रांची : राजनीतिक भागीदारी के लिए एक मंच पर आना होगा : मंडल
Updated at : 14 Oct 2019 9:27 AM (IST)
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रांची : राष्ट्रीय मछुआरा संघ की प्रदेश स्तरीय बैठक में पूर्व विधायक सह संघ के अध्यक्ष अरुण मंडल ने कहा कि मछुआरों को एक मंच पर आने की जरूरत है. मछुआरों को राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक अधिकार के लिए लड़ाई लड़नी होगी. मछुआरा समाज के वोटरों की संख्या बहुत अधिक है. इसके बावजूद राजनीतिक भागीदारी […]
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रांची : राष्ट्रीय मछुआरा संघ की प्रदेश स्तरीय बैठक में पूर्व विधायक सह संघ के अध्यक्ष अरुण मंडल ने कहा कि मछुआरों को एक मंच पर आने की जरूरत है. मछुआरों को राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक अधिकार के लिए लड़ाई लड़नी होगी. मछुआरा समाज के वोटरों की संख्या बहुत अधिक है. इसके बावजूद राजनीतिक भागीदारी बहुत कम है.
प्रदेश महासचिव सरयू केवट ने कहा कि मछुआरा भारत की आर्थिक रीढ़ हैं. हर साल मछली उत्पादन से 40 हजार करोड़ रुपये का लाभ भारत सरकार को हो रहा है. जीडीपी में करीब 1.4 फीसदी योगदान है.
मछली उत्पादन में भारत का विश्व में दूसरा स्थान है. झारखंड राज्य में 10वें स्थान पर है. इसके बावजूद मछुआरा गरीब, लाचार, वंचित, भूखा व नंगा है. नौकरशाह और दलालों के कारण मछुआरा बंधुआ मजदूरी कर रहे हैं. सरकारी स्कीम का लाभ नहीं मिल पा रहा है. प्रदेश उपाध्यक्ष बसंत चौधरी ने कहा कि मत्स्य कार्यालयों में बिचौलियों का दबदबा है.
महेश निषाद ने कहा कि हमारे समाज को खिलौना बना दिया गया है. बैठक में तय किया गया कि सक्रिय रूप से कार्य नहीं करनेवाले पदाधिकारियों को हटाया जायेगा. इस मौके पर कमलेश साहनी, कुमारी अंबिका नायक, सुदामा चौधरी, बसंत चौधरी, पिंटू केवट, कुंदन निषाद, अनिल केवट आदि उपस्थित थे.
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