एचइसी ने बनाया स्वदेशी हाइड्रॉलिक एक्सकेवेटर

Updated at : 14 Sep 2019 5:33 AM (IST)
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एचइसी ने बनाया स्वदेशी हाइड्रॉलिक एक्सकेवेटर

अंजनी कुमार सिंह सेहत सुधारने की कवायद, एक्सकेवेटर का निर्यात करेगा एचइसी नयी दिल्ली : पूंजी की कमी से जूझ रहे एचइसी ने एक आधुनिक हाइड्रोलिक एक्सकेवेटर बनाया है. इसे इसी महीने लांच किया जायेगा. यह एक्सकेवेटर पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से बना है, जिसका उपयोग खनन और निर्माण कार्य में किया जायेगा. इसे बनाने […]

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अंजनी कुमार सिंह
सेहत सुधारने की कवायद, एक्सकेवेटर का निर्यात करेगा एचइसी
नयी दिल्ली : पूंजी की कमी से जूझ रहे एचइसी ने एक आधुनिक हाइड्रोलिक एक्सकेवेटर बनाया है. इसे इसी महीने लांच किया जायेगा. यह एक्सकेवेटर पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से बना है, जिसका उपयोग खनन और निर्माण कार्य में किया जायेगा.
इसे बनाने में वित्तीय मदद भारी उद्योग मंत्रालय के ‘इनहैंसमेंट ऑफ कंपीटिटेवनेस इन इंडियन कैपिटल गुड्स सेक्टर’ योजना के तहत दिया गया है. यदि यह सफल रहा, तो इससे एचइसी की वित्तीय सेहत सुधारने में मदद मिलेगी.
भारी उद्योग मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक एचइसी काे वैसे उपकरण भी बनाने पर जोर देने को कहा गया है, जिसकी बाजार में मांग हो और जिससे उसका निर्यात किया जा सके. एचइसी के पास तकनीक, आइडिया और विजन और अच्छे वर्कर हैं तथा वह ऐसा करने में सक्षम है.
केंद्र सरकार इसके लिए कैपिटल गुड्स पॉलिसी के तहत वित्तीय मदद देगी. विदेशी बाजार में ऐसे उपकरणों की काफी मांग है और स्वदेशी तकनीक से बनी इसकी कीमत भी दूसरे देशों के उपकरणों से कम होगी. ऐसे में अगर यह सफल रहा, तो इसके निर्यात की भी योजना है.
एचइसी को कार्ययोजना बनाने का निर्देश
मंत्रालय की ओर से एचइसी को एक कार्ययोजना बनाने को भी कहा गया है कि वे वर्तमान संसाधन में कैसे कंपनी के कामकाज को परंपरागत काम से अन्य कामों की ओर ले जा सकते हैं. उन्हें बाजार को ध्यान में रखते हुए वैसे उपकरणों की भी खोज करनी है, जिसकी मांग ज्यादा हो और उसका निर्यात करने पर एचइसी को आर्थिक लाभ भी मिले.
सस्ता मजबूत और टिकाऊ है यह एक्सकेवेटर
खनन और निर्माण कार्य में प्रयोग में लाये जानेवाले एक्सकेवेटर का उपयोग अब तक सीमित तरह से किया जाता है, लेकिन एचइसी द्वारा बनाये गये एक्सकेवेटर अन्य एक्सकेवेटर की तुलना में सस्ता, मजबूत, टिकाऊ और जरूरत को पूरा करने वाला है. इसे बनाने में तकनीकी सहयोग इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, धनबाद ने दिया है, लेकिन डिजाइन और अन्य सभी काम एचइसी ने अपने संसाधनों के जरिये किया है. इसमें आगे के हिस्से पर पांच क्यूबिक मीटर शॉवेल लगा हुआ है.
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