एक रुपये शुल्क में महिलाओं के नाम नहीं हो पायेगी आवास बोर्ड की जमीन की रजिस्ट्री

Updated at : 25 Sep 2019 1:19 AM (IST)
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एक रुपये शुल्क में महिलाओं के नाम नहीं हो पायेगी आवास बोर्ड की जमीन की रजिस्ट्री

बिपिन सिंह, रांची : आवास बोर्ड की जमीन या फ्लैट फ्री होल्ड कराने के बाद महिलाओं को एक रुपये के शुल्क पर रजिस्ट्री नहीं की जा सकेगी. बोर्ड की जमीन या फ्लैट पर महिलाओं के नाम निबंधन करवाने पर एक रुपये के टोकन शुल्क से संबंधित नियम लागू नहीं होगा. यानी, बोर्ड की जमीन फ्री […]

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बिपिन सिंह, रांची : आवास बोर्ड की जमीन या फ्लैट फ्री होल्ड कराने के बाद महिलाओं को एक रुपये के शुल्क पर रजिस्ट्री नहीं की जा सकेगी. बोर्ड की जमीन या फ्लैट पर महिलाओं के नाम निबंधन करवाने पर एक रुपये के टोकन शुल्क से संबंधित नियम लागू नहीं होगा. यानी, बोर्ड की जमीन फ्री होल्ड होने के बाद उसका निबंधन कराने के लिए महिलाओं को भी पुरुषों के बराबर भू-राजस्व द्वारा निर्धारित निबंधन शुल्क व स्टांप ड्यूटी भी देय होगा.

