सामाजिक बदलाव का संदेश दे रही कलीम राही की कूची, विदेशों में है पेंटिंग्स की डिमांड

By Prabhat Khabar Digital Desk
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गुरुस्वरूप मिश्रा

तस्वीरें हजार शब्दों पर भारी पड़ती हैं. रंगों की दुनिया में ब्रश से हाथ की कलाकारी महज चित्रकारी नहीं है, बल्कि सामाजिक संदेश के जरिये बदलाव की नयी कहानी भी लिखती है. इतना ही नहीं, सुनहरे या स्याह अतीत की दुनिया की सैर कराकर हमारा मार्गदर्शन भी करती है.

झारखंड की राजधानी रांची से लगभग 70 किमी दूर स्थित सिल्ली के रहनेवाले चित्रकार कलीम राही की तस्वीरें बोलती हैं. आपसे संवाद करती हैं. मानवीय संवेदनाओं को झकझोरती इनकी तस्वीरों से आपकी नजरें नहीं हटेंगी.

सामाजिक बदलाव का संदेश दे रही कलीम राही की कूची, विदेशों में है पेंटिंग्स की डिमांड

सबसे खास तो ये कि इन्होंने चित्रकारी की तालीम किसी से नहीं ली है. खुद की मेहनत और प्रकृति प्रेम की बदौलत इनकी प्रतिभा वक्त के साथ निखरती गयी. आज ये कई सम्मान से सम्मानित हो चुके हैं.

पढ़ाई से ज्यादा चित्रकारी में लगता था मन

इंटरमीडिएट पास कलीम राही कामन पढ़ाई से कहीं ज्यादा चित्रकारी में लगता था, जबकि पिता जुमन अंसारी इन्हें ऊंची तालीम दिलाना चाहते थे. पढ़ाई में ढीलाई के कारण पिता उन्हें कई बार कमरे में बंद कर दिया करते थे. इसके बावजूद वह बंद कमरे में रोने की बजाय रंगों की दुनिया में खेलते रहते थे.

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ब्लैकबोर्ड पर स्केचिंग से हुई शुरुआत

कलीम बताते हैं कि पांच वर्ष की उम्र से ही चित्रकारी का जुनून कुछ इस कदर चढ़ा कि आज तक नहीं उतरा. स्कूलों में ब्लैकबोर्ड पर स्केचिंग से इसकी शुरुआत हुई थी. घंटों प्रकृति की गोद में बैठकर निहारना इन्हें बेहद पसंद था. इस कारण वाटर कलर से प्रकृति से जुड़ी तस्वीरें बनाते थे. स्कूल में लंच के लिए मिले पैसे से वह रंग और ब्रश खरीद लिया करते थे.

किसी से नहीं सीखी चित्रकारी

मेहनत व लगन के दम पर वक्त के साथ इनकी चित्रकारी निखरती गयी. जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव के बावजूद पेंटिंग के प्रति प्रेम कम नहीं हुआ. यही जिंदगी बन गयी. किसी से इन्होंने चित्रकारी का ककहारा नहीं पढ़ा, लेकिन आज कई छात्रों को नि:शुल्क प्रशिक्षण देते हैं. पिछले 35 वर्षों से चित्रकारी कर रहे कलीम अब ऑयल पेंटिंग के जरिये जिंदगी के हर पहलू को उकेरने में लगे हैं.

हर तस्वीर कुछ कहती है

नारी एक नाव, सफर-ए-जिंदगी, मजदूर की रोटी, भूख एवं बस दो कदम जैसी कई तस्वीरें हैं, जिनसे आपकी नजरें नहीं हटेंगी. ये न सिर्फ सामाजिक परिदृश्य को उकेर रही हैं, बल्कि अमीरी-गरीबी की गहरी खाई और मातृशक्ति के संघर्ष को लेकर आपको सोचने पर मजबूर कर देंगी.

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विदेशों में बिकती हैं तस्वीरें

कलीम राही महज चित्रकार ही नहीं हैं, बल्कि शायर भी हैं. हर तस्वीर की व्याख्या शेर के जरिए करते हैं. ये बताते हैं कि राह इतनी आसान भी नहीं थी. रांची के विजय राजगढ़िया और सुनील लकड़ा समेत अन्य शुभचिंतकों का सहयोग-प्रोत्साहन नहीं मिलता, तो शायद यह सफर जारी नहीं रह पाता. आज उनकी बनायी तस्वीरें देश के कई राज्यों समेत विदेशों (फ्रांस व अमेरिका) में बिकती हैं.

प्रतिभा को सम्मान

केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री व झारखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और पूर्व डिप्टी सीएम व सिल्ली के पूर्व विधायक सुदेश महतो इन्हें सम्मानित कर चुके हैं. दिल्ली में नेशनल अवार्ड व ऑल इंडिया सूर्या अवार्ड और कोलकाता में इंटरनेशनल अवार्ड व प्रगति कला रत्न अवार्ड मिल चुका है.

सरकार से मिले सहयोग : कलीम राही

कलीम राही कहते हैं कि 35 वर्षों के सफर में तमाम उतार-चढ़ाव के बाद भी सरकार से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल सका. विभागीय सहयोग मिले, तो इस क्षेत्र में झारखंड का नाम और रौशन करेंगे. विपरीत हालात में भी उनके परिवार ने उनका साथ दिया है. जिद हो, तो बिना गुरु (प्रशिक्षक) के भी आप बेहतर कर सकते हैं.

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