़े प्रतिशत में
गठबंधन के घटक दलों ने एक-दूसरे को अच्छे से ट्रांसफर कराया अपना वोट
महागठबंधन की जीत का अगला अहम कारण यह था कि कम से कम दो घटकों, जेएमएम और कांग्रेस के बीच अपने मतों का सुचारु स्थानांतरण संपन्न हुआ, जिसमें खासकर पारंपरिक कांग्रेस मतदाता महागठबंधन के प्रति सर्वाधिक निष्ठावान रहे.
इस सर्वेक्षण ने इसके साक्ष्य प्रदान किये कि कांग्रेस द्वारा लड़ी गयी सीटों में जहां 61 प्रतिशत पारंपरिक जेएमएम मतदाताओं ने कांग्रेस उम्मीदवारों को मत दिये, वहीं जेएमएम द्वारा लड़ी गयी सीटों पर 76 प्रतिशत पुराने कांग्रेस मतदाताओं ने जेएमएम उम्मीदवारों को मत दिये. चूंकि यह सर्वेक्षण राजद द्वारा लड़ी गयी केवल एक सीट को ही शामिल कर सका, हम राजद द्वारा लड़ी गयी सीटों में मत स्थानांतरण के विषय में कुछ अधिक कहने में असमर्थ हैं. पर उपलब्ध सीमित साक्ष्य के अनुसार, यह प्रतीत होता है कि वहां भी कांग्रेस मतदाताओं ने महागठबंधन उम्मीदवार के प्रति मजबूत उत्साह दिखाया, जो जेएमएम मतदाताओं से ज्यादा था.
इस तरह, इस चुनाव में आरजेडी के बुरे प्रदर्शन का एक आंशिक कारण यह हो सकता है कि पुराने जेएमएम मतदाताओं ने उसे ऊंचे अनुपात में अपने मत नहीं दिये. सर्वेक्षण के इस निष्कर्ष का समर्थन वास्तविक परिणामों के अलावा इससे भी होता है कि आरजेडी द्वारा लड़ी गयी सीटों पर उसे प्राप्त मत केवल 29.3 प्रतिशत यानी महागठबंधन के तीन घटक दलों में न्यूनतम थे. कांग्रेस ने जहां 34 प्रतिशत मत प्राप्त किये, वहीं जेएमएम को हासिल मतों का प्रतिशत सर्वोच्च यानी 37.5 था.
महागठबंधन साझीदारों के बीच मतों का स्थानांतरण
महागठबंधन भाजपा अन्य को
को मत दिया को मत दिया मत दिया
कांग्रेस द्वारा लड़ी गयीं सीटें
पारंपरिक कांग्रेस मतदाता 88 3 9
पारंपरिक जेएमएम मतदाता 59 9 32
जेएमएम द्वारा लड़ी गयीं सीटें
पारंपरिक कांग्रेस मतदाता 76 6 18
पारंपरिक जेएमएम मतदाता 84 7 9
आरजेडी द्वारा लड़ी गयीं सीटें *
पारंपरिक कांग्रेस मतदाता 99 - 1
पारंपरिक जेएमएम मतदाता 54 39 7
पारंपरिक आरजेडी मतदाता 94 4 2
नोट: सभी आंकड़े प्रतिशत में हैं; यहां पारंपरिक मतदाता वे हैं, जिन्होंने बताया कि वे अथवा उनके पारिवारिक सदस्य पिछले 2-3 चुनावों से उसी दल को मत देते रहे हैं.
*कृपया यह जानते हुए पढ़ें कि इस हेतु सैंपल का आकार छोटा था.
आरजेडी को अपनी सीटों पर अपेक्षाकृत कम वोट
पार्टी लड़ी गयीं जीती गयीं मत लड़ी गयीं
सीटें सीटें (%)सीटों में मत (%)
जेएमएम 43 30 18.7237.47
भाजपा 79 25 33.3734.10
कांग्रेस 31 16 13.8833.99
जेवीएम 81 3 5.455.45
आजसू 53 2 8.1012.03
आरजेडी 7 1 2.7529.83
सीपीआइ-एमएल (एल) 14 1 1.155.92
एनसीपी 7 1 0.424.73
स्रोत: निर्वाचन आयोग के आंकड़े

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