रांची : मरीजों और मेडिकल स्टूडेंट्स में हाथापाई की नौबत, ओपीडी ठप रहने से 1600 मरीज लौटे
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 06 Aug 2019 8:51 AM
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नेशनल मेडिकल कमीशन बिल के विरोध में रिम्स के छात्रों का प्रदर्शन रांची : नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) बिल के विरोध में सोमवार को रिम्स के मेडिकल छात्र-छात्राओं ने प्रदर्शन किया. विद्यार्थियों ने पंजीयन काउंटर व ओपीडी को बंद कराया. इस वजह से 1600 से अधिक मरीजों को बिना परामर्श के लौटना पड़ा. मेडिकल स्टूडेंट्स […]
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नेशनल मेडिकल कमीशन बिल के विरोध में रिम्स के छात्रों का प्रदर्शन
रांची : नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) बिल के विरोध में सोमवार को रिम्स के मेडिकल छात्र-छात्राओं ने प्रदर्शन किया. विद्यार्थियों ने पंजीयन काउंटर व ओपीडी को बंद कराया. इस वजह से 1600 से अधिक मरीजों को बिना परामर्श के लौटना पड़ा. मेडिकल स्टूडेंट्स ने सीनियर डॉक्टरों से अपने भविष्य की दुहाई देकर ओपीडी का बहिष्कार करने का आग्रह किया.
इसके बाद सीनियर डॉक्टर ओपीडी से उठ कर चले गये. इस दौरान मरीज व उनके परिजनों ने भी हंगामा किया़ विरोध दर्ज कराने जब निदेशक कार्यालय पहुंचे, तो मेडिकल छात्रों का उनके साथ विवाद शुरू हो गया. मेडिकल छात्र मरीज व परिजनों के साथ मारपीट पर उतारू हो गये. गाली-गलौज तक की नौबत आ गयी, लेकिन किसी तरह मामला शांत हुआ. इसके बाद मरीज वहां से चले गये.
ओपीडी बंद होने से सबसे ज्यादा परेशानी दूर-दराज से आये मरीजों को हुई. हालांकि दूसरी पाली में तीन बजे के बाद पंजीयन काउंटर खुला, लेकिन छात्रों ने दोबारा बंद करा दिया. इस बीच जिन मरीजों की पर्ची बन गयी थी, उनको परामर्श मिला. इएनटी, मेडिसिन व नेत्र ओपीडी में कुछ मरीजों को जूनियर डाॅक्टरों ने परामर्श दिया. इधर, जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन (जेडीए) ने अप्रत्यक्ष रूप से विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया. वहीं रिम्स प्रबंधन असहाय दिखा. इधर, जेडीए का कहना है कि मरीजों के साथ मारपीट पर उतारू जैसी बात नहीं हुई है.
बच्चों को नहीं लगा टीका, बैरंग लौटे अभिभावक : शिशु विभाग का ओपीडी बंद होने के कारण सोमवार को बच्चों का टीकाकरण भी प्रभावित रहा. अभिभावक टीका दिलाने के लिए बच्चों को लेकर आये थे, लेकिन ओपीडी में डॉक्टर द्वारा परामर्श नहीं देने पर टीकाकरण नहीं हो सका. इस कारण घंटों इंतजार करने के बाद लोगों को लौटना पड़ा. लोगों से मंगलवार को आने को कहा गया.
नहीं हो सकी मरीजों की जांच
मेडिकल स्टूडेंट्स के विरोध प्रदर्शन में जूनियर डॉक्टर भी शामिल थे. इस कारण पैथोलॉजी व रेडियोलॉजी जांच प्रभावित रही. ओपीडी में डॉक्टरों द्वारा परामर्श नहीं देने से एमआरआइ, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड आदि सेंटर में मरीज नहीं दिखे.
शांतिपूर्वक विरोध करें, मरीजों को दिक्कत न हो
रिम्स निदेशक डॉ दिनेश कुमार सिंह ने विरोध प्रदर्शन करनेवाले विद्यार्थियों को अपने कार्यालय में बुला कर कहा कि ओपीडी संचालित करने में बाधा उत्पन्न नहीं करें. उन्होंने कहा कि दिल्ली के मेडिकल छात्रों ने बहिष्कार को वापस ले लिया है. अगर आपलोगों को विरोध करना ही है, तो शांतिपूर्ण तरीके से करें. इससे मरीजों को किसी भी सूरत में परेशानी नहीं होनी चाहिए.
क्यों हो रहा है एनएमसी बिल का विरोध
एनएमसी बिल का विरोध मेडिकल स्टूडेंट्स इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि छह महीने का एक ब्रिज कोर्स कर कोई भी झोला छाप प्राइमरी हेल्थ सेंटर में सेवा दे सकता है और मरीजों का इलाज कर सकता है. वहीं नेक्स्ट इग्जाम लिया जायेगा, जिसमें एमबीबीएस के बाद एक परीक्षा देनी होगी. इसके बाद लाइसेंस मिलेगा. पीजी मेें दाखिले के लिए भी नेक्स्ट एग्जाम देना पड़ेगा.
1800 से 2000 मरीज रिम्स ओपीडी में प्रतिदिन परामर्श के लिए आते हैं
60 फीसदी मरीजों को राज्य के विभिन्न जिलों से बेहतर इलाज के लिए रिम्स रेफर किया जाता है
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