निगम के अधिकारियों ने अंग्रेजी में दिया जवाब, पार्षद आगबबूला
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :06 Oct 2019 2:05 AM (IST)
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रांची : केंद्र से लेकर राज्य सरकार तक अपने कार्यालयों में हिन्दी के प्रयोग को बढ़ावा देने की पुरजोर कोशिश कर रही हैं. हर साल हिन्दी दिवस पर कार्यक्रम व प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं, जिसमें सरकारी अधिकारी हिन्दी के इस्तेमाल को लेकर लंबे-चौड़े भाषण झाड़ते हैं.लेकिन, रांची नगर निगम के अधिकारियों के लिए हिन्दी […]
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रांची : केंद्र से लेकर राज्य सरकार तक अपने कार्यालयों में हिन्दी के प्रयोग को बढ़ावा देने की पुरजोर कोशिश कर रही हैं. हर साल हिन्दी दिवस पर कार्यक्रम व प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं, जिसमें सरकारी अधिकारी हिन्दी के इस्तेमाल को लेकर लंबे-चौड़े भाषण झाड़ते हैं.लेकिन, रांची नगर निगम के अधिकारियों के लिए हिन्दी आज भी दोयम दर्ज की भाषा है, तभी तो वार्ड पार्षदों द्वारा पूछे गये एक सवाल के जवाब में इन्होंने अंग्रेजी में 23 पन्ने का जवाब सौंप दिया है.
मामला अटल स्मृति वेंडर मार्केट के मेंटेनेंस के टेंडर से जुड़ा है. नगर निगम के अधिकारियों की ओर से दिये जवाब को देख पार्षदों का गुस्सा सातवें आसमान पर है. वे पूरा जवाब दोबारा हिन्दी में लिखकर मांग रहे हैं.दरअसल, अटल स्मृति वेंडर मार्केट और विवादों का चोली-दामन का साथ रहा है. पहले इसके निर्माण, उसके बाद यहां दुकानों के आवंटन को लेकर खींचतान चली. अब यहां का मेंटेनेंस कार्य सिंघल इंटरप्राइजेज को दिये जाने पर पार्षदों को एतराज है.
बीते 10 दिनों से यह मामला गरमाया हुआ है. पहले इस मुद्दे को लेकर निगम बोर्ड की बैठक स्थगित हुई. उसके बाद पार्षद नगर निगम कार्यालय के समीप धरने पर बैठ गये. इनका सवाल था कि आखिर नयी बिल्डिंग के मेंटेनेंस में ऐसा क्या हो रहा है कि हर महीने नगर निगम को 15.50 लाख रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं.
पार्षदों ने कहा
- खुद यूपीएससी और जेपीएससी
- से आये हैं निगम के अधिकारी
- अंग्रेजी में जवाब दे इस मामले की लीपापोती करना चाहते हैं
- हम ऐसा नहीं होने देंगे, हिन्दी में ही लिखित जवाब दें अधिकारी
अंग्रेजी में जवाब दे कर हमारा मखौल उड़ा रहे अधिकारी
पार्षदों के विरोध के हफ्ते भर बाद रांची नगर निगम के अधिकारियों की नींद खुली, तो उन्होंने पार्षदों को अंग्रेजी में 23 पन्ने का जवाब सौंप दिया. इससे नाराज पार्षदों ने सवाल उठाया है. कहा है कि निगम के अधिकारी खुद तो यूपीएससी या जेपीएससी पास करके आये हैं. वे जानते हैं कि हमारी शैक्षणिक योग्यता उनसे कम है. इसलिए वे अंग्रेजी में जवाब देकर हमारी शैक्षणिक योग्यता का मखौल उड़ा रहे हैं. साथ ही वे पूरे मामले की लीपापोती करना चाहते हैं, लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे. अधिकारियों को हिन्दी में लिखित जवाब देना ही होगा.
निगम के अधिकारियों से पार्षदों ने पूछा था सवाल
वेंडर मार्केट में तो सभी उपकरण भी नये हैं. उनके टूटने-फूटने की आशंका भी कम है. तो इतनी ऊंची दर पर उसी एजेंसी को मेंटेनेंस काम क्यों सौंपा गया, जिसने वेंडर मार्केट का निर्माण किया था?जो नगर निगम राजधानी के सभी 53 वार्डों सफाई की जिम्मेदारी उठा सकता है, क्या वह एक वेंडर मार्केट की सफाई नहीं कर सकता है?जिस एजेंसी को नयी बिल्डिंग का मेंटेनेंस का जिम्मा दिया गया है, वह आखिर ऐसा क्या कर रही है कि उसे इतनी मोटी रकम दी जा रही है?
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