बोर्ड की जमीन फ्री होल्ड कराने के लिए वन टाइम कनर्वजन फीस भी देनी पड़ेगी. कनर्वजन फीस देने के बाद बोर्ड द्वारा आवंटित की गयी आवासीय संपदाओं को लीज होल्ड से फ्री होल्ड में परिवर्तित कर निबंधित कराया जा सकेगा. कनर्वजन फीस देकर लीज होल्ड से फ्री होल्ड में परिवर्तित करने के लिए सरकार को निबंधन शुल्क व स्टांप ड्यूटी भी देय होगी.
15 प्रतिशत और 10 प्रतिशत देनी होगी कनर्वजन फीस : बोर्ड की जमीन या फ्लैट के अद्यतन मूल्य की गणना लीज होल्ड से फ्री होल्ड में परिवर्तन के लिए की जानेवाली डीड के निबंधन के आधार पर की जायेगी.
रांची, जमशेदपुर व आदित्यपुर में कनर्वजन फीस आवासीय संपदा की कीमत की 15 प्रतिशत निर्धारित की गयी है. वहीं, देवघर, दुमका, धनबाद, बोकारो, हजारीबाग, चाईबासा, डालटेनगंज, साहेबगंज व गोमिया में 10 प्रतिशत राशि कनर्वजन फीस के रूप में देय होगी.
नो ड्यूज होने पर ही दी जायेगी फ्री होल्ड करने की अनुमति : कैबिनेट ने आवास बोर्ड की जमीन और फ्लैटों को फ्री होल्ड करने का फैसला किया था. उस फैसले के आलोक में नगर विकास विभाग ने गजट प्रकाशित कर दिया है. गजट में कहा कि गया है कि फ्री होल्ड करने के लिए सभी तरह के विचलन का नियमितीकरण जरूरी होगा.
नो ड्यूज के बाद ही बोर्ड द्वारा फ्री होल्ड करने की अनुमति दी जायेगी. संपदा मूल पट्टाधारक के कब्जे में नहीं होने पर फ्री होल्ड जिस व्यक्ति के पक्ष में प्रस्तावित है, उसके पास संपदा का कब्जा होना आवश्यक है. पट्टागत संपदा के पक्ष में बकाया होने पर बोर्ड द्वारा निर्धारित ब्याज दर पर दंड के साथ बकाया भुगतान करने के बाद भी फ्री होल्ड पर विचार किया जायेगा.
नहीं बदलेगी जमीन की प्रकृति : गजट में यह भी साफ किया गया है कि फ्री होल्ड करने के बाद भी जमीन की प्रकृति में बदलाव नहीं किया जायेगा. बोर्ड द्वारा केवल आवासीय उपयोग के लिए दी गयी लीज होल्ड के ही आधार पर किया जायेगा.
जिस उद्देश्य से भूमि लीज पर दी गयी थी, फ्री होल्ड करने पर उसमें कोई परिवर्तन नहीं होगा. फ्री होल्ड करने के बाद इंडीविजुवल हाउस होल्ड प्लाॅट पर ग्रुप हाउसिंग की योजना का कार्यान्वयन नहीं किया जा सकेगा.
आवासीय पर 15 और कॉमर्शियल जमीन पर बाजार मूल्य की 30 फीसदी देनी होगी राशि
रांची. खास महाल की लीज भूमि को फ्री होल्ड करने के लिए लोगों को बाजार मूल्य से एक निर्धारित राशि का भुगतान करना होगा. आवासीय जमीन के एवज में वर्तमान बाजार मूल्य का 15 फीसदी देना होगा. वहीं, कॉमर्शियल भूमि के वर्तमान बाजार मूल्य के एवज में 30 फीसदी राशि देनी होगी. इस प्रावधान का उल्लेख खास महाल जमीन को फ्री होल्ड करने के लिए जारी संकल्प में किया गया है.
संकल्प में इसका उल्लेख है कि सभी मामले को एक साथ फ्री होल्ड नहीं किया जायेगा, बल्कि हर मामले को देखा जायेगा. फ्री होल्ड करने के पहले यह सुनिश्चित किया जायेगा कि पुन: इस जमीन तो जनोपयोग में तो नहीं लाया जायेगा. लीज जमीन को तभी फ्री होल्ड किया जायेगा, जब सारे संबंधित उल्लंघनों को नियमित करते हुए लीज नवीकरण किया गया हो.
फ्री होल्ड करने के लिए निबंधन की जिम्मेवारी लीज होल्डर की होगी. उसके द्वारा ही नियमानुसार निबंधन व मुद्रांक शुल्क दिया जायेगा. फ्री होल्ड करने के लिए आवेदन देने की अधिकतम अवधि तीन वर्ष रखी गयी है. संकल्प में यह भी लिखा गया है कि निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद लीज की शर्त्तों का उल्लंघन होनेवाले मामलों में कानूनी प्रावधान कड़ाई से लागू किये जायेंगे.
वर्षों से की जा रही थी मांग : खास महाल भूमि को फ्री होल्ड करने की मांग वर्षों से की जा रही थी. खास महाल भूमि पर रह रहे लोगों व सामाजिक संगठनों द्वारा सरकार को पत्र भी दिया जा रहा था. इसके बाद ही सरकार ने यह निर्णय लिया. राज्य में खास महाल भूमि 30 वर्षों के लिए लीज बंदोबस्त की जाती है. सरकार समय-समय पर लीज बंदोबस्ती या नवीकरण के लिए सलामी व लगान दर निर्धारित करती रही है.
उच्च स्तरीय समिति ने दी थी रिपोर्ट : सरकार ने सदस्य राजस्व पर्षद की अध्यक्षता में एक कमेटी बनायी थी. इस कमेटी को खास महाल भूमि के मामले में विकल्पों पर विचार कर रिपोर्ट देने को कहा गया था. इसमें फ्री होल्ड का भी जिक्र था. समिति की अनुशंसा के आलोक में राज्य सरकार ने खास महाल की जमीन को फ्री होल्ड करने का निर्णय लिया है.
ध्यान देनेवाली बात
खास महाल की लीज भूमि को फ्री होल्ड करने के लिए जारी किया गया संकल्प
एक साथ फ्री होल्ड नहीं किये जायेंगे सभी मामले, हर मामले को अलग-अलग देखा जायेगा
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