रामगढ़ इंजीनियरिंग कॉलेज का हाल बदहाल, उपस्थिति सहित सैलरी स्लिप का रिकॉर्ड भी कोलकाता में

Updated at : 05 Aug 2019 8:54 AM (IST)
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रामगढ़ इंजीनियरिंग कॉलेज का हाल बदहाल, उपस्थिति सहित सैलरी स्लिप का रिकॉर्ड भी कोलकाता में

संजय नियमों का नहीं हुआ पालन पूरी व्यवस्था पर संदेह, दूसरे कॉलेज भी बदहाल विभाग ने अब तक नहीं बनायी मॉनिटरिंग कमेटी रांची : टेक्नो इंडिया, कोलकाता द्वारा संचालित रामगढ़ इंजीनियरिंग कॉलेज की जांच से फिर स्पष्ट हो गया है कि पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड में संचालित इसके कॉलेजों में पठन-पाठन की हालत खस्ता है. […]

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संजय
नियमों का नहीं हुआ पालन
पूरी व्यवस्था पर संदेह, दूसरे कॉलेज भी बदहाल
विभाग ने अब तक नहीं बनायी मॉनिटरिंग कमेटी
रांची : टेक्नो इंडिया, कोलकाता द्वारा संचालित रामगढ़ इंजीनियरिंग कॉलेज की जांच से फिर स्पष्ट हो गया है कि पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड में संचालित इसके कॉलेजों में पठन-पाठन की हालत खस्ता है.
सरकार भी इन तकनीकी संस्थानों की मॉनिटरिंग नहीं कर रही है, जबकि इनके भवन व जमीन सहित अन्य संसाधन राज्य सरकार के हैं. उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारियों ने सत्र 2018-19 के दूसरे सत्र में रामगढ़ इंजीनियरिंग कॉलेज का निरीक्षण किया था. रिपोर्ट मिली कि उक्त संस्थान बिना पर्याप्त शिक्षक, लैब अटेंडेंट और अटेंडेंस का चल रहा है. यहां के विद्यार्थियों व फैकल्टी की उपस्थिति तथा फैकल्टी के सैलरी स्लिप का रिकॉर्ड संस्थान या स्थानीय स्तर पर नहीं, कोलकाता में है. वर्ष 2013 से शुरू इस कॉलेज का स्तर ऐसा है कि यहां नामांकन वर्षवार लगातार घट रहा है.
निरीक्षण के वक्त कुल 300 सीटों वाले इस कॉलेज में सिर्फ 160 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे थे. विवि की परीक्षा में शामिल होने के लिए कम से कम 75 फीसदी अटेंडेंस जरूरी है. वहीं रामगढ़ इंजीनियरिंग कॉलेज में विद्यार्थियों की अौसत उपस्थिति 50 फीसदी ही है. ऐसे में यह सवाल उठता है कि यहां के विद्यार्थी परीक्षा कैसे दे रहे हैं. दूसरी कई गंभीर कमियां भी पायी गयी थीं.
फीस व अन्य शुल्क सर्वाधिक पर, पठन-पाठन सुविधा नहीं : उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग के चार कॉलेजों का संचालन पीपीपी मोड में टेक्नो इंडिया, कोलकाता के द्वारा किया जा रहा है. इनमें सिल्ली पॉलिटेक्निक तथा रामगढ़, चाईबासा व दुमका इंजीनियरिंग कॉलेज शामिल हैं.
इन सभी कॉलेजों से पूर्व में भी शिकायतें मिली हैं. सरकार ने इन सभी कॉलेजों का निर्माण करोड़ों की लागत से खुद किया है. लेकिन यहां 60 फीसदी (करीब 40 फीसदी फी वेवर तथा फ्री सीट को छोड़) विद्यार्थियों से अन्य संस्थानों के मुकाबले अधिक फीस ली जा रही है. यहां सुविधाओं के लिए सरकार को प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग कमेटी गठित करनी थी, जो जनवरी 2013 में हुए समझौते के छह साल बाद आज तक गठित नहीं हुई है.
शर्तों की हुई अनदेखी
विभाग की लापरवाही से पीपीपी मोड में संचालित कॉलेजों में तय शर्तें लागू नहीं हो रही हैं. वहीं कॉलेज प्रबंधन स्तर से कई रिपोर्ट नहीं मिल रही, जो जरूरी है.
इन शर्तों का उल्लंघन
प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग कमेटी नहीं बनायी (समझौता शर्त 4.1.3 सी)
स्टाफ-फैकल्टी की नियुक्ति एआइसीटीइ /यूजीसी की गाइडलाइन के तहत नहीं (समझौता शर्त 9.2 एफ)
फैकल्टी कैडर का वेतनमान एआइसीटीइ/यूजीसी के अनुरूप नहीं
रामगढ़ इंजीनियरिंग कॉलेज की रिपोर्ट
संस्थान में कुल 69 फैकल्टी. इनमें टेक्निकल एजुकेशन क्वालिटी इंप्रूवमेंट प्रोग्राम (टेकिप) के तहत नियुक्त 16 को छोड़ किसी फैकल्टी को एअाइसीटीइ नॉर्म्स के तहत वेतन भुगतान नहीं
निरीक्षण के दौरान लैब में ताले लगे थे तथा वहां कोई लैब इंचार्ज भी नहीं था
क्लास वाइज व फैकल्टी वाइज मास्टर टाइम टेबल संस्थान में नहीं. इससे स्मूथ क्लास होने पर शक
संस्थान के फैकल्टी को विवि से अनुमोदन नहीं
किसी फैकल्टी व स्टाफ संबंधी स्थापना फाइल मौजूद नहीं
लैब के विभिन्न उपकरण का उचित रखरखाव नहीं, कुछ के जरूरी पार्ट्स गायब
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