रांची : जहां लगती थी जन अदालत वहां लगे जन चौपाल : रघुवर

Updated at : 05 Nov 2019 9:20 AM (IST)
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रांची : जहां लगती थी जन अदालत वहां लगे जन चौपाल : रघुवर

रांची : मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि 14 साल तक राजनीतिक अस्थिरता के कारण झारखंड में उग्रवाद चरम पर था. कानून व्यवस्था की स्थिति लचर थी. पिछले पांच साल में सरकार ने नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने के लिए सरेंडर पॉलिसी बनायी. यही वजह है कि झारखंड में आज उग्रवाद अंतिम सांसें गिन रहा […]

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रांची : मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि 14 साल तक राजनीतिक अस्थिरता के कारण झारखंड में उग्रवाद चरम पर था. कानून व्यवस्था की स्थिति लचर थी. पिछले पांच साल में सरकार ने नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने के लिए सरेंडर पॉलिसी बनायी. यही वजह है कि झारखंड में आज उग्रवाद अंतिम सांसें गिन रहा है. जनता के सहयोग से व्यवस्था में परिवर्तन किया जा सकता है. आज इसका प्रमाण भी देखने को मिल रहा है.
जहां पर कभी नक्सली जन अदालत लगाते थे, वहां पर जन चौपाल लग रहे हैं. बंदूक सिर्फ जान ले सकती है, व्यवस्था में परिवर्तन नहीं कर सकती है. श्री दास सोमवार को राजधानी रांची में लातेहार विधायक प्रकाश राम की ओर से आयोजित अनुसूचित जनजाति मोर्चा के एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे. हरमू बाइपास रोड स्थित कॉर्निवाल बैंक्वेट हॉल में विधायक प्रकाश ने शक्ति प्रदर्शन कर अपनी दावेदारी पेश की. प्रकाश राम ने हाल ही में झाविमो छोड़ कर भाजपा का दामन थामा है.
किसी दल के विधायक के साथ नहीं किया भेदभाव
कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सभी के लिए होती है. पिछले पांच साल में हमने किसी दल के विधायक के साथ भेदभाव नहीं किया, चाहे विधायक किसी दल के भी हो. विधायकों की समस्याओं का समाधान किया गया. उन्हें योजनाएं दी गयी. सरकार का एकमात्र लक्ष्य था झारखंड का विकास. विपक्षी दलों ने आदिवासी व दलितों के नाम पर मत पेटी भरने का काम किया. भाजपा वोट बैंक नहीं विकास की राजनीति करती है.
दुष्प्रचार कर रहा है विपक्ष, सचेत रहें
मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष भाजपा सरकार बनने के बाद से ही दुष्प्रचार कर रहा है कि आदिवासियों की जमीन छीन ली जायेगी. उन्होंने कार्यशाला में मौजूद लोगों से पूछा कि क्या आपकी एक इंच जमीन छीनी गयी है?
नहीं में जवाब मिलने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आप दुष्प्रचार से सचेत रहें. झारखंड नामधारी पार्टियां नहीं चाहते हैं कि आदिवासियों का बच्चा पढ़े लिखे. इन्हें पता है कि अगर जनता जागरूक हो गयी, तो इनकी दुकानदारी बंद हो जायेगी. आदिवासियों ने झारखंड की संस्कृति को संभाल कर रखा है. कार्यशाला को विधायक प्रकाश राम, विधायक भानु प्रताप शाही समेत लातेहार विधानसभा क्षेत्र से आये कई नेताओं ने संबोधित किया.
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